मनीला में भारत-चीन विदेश मंत्रियों की द्विपक्षीय बैठक: जयशंकर ने वांग यी के समक्ष उठाया व्यापार संतुलन और सीमा शांति का मुद्दा
मनीला में भारत-चीन विदेश मंत्रियों की द्विपक्षीय बैठक: जयशंकर ने वांग यी के समक्ष उठाया व्यापार संतुलन और सीमा शांति का मुद्दा
मनीला: फिलीपींस की राजधानी मनीला में आयोजित एक क्षेत्रीय बैठक के दौरान भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर और चीन के विदेश मंत्री वांग यी के बीच महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बातचीत हुई। बैठक के दौरान विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने निष्पक्ष बाजार पहुंच, व्यापार संतुलन, सप्लाई चेन की स्थिरता और सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति को द्विपक्षीय संबंधों के सामान्यीकरण के लिए अनिवार्य बताया।
जयशंकर की दो टूक: निष्पक्ष बाजार पहुंच और व्यापार संतुलन जरूरी
बैठक के बाद विदेश मंत्री जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर जानकारी साझा की और चीन के सामने भारत की प्रमुख चिंताओं को रखा:
व्यापार घाटा और बाजार पहुंच: जयशंकर ने स्पष्ट किया कि दोनों देशों के संबंधों में सुधार के लिए व्यापार संतुलन और चीनी बाजार में भारतीय कंपनियों को निष्पक्ष पहुंच मिलना आवश्यक है। भारतीय कारोबारी लंबे समय से चीन में फार्मास्यूटिकल्स, आईटी (IT), कृषि उत्पादों और इंजीनियरिंग सामानों के लिए बेहतर पहुंच की मांग कर रहे हैं।
सप्लाई चेन की निश्चितता: उन्होंने भविष्य में सप्लाई चेन (आपूर्ति श्रृंखला) की निश्चितता और निरंतरता को लेकर भी भारत की चिंताओं को वांग यी के सामने रेखांकित किया।
सीमा पर शांति और संबंधों में सुधार का रोडमैप
भारतीय विदेश मंत्रालय द्वारा जारी प्रेस रिलीज और विदेश मंत्री के बयानों में दोनों देशों के रिश्तों के भावी स्वरूप पर जोर दिया गया:
”सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता सामान्य संबंधों के लिए पहली और आवश्यक शर्त है। अक्टूबर 2024 से दोनों पक्ष इस महत्वपूर्ण लक्ष्य को पूरा करने के लिए प्रयासरत हैं और इस पर लगातार ध्यान देने की आवश्यकता बनी रहेगी।”
कज़ान और तियानजिन बैठकों का उल्लेख: विदेश मंत्रालय के अनुसार, अक्टूबर 2024 (कज़ान) में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात के बाद से भारत-चीन संबंध धीरे-धीरे सामान्य हो रहे हैं, जिसे अगस्त में तियानजिन बैठक में और मजबूती मिली थी।
तीन मुख्य सिद्धांत: भारत ने दोहराया कि आपसी सम्मान, आपसी हित और आपसी संवेदनशीलता ही एक स्थिर द्विपक्षीय संबंध का आधार बन सकते हैं, जो एक बहुध्रुवीय एशिया (Multi-polar Asia) और बहुध्रुवीय दुनिया के लिए महत्वपूर्ण है।
मतभेद विवाद न बनें: दोनों पक्षों ने सहमति व्यक्त की कि दो बड़े पड़ोसी देशों के बीच मतभेदों को विवाद में नहीं बदलने देना कूटनीति की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
BRICS की अध्यक्षता के लिए चीन के समर्थन की सराहना
भारत इस वर्ष (2026) ब्रिक्स (BRICS) संगठन की अध्यक्षता कर रहा है। विदेश मंत्री जयशंकर ने भारत की BRICS अध्यक्षता के दौरान चीनी समर्थन और विभिन्न पहलों में उसकी भागीदारी के लिए वांग यी का धन्यवाद व्यक्त किया।
बढ़ता व्यापार घाटा और आर्थिक संबंध
उल्लेखनीय है कि वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का चीन से आयात 132 अरब डॉलर के स्तर पर पहुंच गया, जिससे दोनों देशों के बीच कुल 151.10 अरब डॉलर के व्यापार में भारत का व्यापार घाटा 100 अरब डॉलर से अधिक हो गया है। भारत ने हाल ही में अपने विनिर्माण क्षेत्र को गति देने के लिए कुछ औद्योगिक क्षेत्रों में चीनी निवेश पर लगी पाबंदियों में ढील दी है, जो आर्थिक संबंधों को फिर से पटरी पर लाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
