राजनीति

जाति जनगणना में OBC कैटेगरी को लेकर राहुल गांधी और खरगे ने PM मोदी को लिखी चिट्ठी, ड्रॉपडाउन लिस्ट की मांग

जाति जनगणना में OBC कैटेगरी को लेकर राहुल गांधी और खरगे ने PM मोदी को लिखी चिट्ठी, ड्रॉपडाउन लिस्ट की मांग

नई दिल्ली: लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी और राज्यसभा में नेता विपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने जाति जनगणना में ओबीसी (OBC) वर्गीकरण को लेकर सवाल उठाए हैं। दोनों कांग्रेस नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर जनगणना में जातियों की ड्रॉपडाउन सूची शामिल करने की मांग की है।

वर्तमान में जनगणना के दूसरे चरण में लोगों से करीब 40 सवाल पूछे जा रहे हैं। इसमें जाति से जुड़ी जानकारी भी शामिल है, लेकिन विपक्ष का आरोप है कि मौजूदा प्रक्रिया में ओबीसी के लिए स्पष्ट वर्गीकरण नहीं किया गया है।

खुले सवाल के तरीके पर उठाए सवाल

राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे का कहना है कि जाति की जानकारी दर्ज करने के लिए खुले सवाल का तरीका अपनाने से आंकड़ों में बड़ी असमानता पैदा हो सकती है। एक ही जाति अलग-अलग राज्यों, भाषाओं और क्षेत्रों में अलग-अलग नामों से जानी जाती है।

ऐसे में यदि लोगों से केवल अपनी जाति का नाम बताने को कहा जाता है और कोई निर्धारित सूची नहीं दी जाती, तो एक ही जाति के कई अलग-अलग नाम दर्ज हो सकते हैं। इससे जातियों के आंकड़ों का विश्लेषण मुश्किल हो सकता है और पिछड़े, अति पिछड़े तथा वंचित वर्गों की वास्तविक आबादी का आकलन प्रभावित होने की आशंका है।

OBC की सही आबादी का पता लगाने पर जोर

दोनों नेताओं ने कहा कि स्पष्ट OBC वर्गीकरण नहीं होने से देश में अन्य पिछड़ा वर्ग की वास्तविक आबादी का सटीक अनुमान लगाने में परेशानी हो सकती है। इसका असर सामाजिक न्याय, शिक्षा, रोजगार और सरकारी कल्याणकारी योजनाओं की नीतियां तैयार करने पर भी पड़ सकता है।

उन्होंने प्रधानमंत्री से मांग की है कि जातियों की एक मानकीकृत ड्रॉपडाउन सूची तैयार की जाए, ताकि अलग-अलग नामों के कारण एक ही जाति के आंकड़े कई हिस्सों में न बंटें।

SC-ST की तरह तैयार हो सूची

राहुल गांधी और खरगे ने सुझाव दिया कि OBC समेत अन्य जातियों की सूची तैयार करने के लिए सरकारी सामाजिक और शैक्षणिक पिछड़ा वर्ग सूचियों तथा भारतीय मानवशास्त्रीय सर्वेक्षण जैसे उपलब्ध स्रोतों का इस्तेमाल किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) की गणना में भी निर्धारित वर्गीकरण और कोड का इस्तेमाल किया जाता है। इसी तरह OBC के लिए भी स्पष्ट व्यवस्था बनाई जा सकती है।

बिहार और तेलंगाना के जाति सर्वेक्षण का दिया उदाहरण

कांग्रेस नेताओं ने तेलंगाना और बिहार के जाति सर्वेक्षणों का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां जातियों को अलग-अलग कोड और निर्धारित सूची के माध्यम से दर्ज किया गया था।

तेलंगाना में SC, ST, OBC और अन्य जातियों के लिए स्पष्ट कोडिंग व्यवस्था का इस्तेमाल किया गया, जबकि बिहार में 215 जातियों के लिए कोड सूची तैयार की गई थी।

मौजूदा प्रश्नावली में बदलाव की मांग

राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री मोदी से मौजूदा प्रश्नावली की समीक्षा करने और जरूरत पड़ने पर उसे बदलने की मांग की है। उन्होंने राजनीतिक दलों, विशेषज्ञों और आम लोगों से विचार-विमर्श के बाद ऐसी प्रश्नावली तैयार करने का आग्रह किया है, जिससे जाति जनगणना के आंकड़े अधिक सटीक, पारदर्शी और उपयोगी बन सकें।

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