कांग्रेस मुख्यालय में ‘वंदे मातरम्’ को लेकर विवाद, नेताओं के बयानों से गरमाई सियासत
कांग्रेस मुख्यालय में ‘वंदे मातरम्’ को लेकर विवाद, नेताओं के बयानों से गरमाई सियासत
नई दिल्ली: देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर नई दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में तिरंगा फहराया गया और ‘वंदे मातरम्’ का गायन हुआ। हालांकि, कार्यक्रम के दौरान सामने आए एक वीडियो को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। बीजेपी नेताओं ने आरोप लगाया कि सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने ‘वंदे मातरम्’ के पूरे गायन पर आपत्ति जताई। कांग्रेस नेताओं ने इन आरोपों पर अलग-अलग स्पष्टीकरण दिया है।
जयराम रमेश बोले- खड़गे के लिए कुर्सी की बात थी
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने कहा कि सोनिया गांधी ने ‘वंदे मातरम्’ को लेकर किसी तरह की आपत्ति नहीं जताई थी। उनके मुताबिक, सोनिया गांधी ने मल्लिकार्जुन खड़गे के लिए कुर्सी की व्यवस्था करने को कहा था, क्योंकि वह काफी देर से खड़े थे।
जयराम रमेश ने स्पष्ट किया कि सोनिया गांधी का इशारा गीत को रोकने या उस पर आपत्ति जताने के लिए नहीं था।
पवन खेड़ा ने कांग्रेस की परंपरा का दिया हवाला
कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने कहा कि कांग्रेस के कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम्’ की वही पंक्तियां गाने की परंपरा रही है, जिसे अक्टूबर 1937 में कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में तय किया गया था।
उन्होंने कहा कि उस समय गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की सलाह के आधार पर शुरुआती पंक्तियों के इस्तेमाल का फैसला हुआ था और तब से कांग्रेस के अधिवेशनों में इसी परंपरा का पालन होता आया है।
शकील अहमद खान ने कहा- केवल दो छंद गाने की परंपरा
कांग्रेस नेता शकील अहमद खान ने भी कहा कि कांग्रेस की परंपरा में ‘वंदे मातरम्’ के केवल दो छंद गाए जाते हैं। उन्होंने दावा किया कि देश में कई लोग पूरे गीत को स्वीकार नहीं करते और कहा कि कार्यक्रम में जो हुआ, वह कांग्रेस की परंपरा के अनुरूप नहीं था।
छह अंतरों को लेकर क्या है विवाद?
‘वंदे मातरम्’ में कुल छह अंतरे हैं। लंबे समय से सार्वजनिक और सरकारी कार्यक्रमों में इसके शुरुआती दो अंतरों को ही गाने की परंपरा रही है।
हालांकि, आपके दिए विवरण के अनुसार, 2026 में केंद्र सरकार की ओर से जारी नए प्रोटोकॉल के बाद पूरे ‘वंदे मातरम्’ के गायन को लेकर नई व्यवस्था शुरू हुई है। कांग्रेस मुख्यालय के कार्यक्रम में भी पूरा गीत गाए जाने के बाद यह विवाद सामने आया।
इस पूरे मामले में कांग्रेस नेताओं के अलग-अलग बयानों ने राजनीतिक बहस को और बढ़ा दिया है। फिलहाल विवाद का मुख्य मुद्दा यह है कि कांग्रेस मुख्यालय में पूरे गीत के गायन पर किसी नेता ने आपत्ति जताई थी या कार्यक्रम के दौरान उनकी प्रतिक्रिया किसी अन्य वजह से थी।
