राजनीति

कर्नाटक कैबिनेट विस्तार पर विवाद: डीके शिवकुमार की चेतावनी—”इस्तीफा दिया तो मिनटों में करेंगे स्वीकार”

कर्नाटक कैबिनेट विस्तार पर विवाद: डीके शिवकुमार की चेतावनी—”इस्तीफा दिया तो मिनटों में करेंगे स्वीकार”

​कर्नाटक की कांग्रेस सरकार में कैबिनेट विस्तार के बाद शुरू हुई विधायकों की बगावत पर उपमुख्यमंत्री/वरिष्ठ नेता डीके शिवकुमार ने सख्त रुख अपनाया है। 20 नए मंत्रियों के शपथ लेने के बाद जगह न मिलने से नाराज दो विधायकों द्वारा इस्तीफा देने और अन्य विधायकों द्वारा असंतोष जताने पर उन्होंने स्पष्ट कहा कि पार्टी सर्वोपरि है और अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

​(नोट: वर्तमान में कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया हैं और डीके शिवकुमार उपमुख्यमंत्री एवं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में संगठन व सरकार में प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं।)

​1. बागी विधायकों को डीके शिवकुमार का कड़ा संदेश

​इस्तीफे पर सख्त स्टैंड: डीके शिवकुमार ने स्पष्ट कहा, “राजनीति में इस्तीफे होते रहते हैं, उन्हें कोई रोक नहीं सकता। यदि कोई इस्तीफा देता है तो हम उसे कुछ ही मिनटों के अंदर स्वीकार कर लेंगे।”

​धैर्य रखने की सलाह: उन्होंने नाराज नेताओं से संयम बरतने की अपील करते हुए कहा कि राज्य सरकार के विभिन्न बोर्डों और निगमों (Boards and Corporations) में पद खाली हैं, जिन्हें जल्द भरा जाएगा और सभी को अवसर दिया जाएगा।

​2. अपना और पूर्व नेताओं का दिया उदाहरण

​खुद का उदाहरण: शिवकुमार ने याद दिलाया कि धर्म सिंह और सिद्धारमैया के पिछले सीएम कार्यकालों के दौरान उन्हें भी कैबिनेट में जगह नहीं मिली थी। यदि वे और जी. परमेश्वर उस समय इस्तीफा दे देते, तो आज इस मुकाम पर न होते।

​इतिहास का हवाला: उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री वीरेंद्र पाटिल के दौर का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय मल्लिकार्जुन खरगे और धर्म सिंह जैसे वरिष्ठ नेता भी मंत्री नहीं बन पाए थे, लेकिन धैर्य रखने के कारण बाद में उन्हें बड़े अवसर मिले।

​3. किन विधायकों ने दिया है इस्तीफा?

​कैबिनेट में जगह न मिलने के विरोध में दो प्रमुख विधायकों ने अपने पद से इस्तीफा दिया है:

​यशवंतरायगौड़ा वी. पाटिल (विधायक, इंडी सीट – विजयपुरा जिला)

​बेलूर गोपालकृष्ण (विधायक, सागर सीट – शिवमोग्गा जिला)

​डीके शिवकुमार ने अंत में दोहराया कि पार्टी के मजबूत रहने पर ही कार्यकर्ताओं और नेताओं का भविष्य सुरक्षित है, इसलिए सभी को निजी हितों के ऊपर पार्टी अनुशासन को प्राथमिकता देनी चाहिए।

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