Thursday, July 16, 2026
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पश्चिम बंगाल: ममता बनर्जी का बीजेपी पर तीखा हमला, बोलीं- ‘जब तक आपका अंत नहीं देख लूंगी, तब तक जिंदा रहूंगी’

पश्चिम बंगाल: ममता बनर्जी का बीजेपी पर तीखा हमला, बोलीं- ‘जब तक आपका अंत नहीं देख लूंगी, तब तक जिंदा रहूंगी’

​पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (TMC) की प्रमुख ममता बनर्जी ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) पर एक बार फिर बेहद तीखा और आक्रामक हमला बोला है। चुनावी हार और पार्टी में हुई बड़ी टूट के बाद एक जनसभा को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने विरोधियों को कड़ा संदेश दिया है।

​ममता बनर्जी ने अपने संबोधन में कहा:

​”किसी को भी उसकी उम्र को लेकर अपमानित करने की कोशिश न करें। चुनाव परिणाम वाले दिन बीजेपी के गुंडों ने यह कामना की थी कि मुझे हार्ट अटैक आ जाए और मेरी मौत हो जाए। लेकिन मैं उन्हें यह साफ-साफ बता देना चाहती हूं कि मैं तब तक जिंदा रहूंगी, जब तक कि आप लोगों का अंत न देख लूं। मैं हमेशा आम जनता और मजदूरों के अधिकारों के लिए लड़ती रहूंगी। मेरे पास कार्यकर्ताओं की कोई कमी नहीं है और लगातार कई नए लोग भी हमसे जुड़ रहे हैं।”

​2026 चुनाव में TMC को लगा था करारी हार का झटका

​बता दें कि साल 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव तृणमूल कांग्रेस (TMC) के लिए एक बड़ा राजनीतिक और ऐतिहासिक झटका साबित हुए। पिछले 15 साल से राज्य की सत्ता पर काबिज टीएमसी इस चुनाव में महज 80 सीटों पर सिमट कर रह गई। वहीं, बीजेपी ने ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए 208 सीटें जीतकर राज्य में पहली बार अपनी सरकार बनाई।

​इस चुनाव में सबसे बड़ा उलटफेर खुद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पारंपरिक भवानीपुर सीट पर देखने को मिला, जहां उन्हें बीजेपी के शुभेंदु अधिकारी के हाथों 15,000 से अधिक मतों से हार का सामना करना पड़ा। वर्तमान में शुभेंदु अधिकारी पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री के रूप में राज्य की कमान संभाल रहे हैं।

​चुनाव के बाद पार्टी में बड़ी बगावत और दोफाड़

​विधानसभा चुनाव के नतीजों के ठीक एक महीने बाद, जून 2026 में तृणमूल कांग्रेस के भीतर एक अभूतपूर्व बगावत देखने को मिली, जिसने पार्टी को दो टुकड़ों में बांट दिया।

​विधायकों की बगावत: विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के चयन को लेकर शुरू हुए विवाद के बाद टीएमसी के 80 में से 64 नवनिर्वाचित विधायकों ने बागी रुख अपना लिया। इन विधायकों ने ऋतब्रत बनर्जी को अपना नया नेता चुन लिया। चूंकि यह संख्या दल-बदल विरोधी कानून (Anti-Defection Law) से बचने के लिए जरूरी दो-तिहाई बहुमत से अधिक थी, इसलिए विधानसभा अध्यक्ष ने भी इस बागी गुट को आधिकारिक मान्यता दे दी।

​सांसदों की बगावत: पार्टी में यह टूट केवल राज्य स्तर तक सीमित नहीं रही। लोकसभा में भी काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में टीएमसी के 28 में से 20 सांसदों ने एक बागी गुट तैयार कर लिया और केंद्र में बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए (NDA) गठबंधन को अपना समर्थन देने का फैसला किया।

​राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, पार्टी में इतनी बड़ी टूट की मुख्य वजह ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी के बढ़ते प्रभाव से वरिष्ठ नेताओं की नाराजगी और सत्ता जाने के बाद उत्पन्न हुई वैचारिक शून्यता रही।

​अस्तित्व और कानूनी लड़ाइयों में उलझी पार्टी

​वर्तमान समय में तृणमूल कांग्रेस अपने सबसे गंभीर संकट और कई कानूनी लड़ाइयों के दौर से गुजर रही है। हालांकि बागी गुट ने अभिषेक बनर्जी की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए हैं, लेकिन उन्होंने ममता बनर्जी को पार्टी का मार्गदर्शक और सलाहकार बने रहने का अनुरोध किया है।

​फिलहाल, पार्टी के आधिकारिक व्हिप और ‘असली टीएमसी’ के दर्जे को लेकर यह पूरा विवाद देश की सर्वोच्च अदालत (सुप्रीम कोर्ट) और विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष लंबित है। राज्य की सत्ता गंवाने और अपनी ही खड़ी की गई पार्टी के दो-तिहाई हिस्से के अलग होने के बाद, यह दौर ममता बनर्जी के पूरे राजनीतिक करियर की सबसे कठिन परीक्षा माना जा रहा है।

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