Wednesday, September 16, 2026
राजनीति

महाराष्ट्र में टैक्सी चालकों के लिए मराठी बोलना अनिवार्य, परिवहन मंत्री बोले- ‘ढिलाई नहीं चलेगी’

महाराष्ट्र में टैक्सी चालकों के लिए मराठी बोलना अनिवार्य, परिवहन मंत्री बोले- ‘ढिलाई नहीं चलेगी’

मुंबई: महाराष्ट्र में टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा के इस्तेमाल को लेकर सरकार ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। राज्य के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाइक ने कहा है कि टैक्सी चालकों को मराठी बोलना सीखना होगा और इस मामले में किसी तरह की छूट नहीं दी जाएगी।

मुंबई की बहुभाषी और कॉस्मोपॉलिटन पहचान को लेकर उठ रहे सवालों के बीच मंत्री ने कहा कि मुंबई महाराष्ट्र का हिस्सा है और राज्य की भाषायी पहचान से इसे अलग नहीं किया जा सकता।

‘महाराष्ट्र में मराठी तो बोलनी ही होगी’

जब परिवहन मंत्री से पूछा गया कि मुंबई में देश के अलग-अलग हिस्सों से लोग आते हैं और कई भाषाएं बोलते हैं, ऐसे में क्या उन्हें दूसरी भाषाओं में बातचीत करने की छूट दी जानी चाहिए, तो सरनाइक ने इससे इनकार किया।

उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में रहने वालों को मराठी बोलनी होगी। जिन्हें मराठी नहीं आती, उन्हें इसे सीखना होगा। मंत्री ने कहा कि सरकार किसी की रोजी-रोटी प्रभावित नहीं करना चाहती, लेकिन मराठी भाषा का सम्मान करना जरूरी है।

‘मराठी अस्मिता से समझौता नहीं’

सरनाइक ने इसे मराठी अस्मिता से जुड़ा मुद्दा बताया। उन्होंने कहा कि सरकार मुंबई आने वाले सभी लोगों का स्वागत करती है, लेकिन उनसे महाराष्ट्र की भाषा और संस्कृति का सम्मान करने की अपेक्षा भी की जाती है।

मंत्री के मुताबिक, यह नीति पहले से मौजूद है, लेकिन अब इसे प्रभावी तरीके से लागू किया जा रहा है।

1600 स्थानों पर मराठी सिखाने की तैयारी

परिवहन मंत्री ने बताया कि सरकार ने लोगों को मराठी सीखने में मदद के लिए 1,600 अध्यापकों की नियुक्ति की है। उनके अनुसार, करीब 1,600 स्थानों पर मराठी भाषा सिखाने की व्यवस्था की जाएगी।

सरकार का कहना है कि टैक्सी चालकों को बुनियादी मराठी सिखाने का उद्देश्य यात्रियों और चालकों के बीच भाषा को लेकर होने वाले विवादों को कम करना भी है।

‘मुंबई महाराष्ट्र से बाहर नहीं’

मंत्री ने मुंबई के इतिहास और महाराष्ट्र के साथ उसके संबंध का हवाला देते हुए कहा कि मुंबई को महाराष्ट्र से अलग करके नहीं देखा जा सकता। उन्होंने कहा कि राज्य की संस्कृति और भाषा से जुड़े नियम मुंबई पर भी लागू होते हैं।

हालांकि, सरकार के इस रुख को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोग इसे भाषा और स्थानीय पहचान के संरक्षण की दिशा में कदम बता रहे हैं, जबकि विरोध करने वालों का तर्क है कि मुंबई जैसे महानगर में बहुभाषी संवाद को लेकर अधिक लचीलापन होना चाहिए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *