महाराष्ट्र में कैब-टैक्सी चालकों के लिए मराठी बोलना अनिवार्य: नहीं सीखने पर रद्द हो सकता है लाइसेंस; परिवहन नियम में संशोधन की तैयारी
महाराष्ट्र में कैब-टैक्सी चालकों के लिए मराठी बोलना अनिवार्य: नहीं सीखने पर रद्द हो सकता है लाइसेंस; परिवहन नियम में संशोधन की तैयारी
मुंबई: महाराष्ट्र सरकार ने राज्य में कैब, टैक्सी और ऑटो-रिक्शा चालकों के लिए मराठी भाषा ज्ञान को अनिवार्य करने के उद्देश्य से कानून में बड़े बदलाव का प्रस्ताव रखा है। नए नियमों के तहत यदि कोई चालक मराठी बोलने या समझने में असमर्थ रहता है, तो उसका ड्राइविंग लाइसेंस निलंबित (Suspend) या स्थायी रूप से रद्द (Cancel) किया जा सकता है।
1. महाराष्ट्र मोटर व्हीकल रूल्स, 1989 में संशोधन का प्रस्ताव
प्रस्तावित बदलाव: राज्य के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाइक द्वारा साझा की गई ड्राफ्ट नोटिफिकेशन के अनुसार, ‘महाराष्ट्र मोटर व्हीकल्स रूल्स, 1989’ में संशोधन किया जा रहा है। इसके तहत मोटर कैब ड्राइवरों के लिए मराठी भाषा की व्यावहारिक समझ (Working Knowledge) अनिवार्य होगी।
कोई अतिरिक्त समय नहीं: परिवहन मंत्री ने स्पष्ट किया कि ऑटो और टैक्सी चालकों को मराठी सीखने के लिए 15 अगस्त 2026 तक का समय दिया गया था, जिसे अब और आगे नहीं बढ़ाया जाएगा।
1 महीने का समय: नया ड्राइविंग लाइसेंस जारी करते समय अथॉरिटी लिखित में यह शर्त जोड़ेगी कि चालक को 1 महीने के भीतर मराठी सीखनी होगी।
2. लाइसेंस निलंबन और रद्द करने का प्रावधान
3 महीने का निलंबन: यदि कोई चालक दी गई समय सीमा में मराठी नहीं सीख पाता है, तो उसका ड्राइविंग लाइसेंस शुरुआती तौर पर 3 महीने के लिए निलंबित कर दिया जाएगा।
स्थायी रद्दीकरण: निलंबन के बावजूद मराठी न सीखने की स्थिति में लाइसेंस को स्थायी रूप से रद्द करने का सख्त प्रस्ताव है। हालांकि, अंतिम कार्रवाई से पहले चालक को अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाएगा।
लाइसेंस रिन्यूअल पर टेस्ट: नए लाइसेंस के साथ-साथ पुराने लाइसेंस को रिन्यू (Renew) कराते समय भी ड्राइवरों को मराठी बोलकर दिखानी होगी।
3. फैसले के पीछे सरकार का तर्क और राजनीतिक माहौल
सुगम और सुरक्षित सफर: परिवहन मंत्री प्रताप सरनाइक के अनुसार, स्थानीय भाषा की समझ होने से ड्राइवरों और यात्रियों के बीच बातचीत आसान होगी, सफर सुरक्षित रहेगा और यातायात नियमों के क्रियान्वयन में मदद मिलेगी।
राजनीतिक पृष्ठभूमि: महाराष्ट्र में लंबे समय से मराठी भाषा और स्थानीय पहचान को लेकर आंदोलन होते रहे हैं। राज ठाकरे की मनसे (MNS) और शिवसेना जैसे दल इसकी मांग उठाते रहे हैं।
अंतिम चरण में प्रस्ताव: वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, संशोधन का प्रस्ताव पूरी तरह तैयार है और कानून मंत्रालय से अंतिम मंजूरी मिलते ही इसका आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी कर दिया जाएगा।
