इमरान खान की सुरक्षा को लेकर पाकिस्तान में मचा हड़कंप; पत्रकार के दावे के बाद ISPR ने दी सफाई
इमरान खान की सुरक्षा को लेकर पाकिस्तान में मचा हड़कंप; पत्रकार के दावे के बाद ISPR ने दी सफाई
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और PTI संस्थापक इमरान खान की सलामती और सेहत को लेकर अमेरिका में रह रहे वरिष्ठ पत्रकार वजाहत एस. खान के दावों के बाद राजनीतिक और सैन्य गलियारों में खलबली मच गई। हालांकि, पाकिस्तानी सेना के मीडिया विंग ISPR ने इन दावों को पूरी तरह खारिज किया है और PTI ने भी इमरान खान के जीवित होने की पुष्टि की है।
1. पत्रकार वजाहत एस. खान के दावे
GHQ में डर का माहौल: वजाहत खान ने सैन्य अधिकारियों (GHQ, MI) के हवाले से दावा किया कि सेना के भीतर गहरी जासूसी का खौफ है। अधिकारी सर्विलांस से बचने के लिए अपने मोबाइल फोन को ‘फैराडे केज’ की तरह इस्तेमाल करने हेतु किचन के माइक्रोवेव में रख रहे हैं।
अदियाला जेल पर मिलिट्री कंट्रोल: रावलपिंडी की अदियाला जेल (जहां इमरान अगस्त 2023 से बंद हैं) का नियंत्रण सिविल स्टाफ से हटाकर मिलिट्री इंटेलिजेंस (MI) को सौंपे जाने और इमरान की बैरक से GHQ को 24 घंटे लाइव सीसीटीवी स्ट्रीमिंग भेजे जाने का दावा किया गया।
2. ISPR का खंडन और PTI का बयान
ISPR की सफाई: सेना के मीडिया विंग ISPR ने इमरान खान की मौत या स्वास्थ्य संबंधी अफवाहों को पूरी तरह मनगढ़ंत और आधारहीन बताया।
’प्रूफ ऑफ लाइफ’: पत्रकार वजाहत खान ने कहा कि सेना की प्रतिक्रिया ही इस बात का सबूत (Proof of Life) है कि पूर्व प्रधानमंत्री जीवित हैं।
PTI और परिवार की पुष्टि: PTI ने बताया कि हाल ही में जब परिवार बुशरा बीबी से मिलने जेल पहुंचा, तो उन्होंने CCTV की लाइव फीड में इमरान खान को पत्नी से मिलने के लिए पैदल जाते देखा। हालांकि, पार्टी ने उनकी आंखों की रोशनी और ब्लड प्रेशर को लेकर चिंता जताई है।
3. राजनीतिक पृष्ठभूमि और सेना से टकराव
अप्रैल 2022 से तनाव: अविश्वास प्रस्ताव के जरिए सत्ता से हटाए जाने के बाद इमरान खान ने सेना पर तख्तापलट का आरोप लगाया था।
9 मई 2023 की हिंसा: इमरान की गिरफ्तारी के बाद समर्थकों द्वारा लाहौर कोर कमांडर आवास और सैन्य प्रतिष्ठानों पर हमले किए गए, जिसे सेना ने ‘रेड लाइन’ माना।
असीम मुनीर पर निशाना: PTI समर्थकों के निशाने पर इस समय सेना प्रमुख (फील्ड मार्शल) असीम मुनीर हैं। पार्टी का आरोप है कि सेना 2024 के चुनावों में हस्तक्षेप करने और इमरान खान पर मीडिया ब्लैकआउट बनाए रखने का काम कर रही है। वहीं, ISPR ने जेल से आने वाले राजनीतिक बयानों को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताया है।
