बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सेना का बढ़ता संकट: ‘ऑपरेशन शाबान’ और बलूच प्रतिरोध
बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सेना का बढ़ता संकट: ‘ऑपरेशन शाबान’ और बलूच प्रतिरोध
पाकिस्तान वर्तमान समय में कई आंतरिक और बाहरी सुरक्षा चुनौतियों का सामना कर रहा है। एक तरफ अफगानिस्तान सीमा पर तनाव और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में राजनीतिक असंतोष है, तो दूसरी तरफ बलूचिस्तान में बलूच विद्रोहियों और पाकिस्तानी सेना के बीच हिंसक टकराव गहराता जा रहा है।
1. सैन्य अभियान और ‘ऑपरेशन शाबान’
हमले का जवाब: 6 जुलाई को जियारत स्थित ‘मांगी डैम पंपिंग स्टेशन’ की पुलिस पोस्ट पर बलूच विद्रोही हमलों के बाद, पाकिस्तानी सुरक्षा बलों और एजेंसियों ने संयुक्त रूप से ‘ऑपरेशन शाबान’ शुरू किया।
ऑपरेशन अल-अज्म: इसके साथ ही बलूचिस्तान में ‘ऑपरेशन अल-अज्म’ भी चलाया गया। हालांकि, इन ऑपरेशनों से बलूचिस्तान में तैनात पाकिस्तानी सैन्य यूनिटों की प्रशासनिक और सामरिक कमजोरियां उजागर हुई हैं।
2. मानवाधिकार उल्लंघन और बलूच लड़ाकों का कड़ा प्रतिरोध
जबरन गुमशुदगी और न्यायेतर हत्याएं: पाकिस्तानी सेना पर बलूचिस्तान के स्थानीय लोगों को जबरन गायब करने (Enforced Disappearances) और न्यायेतर हत्याओं (Extrajudicial Killings) के गंभीर आरोप हैं।
विद्रोहियों की बढ़ती क्षमता: इस तरह की सख्त सैन्य कार्रवाइयों के बावजूद, बलूच लड़ाकों ने अपनी पहुंच, समन्वय क्षमता और जमीनी ताकत का प्रदर्शन करते हुए सेना को कई हमलों में भारी नुकसान पहुँचाया है।
3. बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सेना और खुफिया तंत्र की तैनाती
बलूचिस्तान में पाकिस्तान की तीनों सेनाएं, तट रक्षक बल और इंटेलिजेंस सिस्टम बड़े पैमाने पर तैनात हैं:
थल सेना (Army): राज्य में मुख्य सैन्य अभियानों की कमान संभालती है।
नौसेना व कोस्ट गार्ड (Navy & Coast Guard): ग्वादर (Gwadar) डीप-वॉटर पोर्ट प्राथमिक नौसैनिक बेस के रूप में काम करता है, जहाँ पाकिस्तान कोस्ट गार्ड की तीसरी बटालियन तैनात है। इसके अलावा पासनी (Pasni), ओरमारा (Ormara) और जिवानी (Jiwani) में भी छोटे नेवल बेस मौजूद हैं।
खुफिया एजेंसियां (ISI): इंटर-सर्विस इंटेलिजेंस (ISI) रणनीति और खुफिया जानकारी जुटाने के लिए जिम्मेदार है, जिसका क्वेटा (Quetta) में मुख्य नियंत्रण केंद्र है।
4. विफलता के कारण: स्थानीय असंतोष और खुफिया विफलता
संसाधनों का शोषण व गरीबी: प्रचुर प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध होने के बावजूद बलूचिस्तान की बहुसंख्यक आबादी गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन कर रही है। स्थानीय लोग पाकिस्तानी सरकार को अपनी जमीन और संसाधनों का ‘शोषण करने वाला’ मानते हैं।
सटीक जानकारी की कमी: बलूच समाज में पाकिस्तान विरोधी भावना इतनी गहरी है कि सेना के लिए स्थानीय आबादी से विद्रोहियों के खिलाफ सटीक और विश्वसनीय खुफिया जानकारी (Ground Intelligence) जुटाना नामुमकिन साबित हो रहा है। सटीक जानकारी के अभाव में सेना के बड़े ऑपरेशन भी विफल हो रहे हैं।
