यूपीआई लेनदेन पर शुल्क लगाने की अटकलों को लेकर सियासत तेज: कांग्रेस ने मोदी सरकार पर अमेरिकी दबाव में झुकने का लगाया आरोप
यूपीआई लेनदेन पर शुल्क लगाने की अटकलों को लेकर सियासत तेज: कांग्रेस ने मोदी सरकार पर अमेरिकी दबाव में झुकने का लगाया आरोप
भारत में डिजिटल भुगतान के सबसे लोकप्रिय माध्यम यूपीआई (UPI) पर शुल्क लगाने की संभावनाओं को लेकर राजनीतिक घमासान मच गया है। विपक्षी दल कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया है कि सरकार अमेरिका के दबाव में आकर यूपीआई लेनदेन पर शुल्क वसूलने की तैयारी कर रही है, जिसका अंततः बोझ आम जनता और उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ेगा।
कांग्रेस के मुख्य आरोप और राहुल गांधी का बयान:
अमेरिकी दबाव और समर्पण का आरोप: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए दावा किया कि अमेरिकी भुगतान कंपनियां लंबे समय से भारत की ‘शून्य एमडीआर (MDR)’ नीति का विरोध करती रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिकी दबाव के सामने एक बार फिर झुक गए हैं।
अप्रत्यक्ष रूप से ग्राहकों पर बोझ: सरकार के इस रुख पर सवाल उठाते हुए राहुल गांधी ने कहा कि भले ही यह कहा जा रहा है कि ग्राहकों से सीधा शुल्क नहीं लिया जाएगा, लेकिन दुकानदारों और व्यापारियों पर लगने वाला अतिरिक्त शुल्क अंततः वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में जुड़कर आम आदमी की जेब से ही वसूला जाएगा। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि 2,000 रुपये से अधिक के व्यापारिक यूपीआई लेनदेन की संख्या भले ही करीब 5 प्रतिशत हो, लेकिन कुल लेनदेन मूल्य में इनकी हिस्सेदारी लगभग 65 प्रतिशत है।
मल्लिकार्जुन खरगे और जयराम रमेश के तीखे सवाल:
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे का हमला: कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार ने ‘‘यूपीआई पर शून्य शुल्क’’ की व्यवस्था को बदलकर अब इसे केवल 2,000 रुपये तक सीमित कर दिया है। उन्होंने दावा किया कि 5,000 रुपये के लेनदेन पर 25 रुपये और 10,000 रुपये के लेनदेन पर 50 रुपये तक की संभावित वसूली की जा सकती है। उन्होंने सवाल किया कि यदि व्यापारियों पर एमडीआर का अतिरिक्त बोझ डाला जाएगा, तो क्या महंगाई से जूझ रही जनता को इसका खामियाजा नहीं भुगतना पड़ेगा?
जयराम रमेश का तंज: कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने भी सरकार से सवाल किया कि क्या यह कदम अमेरिकी कंपनियों के लिए भारत के डिजिटल भुगतान बाजार के दरवाजे खोलने और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को खुश करने के उद्देश्य से उठाया जा रहा है।
सरकार का रुख और मौजूदा स्थिति:
दूसरी ओर, सरकार ने बैंकों और भुगतान प्रणाली प्रदाताओं को 2,000 रुपये तक के यूपीआई लेनदेन या रुपे डेबिट कार्ड के जरिये किए गए भुगतान पर कोई शुल्क न लगाने के निर्देश दिए हैं। हालांकि, सरकार की ओर से अभी तक यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं किया गया है कि 2,000 रुपये से अधिक के लेनदेन पर शुल्क लागू होगा या नहीं और इसका वित्तीय भार व्यापारियों पर किस प्रकार पड़ेगा। फिलहाल, इस राजनीतिक बयानबाजी के बाद डिजिटल भुगतान प्रणाली पर शुल्क को लेकर बहस तेज हो गई है।
