उत्तराखंड

संसद में राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट ने उठाई मांग: आगामी 2027 जनगणना में उत्तराखंड के लिए बने ‘विशेष पर्वतीय मॉडल’; दिया ‘अपनी गणना – अपना गांव’ का नारा

संसद में राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट ने उठाई मांग: आगामी 2027 जनगणना में उत्तराखंड के लिए बने ‘विशेष पर्वतीय मॉडल’; दिया ‘अपनी गणना – अपना गांव’ का नारा

​उत्तराखंड बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट ने संसद में राज्य की भौगोलिक विषमताओं और पलायन की गंभीर समस्या का मुद्दा जोर-शोर से उठाया। उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि उत्तराखंड जैसे सीमांत और पर्वतीय राज्य के लिए आगामी 2027 की जनगणना में पारंपरिक तरीकों के बजाय ‘अपनी गणना – अपना गांव’ अभियान के तहत एक विशेष नीति और मॉडल अपनाया जाए।

​1. क्यों जरूरी है जनगणना नीति में बदलाव?

​सदन में बोलते हुए महेंद्र भट्ट ने पर्वतीय क्षेत्रों में पलायन से जुड़ी जनसांख्यिकीय चुनौतियों को रेखांकित किया:

​कागजों में खाली दिखने का खतरा: उन्होंने कहा कि यदि पारंपरिक तरीके से जनगणना हुई, तो जो लोग रोजगार, शिक्षा या स्वास्थ्य के लिए अस्थायी रूप से शहरों में गए हैं, वे वहीं दर्ज हो जाएंगे।

​विकास योजनाओं पर असर: ऐसा होने पर पर्वतीय गांवों की आधिकारिक जनसंख्या कागजों में बेहद कम दिखेगी, जिससे गांवों को मिलने वाला केंद्रीय और राज्य बजट घटेगा। इसका सीधा असर वहां बनने वाले स्कूलों, अस्पतालों, सड़कों और बुनियादी ढांचे पर पड़ेगा।

​2. सीमांत गांवों का खाली होना ‘राष्ट्रीय सुरक्षा’ के लिए चुनौती

​महेंद्र भट्ट ने स्पष्ट किया कि ‘अपनी गणना – अपना गांव’ अभियान केवल विकास का ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा का भी एक महत्वपूर्ण आधार है:

​उत्तराखंड चीन (तिब्बत) और नेपाल जैसी संवेदनशील अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से सटा राज्य है।

​यदि सीमांत गांव पलायन के कारण खाली होते रहे और उनकी सही जनसांख्यिकी सामने नहीं आई, तो यह देश की सीमा सुरक्षा के लिए गंभीर चिंता का विषय बन जाएगा।

​3. केंद्र सरकार के सामने रखीं 4 मुख्य मांगें

​महेंद्र भट्ट ने सदन के माध्यम से केंद्र से विशेष नीति बनाने की अपील करते हुए निम्नलिखित प्रस्ताव रखे:

​विशेष जनगणना नीति: 2027 की जनगणना में उत्तराखंड के लिए ‘अपनी गणना – अपना गांव’ को एक जनआंदोलन के रूप में व्यापक प्रचार-प्रसार के साथ लागू किया जाए।

​दोहरा डेटा संग्रह (Dual Data Standard): जनगणना में अस्थायी पलायन (Temporary Migration) और मूल निवास (Permanent Address) दोनों का अलग-अलग डेटा जुटाया जाए, ताकि प्रवासियों का संबंध उनके मूल गांव से बना रहे।

​जनभागीदारी: इस प्रक्रिया को केवल सरकारी कर्मचारियों तक सीमित न रखकर ग्राम पंचायतों और स्थानीय सामाजिक संगठनों को इसमें सक्रिय रूप से जोड़ा जाए।

​राष्ट्रीय मॉडल: इस प्रयोग को देश के अन्य पर्वतीय राज्यों (जैसे हिमाचल प्रदेश, पूर्वोत्तर राज्यों) के लिए भी एक राष्ट्रीय मॉडल (National Model) के रूप में विकसित किया जाए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *