परिसीमन विवाद: मल्लिकार्जुन खड़गे ने पीएम मोदी को लिखा पत्र, 131वें संविधान संशोधन विधेयक पर सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग
परिसीमन विवाद: मल्लिकार्जुन खड़गे ने पीएम मोदी को लिखा पत्र, 131वें संविधान संशोधन विधेयक पर सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग
संसद के आगामी मॉनसून सत्र से पहले देश में परिसीमन (Delimitation) और 131वें संविधान संशोधन विधेयक को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर इस संवेदनशील मुद्दे पर सरकार के संशोधित प्रस्तावों पर चर्चा के लिए तत्काल सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की है।
खड़गे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर पत्र साझा करते हुए लिखा:
”मैंने प्रधानमंत्री मोदी को एक बार फिर पत्र लिखकर उनसे गुजारिश की है कि वे परिसीमन आदि पर सरकार के संशोधित प्रस्तावों पर चर्चा करने के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाएं।”
अप्रैल में गिर चुका है पुराना विधेयक
मल्लिकार्जुन खड़गे ने अपने पत्र में याद दिलाया कि परिसीमन को लेकर आम सहमति बनाना क्यों जरूरी है। उन्होंने बताया:
संसदीय कार्य मंत्री को लगातार लिखे पत्र: वे इससे पहले मार्च और अप्रैल के महीनों में भी संसदीय कार्य मंत्री को पत्र लिखकर सर्वदलीय बैठक बुलाने का अनुरोध करते रहे थे, लेकिन सरकार ने उनके अनुरोधों को स्वीकार नहीं किया।
संसद में विधेयक की नाकामी: विपक्ष को विश्वास में न लेने का नतीजा यह हुआ कि 17 अप्रैल 2026 को लोकसभा में पेश किया गया संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 आवश्यक दो-तिहाई बहुमत हासिल करने में स्पष्ट अंतर से असफल रहा और गिर गया।
”संसद में पेश करने से पहले हमें अध्ययन का समय दें”
कांग्रेस अध्यक्ष ने मीडिया रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए कहा कि केंद्र सरकार अब आगामी मॉनसून सत्र में इस विधेयक के संशोधित संस्करण (Revised Version) को दोबारा पेश करने की तैयारी कर रही है। उन्होंने प्रधानमंत्री से मांग की है कि:
संशोधित प्रस्तावों पर चर्चा हो: नए विधेयक को संसद के पटल पर रखने से पहले सभी राजनीतिक दलों के साथ इसके हर पहलू पर गंभीरता से चर्चा की जाए।
अध्ययन के लिए पर्याप्त समय मिले: विपक्षी दलों को संशोधित प्रस्तावों का विस्तार से अध्ययन करने के लिए पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए, ताकि संसद में इस पर सार्थक बहस हो सके।
परिसीमन का मुद्दा राज्यों के प्रतिनिधित्व और देश के संघीय ढांचे से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है, विशेषकर उत्तर और दक्षिण भारत के राज्यों के बीच सीटों के संतुलन को लेकर कई चिंताएं हैं। ऐसे में खड़गे के इस पत्र के बाद अब देखना होगा कि सरकार विपक्ष की सर्वदलीय बैठक बुलाने की इस मांग पर क्या रुख अपनाती है।
