आयुष मंत्रालय की सलाह: दिन की शुरुआत करें ‘गंडूषा’ से, ओरल हेल्थ और रीढ़ की हड्डी के लिए बताए आयुर्वेद के फायदे
आयुष मंत्रालय की सलाह: दिन की शुरुआत करें ‘गंडूषा’ से, ओरल हेल्थ और रीढ़ की हड्डी के लिए बताए आयुर्वेद के फायदे
नई दिल्ली: आयुष मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (ट्विटर) के जरिए लोगों को बेहतर स्वास्थ्य और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए कई महत्वपूर्ण आयुर्वेदिक और योग टिप्स साझा किए हैं। मंत्रालय ने मुंह की सेहत (ओरल हेल्थ) से लेकर रीढ़ की हड्डी को मजबूत बनाने और सुरक्षित प्रेग्नेंसी के लिए जरूरी दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
मुंह की सेहत के लिए ‘गंडूषा’ पद्धति है रामबाण
आयुष मंत्रालय ने पारंपरिक आयुर्वेदिक उपचार पद्धति ‘गंडूषा’ (Gandusha) को दैनिक दिनचर्या में शामिल करने की सलाह दी है। मंत्रालय के अनुसार, अपने दिन की शुरुआत इस प्राचीन ओरल केयर प्रैक्टिस से करने से मुंह की पूरी सेहत में बड़ा सुधार होता है।
यह पारंपरिक माउथ रिंस (कुल्ला करने की पद्धति) न केवल स्वाभाविक रूप से मुंह की सफाई बनाए रखता है, बल्कि अत्यधिक प्यास लगने की समस्या को रोकता है और जीभ की स्वाद समझने की क्षमता को भी बेहतर बनाता है।
’अर्धचक्रासन’ से दूर होगा पीठ का दर्द
इससे पहले मंत्रालय ने योग के महत्व को रेखांकित करते हुए ‘अर्धचक्रासन’ (हाफ व्हील पोज) के फायदे बताए। ‘एक्स’ पर की गई पोस्ट के मुताबिक, अर्धचक्रासन का नियमित अभ्यास रीढ़ की हड्डी के लचीलेपन (फ्लेक्सिबिलिटी) को बढ़ाता है और पीठ की मांसपेशियों को मजबूती देता है।
मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि इस आसन को सही गाइडेंस और सही तरीके से नियमित किया जाए, तो यह सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस के प्रबंधन (मैनेजमेंट) में भी काफी मददगार साबित हो सकता है।
हेल्दी प्रेग्नेंसी के लिए संतुलित लाइफस्टाइल जरूरी
नारीत्व से लेकर मातृत्व तक के सफर को सुखद बनाने के लिए आयुष मंत्रालय ने एक संतुलित जीवनशैली (बैलेंस्ड लाइफस्टाइल) अपनाने पर जोर दिया है। मंत्रालय के अनुसार, मां और बच्चे दोनों की अच्छी सेहत के लिए पर्याप्त आराम, बेहतर साफ-सफाई, नियमित शारीरिक गतिविधि (फिजिकल एक्टिविटी) और समय पर एंटीनेटल चेक-अप कराना बेहद जरूरी है। आज की ये छोटी और सजग आदतें मां और आने वाले बच्चे के लिए एक स्वस्थ कल का निर्माण करती हैं।
