पाकिस्तानी सेना का बलूचिस्तान के सुराब जिले में हवाई हमला; महिलाओं व बच्चों समेत 30 से अधिक की मौत, मानवाधिकार समूहों ने जताया कड़ा विरोध
पाकिस्तानी सेना का बलूचिस्तान के सुराब जिले में हवाई हमला; महिलाओं व बच्चों समेत 30 से अधिक की मौत, मानवाधिकार समूहों ने जताया कड़ा विरोध
पाकिस्तानी वायुसेना ने बलूचिस्तान के सुराब जिले के गिदर इलाके में नागरिक ठिकानों पर जोरदार हवाई हमला (Air strike) किया है। स्थानीय रिपोर्ट्स और मानवाधिकार समूहों के अनुसार, इस हमले में महिलाओं और बच्चों सहित 30 से अधिक बेगुनाह नागरिकों की मौत हो गई है और कई अन्य गंभीर रूप से घायल हुए हैं।
1. घटना के मुख्य बिंदु व जमीनी स्थिति
आम नागरिकों को निशाना बनाना: बलूच मानवाधिकार कार्यकर्ता मीर यार बलूच के अनुसार, पाकिस्तानी सेना ने कोबरा गनशिप हेलीकॉप्टरों और ड्रोनों का इस्तेमाल कर आम बलूच नागरिकों के रिहायशी इलाकों पर बमबारी की, जिससे भारी तबाही हुई।
अस्पतालों की घेराबंदी व इलाज में बाधा: आरोप है कि हमले के बाद पाकिस्तानी सेना ने स्थानीय अस्पतालों को घेर लिया और डॉक्टरों तथा मेडिकल स्टाफ को डरा-धमकाकर घायलों का इलाज करने से रोका। समय पर इलाज न मिलने के कारण भी कई घायलों ने दम तोड़ दिया।
इलाके की नाकेबंदी: प्रभावित क्षेत्र को सेना द्वारा पूरी तरह सील कर दिया गया है, जहां एम्बुलेंस, राहत टीमों, पत्रकारों और मीडिया के प्रवेश पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है।
2. बलूच नेताओं व मानवाधिकार संगठनों की प्रतिक्रिया
सबिहा बलूच (नेता, बलूच यकजेहती कमेटी – BYC):
उन्होंने इस घटना को “नरसंहार” (Genocide) करार देते हुए कहा कि पाकिस्तान बेगुनाह बलूचों की हत्या करके अपना नियंत्रण कायम करने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से स्वतंत्र जांच और मानवीय मदद तुरंत पहुंचाने की अपील की।
बलूच वॉयस फॉर जस्टिस (BVJ):
इस मानवाधिकार संस्था ने घटना की स्वतंत्र, पारदर्शी और अंतरराष्ट्रीय निगरानी में जांच कराने की मांग की है। BVJ ने कहा कि सभी मृतकों व घायलों के नाम सार्वजनिक किए जाने चाहिए और जिम्मेदारों को कानून के कटघरे में खड़ा किया जाना चाहिए।
3. अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील
बलूच मानवाधिकार संगठनों ने संयुक्त राष्ट्र (UN), अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम (UK), यूरोपीय संघ (EU) और वैश्विक समुदाय से अपील की है कि वे बलूचिस्तान में हो रहे युद्ध अपराधों और मानवाधिकार उल्लंघनों पर अपनी चुप्पी तोड़ें और पाकिस्तानी सेना के खिलाफ सख्त रुख अपनाएं।
