संसद में नीट मुद्दे पर घमासान जारी: विपक्ष का शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर अड़ाव, सरकार बोली- ‘हम चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार’
संसद में नीट मुद्दे पर घमासान जारी: विपक्ष का शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर अड़ाव, सरकार बोली- ‘हम चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार’
संसद के मानसून सत्र के चौथे दिन भी नीट (NEET) पेपर लीक और कथित अनियमितताओं को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जोरदार गतिरोध देखने को मिला। इसके चलते लगातार चौथे दिन दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) में प्रश्नकाल और शून्यकाल की कार्यवाही हंगामे की भेंट चढ़ गई।
विपक्ष की शर्त: ‘पहले धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, फिर चर्चा’
राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग दोहराते हुए सरकार को घेरा:
इस्तीफे की मांग: खड़गे ने कहा कि विपक्ष चर्चा से भाग नहीं रहा है, लेकिन लाखों छात्रों और उनके परिवारों के मानसिक तनाव व भविष्य से खिलवाड़ के लिए शिक्षा मंत्री की जवाबदेही तय होनी चाहिए।
गृह मंत्री के बयान की मांग: विपक्ष ने यह भी मांग रखी कि गृह मंत्री दोनों सदनों में आकर छात्रों और विपक्षी नेताओं पर हुई कथित पुलिस कार्रवाई तथा लाठीचार्ज पर विस्तृत जवाब दें।
अड़ाव: खड़गे ने स्पष्ट किया कि जब तक शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा नहीं लिया जाता, तब तक चर्चा शुरू नहीं हो सकती।
सरकार का रुख: ‘तारीख और समय तय करे विपक्ष, हम तैयार हैं’
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने लोकसभा और राज्यसभा में सरकार का पक्ष रखते हुए विपक्ष से नारेबाजी बंद कर चर्चा में शामिल होने की अपील की:
खुला प्रस्ताव: रिजिजू ने कहा कि सरकार लोकसभा और राज्यसभा में विपक्ष द्वारा तय की गई किसी भी तारीख, समय और अवधि पर नीट मुद्दे पर विस्तृत चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार है।
राजनीति न करने की अपील: उन्होंने कहा कि एनडीए के सभी सदस्य भी चाहते हैं कि पूरे देश में हुए पेपर लीक मामलों पर रचनात्मक चर्चा हो। यह किसी एक पार्टी का नहीं बल्कि छात्रों के हित का विषय है।
पीएम के फैसले का जिक्र: रिजिजू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा नीट पेपर लीक के दोषियों को तुरंत सजा दिलाने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट्स (Fast Track Courts) के गठन के निर्णय की जानकारी दी।
विपक्ष पर तंज: उन्होंने आरोप लगाया कि नित नई शर्तें रखकर विपक्ष असल में नीट मुद्दे पर चर्चा से भागने के बहाने बना रहा है।
संसद की कार्यवाही प्रभावित
लगातार नारेबाजी और हंगामे के कारण दोनों सदनों में कोई कामकाज नहीं हो सका। पीठासीन अधिकारियों को कार्यवाही बार-बार स्थगित करनी पड़ी, जबकि सरकार और विपक्ष के बीच बना यह गतिरोध खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है।
