Thursday, July 30, 2026
Latest:
राजनीति

संसद से सड़क तक ‘Gen-Z’ का छाया खुमार: उद्धव ठाकरे ने शिवाजी महाराज और संत ज्ञानेश्वर से की तुलना, तो बांसुरी और प्रियंका गांधी ने इंटरनेट स्लैंग से साधा निशाना

संसद से सड़क तक ‘Gen-Z’ का छाया खुमार: उद्धव ठाकरे ने शिवाजी महाराज और संत ज्ञानेश्वर से की तुलना, तो बांसुरी और प्रियंका गांधी ने इंटरनेट स्लैंग से साधा निशाना

​मुंबई/नई दिल्ली:

संसद के मानसून सत्र और देश के मौजूदा राजनीतिक माहौल में ‘जेन-जी’ (Gen-Z) यानी आज की युवा पीढ़ी राजनीति के केंद्र में आ गई है। शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे से लेकर संसद में सत्तापक्ष और विपक्ष के कई दिग्गज नेता अब युवाओं को साधने के लिए इंटरनेट स्लैंग और ‘Gen-Z’ शब्दावली का खुलकर इस्तेमाल कर रहे हैं।

​1. उद्धव ठाकरे: “छात्रों को अपमानित करने वालों को छत्रपति शिवाजी महाराज का इतिहास याद रखना चाहिए”

​शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने युवाओं की तुलना महाराष्ट्र के महान महापुरुषों से करते हुए उन पर ‘कॉकरोच’ टिप्पणी करने वालों पर तीखा हमला बोला।

​इतिहास का दिया संदर्भ: उद्धव ठाकरे ने कहा, “जिन्हें ‘कॉकरोच’ कहकर नीचा दिखाया गया, वे जेन-जी (13-14 से 27-28 वर्ष) के युवा हैं। क्या छत्रपति शिवाजी महाराज की उम्र भी करीब यही नहीं थी, जब उन्होंने महज 17 साल की उम्र में तोरणा किला जीता था? क्या संत ज्ञानेश्वर भी बहुत कम उम्र के नहीं थे जब उन्होंने ‘ज्ञानेश्वरी’ लिखी थी? अपने समय में दोनों को भारी विरोध सहना पड़ा था, लेकिन शिवाजी महाराज कम उम्र में ही विशाल मुगल साम्राज्य से भिड़ गए थे।”

​वित्त मंत्री पर निशाना: उन्होंने परीक्षा पेपर लीक विवाद और अर्थव्यवस्था पर बोलते हुए सवाल उठाया, “वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पेपर लीक पर बयान क्यों दे रही हैं? क्या वे पेपर लीक को सही ठहराने आई हैं या महंगाई पर बात करने? रुपया गिर रहा है, लेकिन उस पर चर्चा करने के बजाय यह कहा जा रहा है कि पेपर लीक से छात्रों को तैयारी में मदद मिलती है। यह पूरी तरह से बेतुका है।”

​2. संसद में ‘Gen-Z’ स्लैंग का दबदबा

​संसदीय बहसों में पारंपरिक भाषणों के बजाय अब सोशल मीडिया और इंटरनेट स्लैंग का असर साफ देखने को मिल रहा है:

​बांसुरी स्वराज (भाजपा सांसद): संसद में प्रस्तावित विधेयक का समर्थन करते हुए भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज ने लोकप्रिय इंटरनेट अभिव्यक्ति ‘Clock It’ का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा, “Gen-Z की भाषा उधार लेते हुए मुझे कहना पड़ेगा कि मोदी जी ने यह विधायी समाधान देने में समय लगा दिया (Clocked it)।”

​प्रियंका गांधी वाड्रा (कांग्रेस सांसद): प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संवाद शैली और NEET-पेपर लीक मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने कहा:

​”अगर आप ‘Gen-Z’ का दिल जीतना चाहते हैं, तो अलग-अलग कैमरा एंगल से वीडियो बनाने से कोई फायदा नहीं होगा। प्रधानमंत्री को कैमरे का एंगल नहीं, बल्कि अपना नजरिया बदलने की जरूरत है। आपकी सरकार में युवाओं के साथ अन्याय हुआ है, इस सच्चाई को स्वीकार करें और जिम्मेदारी लें।”

​राजनीतिक विश्लेषकों का नजरिया:

​NEET परीक्षा विवाद, रोजगार और पेपर लीक जैसे मुद्दों के बीच ‘Gen Z’ (1997-2012 के बीच जन्मे युवा) देश का सबसे बड़ा और प्रभावकारी वोटर ग्रुप बन चुका है। यही वजह है कि सत्तापक्ष अपनी नीतियों को आधुनिक भाषा में पेश कर रहा है, तो वहीं विपक्ष युवाओं के गुस्से को भुनाने के लिए उन्हीं के अंदाज में सरकार पर हमलावर है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *