Thursday, July 16, 2026
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पेंटागन का बड़ा फैसला: 30 वर्ष से अधिक उम्र के अमेरिकी सैनिकों के लिए टेस्टोस्टेरोन टेस्ट अनिवार्य, ‘ऑपरेटर सिंड्रोम’ से निपटने की तैयारी

पेंटागन का बड़ा फैसला: 30 वर्ष से अधिक उम्र के अमेरिकी सैनिकों के लिए टेस्टोस्टेरोन टेस्ट अनिवार्य, ‘ऑपरेटर सिंड्रोम’ से निपटने की तैयारी

​डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की व्यापक सैन्य तैयारी योजना के तहत अमेरिकी रक्षा विभाग (पेंटागन) ने एक बड़ा और अभूतपूर्व नीतिगत फैसला लिया है। सेना की युद्धक क्षमता को चरम पर ले जाने और सैनिकों के गिरते शारीरिक-मानसिक स्वास्थ्य को सुधारने के लिए अब 30 वर्ष और उससे अधिक आयु के सभी सक्रिय ड्यूटी (Active-Duty) और रिजर्व सैन्यकर्मियों के लिए टेस्टोस्टेरोन की कमी की अनिवार्य जांच (Mandatory Screening) करानी होगी।

​स्थानीय समयानुसार बुधवार को घोषित की गई यह नीति रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के हस्ताक्षर के बाद तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है। इसका मुख्य उद्देश्य सैनिकों में तेजी से बढ़ रहे ‘ऑपरेटर सिंड्रोम’ (Operator Syndrome) से निपटना और बल की सैन्य तैयारियों को बेहतर बनाना है।

​क्या है ‘ऑपरेटर सिंड्रोम’ जिससे जूझ रहे हैं सैनिक?

​पेंटागन के अनुसार, युद्ध क्षेत्र में लगातार लंबे समय तक अत्यधिक तनाव और कठिन परिस्थितियों में रहने के कारण सैनिकों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है, जिसे ‘ऑपरेटर सिंड्रोम’ कहा जाता है। इसके लक्षणों में शामिल हैं:

​टेस्टोस्टेरोन का स्तर कम होना

​लगातार थकान और शारीरिक ऊर्जा की कमी होना

​मांसपेशियों की ताकत और शारीरिक सहनशक्ति में भारी गिरावट

​नींद से जुड़ी गंभीर समस्याएं, याददाश्त कमजोर होना और ध्यान केंद्रित करने में कमी

​तनाव, घबराहट (चिंता) और अवसाद (डिप्रेशन) जैसे मानसिक विकार

​किसी चोट या थकान के बाद रिकवरी होने में सामान्य से अधिक समय लगना

​नई नीति की मुख्य बातें और नियम

​पेंटागन के मुख्य प्रवक्ता सीन पार्नेल ने प्रेस वार्ता में इस नई नीति के बारे में विस्तृत जानकारी साझा की:

​आयु सीमा: 30 वर्ष या उससे अधिक आयु के सभी सैनिकों के लिए उनके नियमित वार्षिक स्वास्थ्य मूल्यांकन (Periodic Health Assessment – PHA) के दौरान यह टेस्ट कराना अनिवार्य होगा।

​30 वर्ष से कम उम्र के सैनिकों को छूट: 30 वर्ष से कम आयु के सैन्यकर्मियों के लिए यह टेस्ट अनिवार्य नहीं है, लेकिन वे अपनी इच्छा से (वॉलंटरी) यह जांच करवा सकते हैं।

​समय सीमा: कार्मिक एवं तैयारी मामलों के अवर सचिव को 15 अगस्त 2026 तक विभागीय नीति में आवश्यक संशोधन कर इस जांच को मौजूदा स्वास्थ्य दिशानिर्देशों में शामिल करने का निर्देश दिया गया है।

​टारगेटेड थेरेपी: यदि जांच में किसी सैनिक का टेस्टोस्टेरोन स्तर कम पाया जाता है, तो उसे लक्षित टेस्टोस्टेरोन रिप्लेसमेंट थेरेपी (Targeted Testosterone Therapy) दी जाएगी, ताकि वे अपनी पुरानी ताकत और मानसिक सतर्कता वापस पा सकें।

​”सैनिकों को भी हथियारों की तरह मेंटेन करना जरूरी”

​यह नया निर्देश मई में रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ द्वारा जारी किए गए उस मेमोरेंडम पर आधारित है, जिसके तहत ‘वॉरफाइटर परफॉर्मेंस ऑप्टिमाइजेशन–टोटल फोर्स फिटनेस’ पहल की शुरुआत की गई थी। उस दस्तावेज में बेहद दिलचस्प बात कही गई थी:

​”अमेरिकी सेना को अपने प्रत्येक वॉरफाइटर (सैनिक) को एक तैयार और बहुमूल्य सैन्य क्षमता के तौर पर देखना चाहिए। सैनिकों के स्वास्थ्य का भी उसी अनुशासित मूल्यांकन, रखरखाव और अनुकूलन (Evaluation, Maintenance & Optimization) के साथ ध्यान रखा जाना चाहिए, जिसकी मांग हम युद्ध में इस्तेमाल होने वाले अन्य हथियारों या सैन्य संपत्तियों (Assets) से करते हैं।”

​डिफेंस हेल्थ एजेंसी को मिले कड़े निर्देश

​इस नीति के सुचारू क्रियान्वयन के लिए पेंटागन ने अपनी सभी शाखाओं और डिफेंस हेल्थ एजेंसी (DHA) को आंतरिक नियमों और चिकित्सा प्रणालियों में तत्काल बदलाव करने के निर्देश दिए हैं।

​विशेषज्ञों की एडवाइजरी काउंसिल: स्वास्थ्य मामलों के सहायक सचिव सैन्य स्वास्थ्य प्रणाली में टेस्टिंग की सुलभता सुनिश्चित करेंगे और इसके लिए क्लिनिकल गाइडेंस जारी करेंगे। इसके अलावा, इस दिशा में मार्गदर्शन के लिए बाहरी चिकित्सा विशेषज्ञों की एक विशेष ‘एडवाइजरी काउंसिल’ भी बनाई जाएगी।

​तकनीक का इस्तेमाल: इस नई नीति के तहत केवल टेस्टोस्टेरोन की जांच ही नहीं, बल्कि सैनिकों की शारीरिक और मानसिक क्षमताओं की बेहतर निगरानी के लिए ‘डेटा एनालिटिक्स’, ‘वियरेबल डिवाइसेज’ (पहनने योग्य तकनीक) और कॉग्निटिव असेसमेंट (संज्ञानात्मक प्रदर्शन का आकलन) का भी व्यापक उपयोग किया जाएगा।

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