हरिद्वार कुंभ 2027 से पहले अखाड़ों में घमासान: निरंजनी गुट को नया उदासीन अखाड़े का समर्थन, बहुमत का दावा
हरिद्वार कुंभ 2027 से पहले अखाड़ों में घमासान: निरंजनी गुट को नया उदासीन अखाड़े का समर्थन, बहुमत का दावा
हरिद्वार: वर्ष 2027 में हरिद्वार में आयोजित होने वाले महाकुंभ मेले से पहले साधु-संतों की सर्वोच्च संस्था अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद में गुटबाजी और रार गहराती जा रही है। शुक्रवार को जूना अखाड़े में आयोजित साधु-संतों की महत्वपूर्ण बैठक में ‘श्री पंचायती अखाड़ा नया उदासीन’ के एक धड़े ने अखाड़ा परिषद के निरंजनी गुट को अपना समर्थन देने की घोषणा की।
इसके बाद निरंजनी गुट ने दावा किया है कि अब उन्हें कुल 13 में से 9 अखाड़ों का समर्थन हासिल हो चुका है, जिससे उनका संगठन और मजबूत हुआ है।
अखाड़ा परिषद में दो गुटों का विभाजन
उल्लेखनीय है कि कुल 13 अखाड़ों से मिलकर बनने वाली अखाड़ा परिषद इस समय दो स्पष्ट धड़ों में बंटी हुई है:
निरंजनी गुट: इसके अध्यक्ष निरंजनी अखाड़े के सचिव महंत रविंद्रपुरी और महामंत्री महंत हरिगिरि हैं।
महानिर्वाणी गुट: इसके अध्यक्ष महानिर्वाणी अखाड़े के सचिव महंत रविंद्रपुरी और महामंत्री महंत राजेंद्रदास हैं।
नया उदासीन अखाड़े के भीतर भी दो फाड़
बैठक के दौरान पंजाब से आए नया उदासीन अखाड़े के सचिव महंत गणेश दास के नेतृत्व में साधु-संतों ने निरंजनी गुट को समर्थन पत्र और शिकायती पत्र सौंपा:
आरोप: महंत गणेश दास ने आरोप लगाया कि उनके अखाड़े के कुछ साधु-संत प्राचीन धार्मिक परंपराओं का पालन नहीं कर रहे हैं और कुंभ मेले के दौरान देवताओं का परंपरानुसार स्नान तक नहीं कराया जा रहा है। उन्होंने ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
पलटवार: दूसरी ओर, नया अखाड़ा के मुख्य महंत भगत राम ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि पंजाब से आए संतों को वर्षों पहले अखाड़े की संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और विरोधी गतिविधियों के कारण बाहर निकाला जा चुका है। फर्जी दावा करने पर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
जांच और कानूनी राय की तैयारी
महंत हरिगिरि (महामंत्री): उन्होंने कहा कि अखाड़े की मर्यादा से जुड़ा मामला गंभीर है। परिषद इसकी निष्पक्ष जांच कराएगी और जरूरत पड़ने पर शासन-प्रशासन तथा कानूनी विशेषज्ञों की मदद ली जाएगी।
महंत रविंद्रपुरी (अध्यक्ष): उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका किसी अखाड़े से कोई व्यक्तिगत वैर नहीं है। बहुमत हमारे साथ है और उनकी परिषद ही पूरी एकजुटता के साथ आगामी 2027 कुंभ मेले में शाही स्नान व अन्य सनातन परंपराओं का निर्वहन करेगी।
