राजनीति

संसद के मॉनसून सत्र का समापन: स्पीकर की चाय पार्टी का ‘इंडिया’ गठबंधन द्वारा बहिष्कार, विपक्षी एकजुटता में दिखी दरार

संसद के मॉनसून सत्र का समापन: स्पीकर की चाय पार्टी का ‘इंडिया’ गठबंधन द्वारा बहिष्कार, विपक्षी एकजुटता में दिखी दरार

​नई दिल्ली: संसद के पूरे 18 दिनों के मॉनसून सत्र के दौरान चले भारी हंगामे और गतिरोध के बीच गुरुवार को दोनों सदनों की कार्यवाही को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया। हालांकि, सत्र के अंतिम दिन परंपरा के अनुसार आयोजित होने वाली शिष्टाचार मुलाकातों के दौरान भी राजनीतिक कड़वाहट साफ नजर आई।

​1. स्पीकर ओम बिरला की चाय पार्टी का विपक्ष द्वारा बहिष्कार

​विपक्ष की दूरी: मॉनसून सत्र के समापन पर परंपरा के अनुसार लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने अपने चैंबर में सभी दलों के वरिष्ठ नेताओं को चाय पर आमंत्रित किया था। लेकिन सत्र के दौरान जारी तल्खी और गतिरोध के विरोध में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी (SP) और तृणमूल कांग्रेस (TMC) समेत ‘इंडिया’ गठबंधन के अधिकांश घटकों ने चाय पार्टी में शामिल न होने का फैसला किया।

​संसदीय कार्य मंत्री की अपील दरकिनार: सूत्रों के अनुसार, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और के.सी. वेणुगोपाल से स्पीकर के निमंत्रण को स्वीकार करने का व्यक्तिगत आग्रह किया था, लेकिन नेताओं ने इसे स्वीकार नहीं किया।

​2. ‘इंडिया’ गठबंधन में दोफाड़: DMK नेता कनिमोझी ने की शिरकत

​कनिमोझी की मौजूदगी बनी चर्चा का विषय: जहां एक ओर ‘इंडिया’ गठबंधन के शीर्ष दल चाय पार्टी से दूर रहे, वहीं तमिलनाडु की सत्ताधारी पार्टी डीएमके (DMK) की वरिष्ठ नेता और सांसद एम.के. कनिमोझी स्पीकर के चैंबर में आयोजित चाय पार्टी में शामिल हुईं।

​पीएम और गृह मंत्री रहे मौजूद: इस अनौपचारिक बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और कई वरिष्ठ केंद्रीय मंत्री उपस्थित थे, जहां कनिमोझी की मौजूदगी ने सियासी गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दिया है।

​3. डीएमके और ‘इंडिया’ गठबंधन के समीकरणों पर कयासबाजी

​तमिलनाडु की राजनीति में खिंचाव: तमिलनाडु में कांग्रेस द्वारा विजय की पार्टी ‘टीवीके’ (TVK) के प्रति नरम रुख और समर्थन की खबरों के बाद से ही कांग्रेस और डीएमके के बीच रिश्तों में नरमी-गरमी की बातें सामने आ रही हैं।

​परिसीमन मुद्दे पर रुख: सियासी हलकों में यह भी चर्चा तेज है कि आगामी परिसीमन (Delimitation) विधेयक और अन्य क्षेत्रीय मुद्दों पर डीएमके अपने स्टैंड को लेकर स्वतंत्र रास्ता अपना सकती है। चाय पार्टी में कनिमोझी की शिरकत को इसी राजनीतिक रणनीति और दूरी के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

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