गुस्सा और तनाव कम करने में मदद कर सकता है भ्रामरी प्राणायाम, जानें करने का आसान तरीका
गुस्सा और तनाव कम करने में मदद कर सकता है भ्रामरी प्राणायाम, जानें करने का आसान तरीका
हेल्थ डेस्क: काम का दबाव, पढ़ाई या रोजमर्रा की व्यस्तता, नींद की कमी और लगातार चिंता का असर हमारे मूड पर पड़ सकता है। कई बार छोटी-सी बात भी चिड़चिड़ापन या गुस्सा बढ़ाने के लिए काफी होती है। ऐसे में कुछ लोग भ्रामरी प्राणायाम को रिलैक्सेशन के लिए अपनी दिनचर्या में शामिल करते हैं।
क्या है भ्रामरी प्राणायाम?
भ्रामरी प्राणायाम योग का एक श्वास अभ्यास है। इसमें सांस बाहर छोड़ते समय भौंरे जैसी गुनगुनाहट की आवाज निकाली जाती है। अभ्यास के दौरान ध्यान सांस और आवाज पर रखने से कुछ समय के लिए मन को परेशान करने वाले विचारों से हटाने में मदद मिल सकती है।
अगर किसी बात पर गुस्सा आ रहा हो, तो तुरंत प्रतिक्रिया देने के बजाय कुछ देर शांत बैठकर धीमी सांसों पर ध्यान देना उपयोगी हो सकता है। इससे प्रतिक्रिया देने से पहले खुद को थोड़ा समय मिल जाता है।
कैसे करें भ्रामरी प्राणायाम?
इसके लिए किसी शांत और आरामदायक जगह पर बैठें। इसके बाद:
आराम से बैठकर कमर और गर्दन को सीधा रखें।
आंखें बंद करके सामान्य रूप से कुछ सांसें लें।
नाक से धीरे-धीरे गहरी सांस लें।
सांस छोड़ते समय हल्की ‘हम्म्…’ जैसी गुनगुनाहट करें।
आवाज और सांस के प्रवाह पर ध्यान केंद्रित रखें।
अपनी सुविधा के अनुसार इसे कुछ बार दोहराएं।
अभ्यास के दौरान सांस को जबरदस्ती रोकने या आवाज निकालने के लिए शरीर पर दबाव डालने की जरूरत नहीं है।
तनाव और एकाग्रता में हो सकता है फायदा
नियमित रूप से योग और नियंत्रित श्वास अभ्यास करने से कुछ लोगों को तनाव कम महसूस करने और मानसिक रूप से रिलैक्स होने में मदद मिल सकती है। भ्रामरी के दौरान सांस और आवाज पर ध्यान केंद्रित करने से एकाग्रता बढ़ाने और कुछ समय के लिए मन को शांत करने में भी मदद मिल सकती है।
हालांकि, इसे किसी बीमारी का इलाज नहीं माना जाना चाहिए। अगर गुस्सा, चिंता या तनाव लगातार बना रहता है और रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही है, तो किसी योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से बात करना बेहतर है।
किन बातों का रखें ध्यान?
भ्रामरी करते समय अपनी क्षमता से ज्यादा जोर न लगाएं। नाक या कान में संक्रमण अथवा कोई अन्य परेशानी होने पर इसे करने से पहले स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर है। अभ्यास के दौरान असहजता महसूस हो तो उसे रोक दें।
