दिल्ली हाई कोर्ट के पूर्व जस्टिस यशवंत वर्मा ‘कैश कांड’: जांच रिपोर्ट में तीनों आरोप सिद्ध; महाभियोग प्रस्ताव की तैयारी
दिल्ली हाई कोर्ट के पूर्व जस्टिस यशवंत वर्मा ‘कैश कांड’: जांच रिपोर्ट में तीनों आरोप सिद्ध; महाभियोग प्रस्ताव की तैयारी
दिल्ली हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ सरकारी आवास से भारी मात्रा में कैश बरामदगी मामले में तीन सदस्यीय जांच समिति ने अपने तीनों आरोपों को सही पाया है। सूत्रों के अनुसार, अब संसद के आगामी शीतकालीन सत्र में उनके खिलाफ महाभियोग (Impeachment) प्रस्ताव लाया जा सकता है।
1. जांच समिति द्वारा सिद्ध पाए गए 3 मुख्य आरोप
अवैध नकदी की बरामदगी: आधिकारिक आवास (30, तुगलक क्रेसेंट, दिल्ली) के स्टोररूम से 500 रुपये के नोटों के बंडल मिले। जस्टिस वर्मा इस नकदी के स्रोत और स्वामित्व का संतोषजनक स्पष्टीकरण देने में असमर्थ रहे।
साक्ष्यों से छेड़छाड़ व लापरवाही: कानूनी सीलिंग और निरीक्षण से पहले स्टोररूम की स्थिति में बदलाव पाया गया तथा कुछ करेंसी नोट गायब/अनुपलब्ध थे, जिसे साक्ष्यों के संरक्षण में गंभीर लापरवाही माना गया।
टालमटोल वाला रुख: 22 मार्च 2025 के जवाब समेत उनके द्वारा दिए गए स्पष्टीकरण टालमटोल वाले और संस्थागत जिम्मेदारी के विपरीत पाए गए।
2. कानूनी बहस और संवैधानिक पहलू
इस्तीफे के बाद भी नाम लिस्ट में: जस्टिस वर्मा अप्रैल में ही अपना इस्तीफा राष्ट्रपति को भेज चुके हैं। हालाँकि 1978 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार जज का इस्तीफा देते ही पद स्वतः समाप्त हो जाता है, फिर भी उनका नाम इलाहाबाद हाई कोर्ट की सूची में बना हुआ है।
पहला अनूठा मामला: यह भारतीय न्यायपालिका के इतिहास का पहला ऐसा मामला है, जहां किसी जज द्वारा इस्तीफा दिए जाने के बावजूद उनके खिलाफ जांच पूरी हुई और अब पद से हटाने के लिए महाभियोग प्रस्ताव लाया जा रहा है।
पक्ष रखने का मौका: महाभियोग प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान उन्हें संसद के समक्ष अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाएगा।
