6 महीने के बाद बच्चे की डाइट में शामिल किए जा सकते हैं ये पौष्टिक खाद्य पदार्थ
6 महीने के बाद बच्चे की डाइट में शामिल किए जा सकते हैं ये पौष्टिक खाद्य पदार्थ
जब बच्चा करीब छह महीने का हो जाता है, तो स्तनपान के साथ धीरे-धीरे पूरक आहार शुरू किया जाता है। इस दौरान भोजन का उद्देश्य सिर्फ पेट भरना नहीं, बल्कि बच्चे को उसकी वृद्धि और विकास के लिए जरूरी पोषक तत्व देना भी होता है।
अखरोट की प्यूरी या बारीक पाउडर
अखरोट में हेल्दी फैट और प्लांट-बेस्ड ओमेगा-3 फैटी एसिड पाया जाता है। छह महीने के बाद इसे साबुत या बड़े टुकड़ों में न दें, क्योंकि इससे चोकिंग का खतरा हो सकता है। इसकी बहुत बारीक प्यूरी या पाउडर थोड़ी मात्रा में दलिया, दही या फल की प्यूरी में मिलाया जा सकता है।
पहली बार अखरोट या कोई अन्य नया खाद्य पदार्थ देने पर एलर्जी के संभावित लक्षणों पर ध्यान दें।
अंडा भी हो सकता है पौष्टिक विकल्प
अंडे में प्रोटीन के अलावा कई विटामिन और मिनरल होते हैं। इसकी जर्दी में कोलीन पाया जाता है, जो शरीर में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और मस्तिष्क तथा तंत्रिका तंत्र के सामान्य विकास में योगदान देता है।
बच्चे को अंडा हमेशा अच्छी तरह पकाकर और नरम रूप में दें। उबले अंडे को अच्छी तरह मैश करके नरम खाद्य पदार्थ के साथ मिलाया जा सकता है।
राजगीरा में प्रोटीन और आयरन
राजगीरा में प्रोटीन, आयरन और मैग्नीशियम जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं। इसे बच्चे के लिए तैयार करते समय अच्छी तरह पकाकर नरम करना जरूरी है। इसमें मैश की हुई सब्जियां या शकरकंद जैसी नरम चीजें मिलाई जा सकती हैं।
सिर्फ एक-दो खाद्य पदार्थों पर निर्भर न रहें
बच्चे के विकास के लिए अलग-अलग तरह के पौष्टिक खाद्य पदार्थ उम्र और निगलने की क्षमता के अनुसार धीरे-धीरे शामिल करना बेहतर है। छह महीने के बाद भी मां का दूध महत्वपूर्ण रहता है, जबकि पूरक आहार धीरे-धीरे उसके साथ जोड़ा जाता है।
ध्यान दें: छह महीने के बच्चे को नया भोजन शुरू करते समय उसकी बनावट, मात्रा और एलर्जी के जोखिम का ध्यान रखना जरूरी है। बच्चे के समय से पहले जन्म, एलर्जी या किसी अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्या की स्थिति में बाल रोग विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर है।
