राहुल गांधी की देहरादून रैली पर सियासी रार: परेड ग्राउंड की अनुमति रद्द होने पर हंगामा, अब बन्नू स्कूल मैदान में होगा कार्यक्रम
राहुल गांधी की देहरादून रैली पर सियासी रार: परेड ग्राउंड की अनुमति रद्द होने पर हंगामा, अब बन्नू स्कूल मैदान में होगा कार्यक्रम
देहरादून: कांग्रेस नेता राहुल गांधी के प्रस्तावित उत्तराखंड दौरे और उनके कार्यक्रम के स्थल को लेकर देहरादून में देर रात तक चला हाई-वोल्टेज ड्रामा भले ही शांत हो गया हो, लेकिन मैदान आवंटन को लेकर राज्य की राजनीति पूरी तरह गरमा गई है। कांग्रेस जहां इसे विपक्ष की आवाज दबाने का सरकारी षड्यंत्र बता रही है, वहीं भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए कांग्रेस पर केवल राजनीतिक लाभ के लिए भ्रम फैलाने का आरोप लगाया है।
क्या है पूरा विवाद?
राहुल गांधी देशव्यापी अभियान ‘छात्रों की गूंज’ के तहत 17 जुलाई को देहरादून के परेड ग्राउंड में युवाओं और छात्रों के साथ संवाद करने वाले थे। कांग्रेस का दावा है कि उन्होंने 15 से 17 जुलाई तक के लिए नगर निगम में ₹1.77 लाख का विधिवत शुल्क जमा कर परेड ग्राउंड की अनुमति ली थी।
विवाद तब शुरू हुआ जब मंगलवार को कार्यक्रम की तैयारी के लिए टेंट और अन्य सामग्री लेकर पहुंचे ट्रकों को नगर निगम और पुलिस प्रशासन ने ग्राउंड में प्रवेश करने से रोक दिया। शाम होते-होते जिला प्रशासन ने कानून-व्यवस्था, यातायात और सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए परेड ग्राउंड में रैली की अनुमति देने से साफ इनकार कर दिया।
”राहुल गांधी की रैली के बहाने जनता को गुमराह कर रही कांग्रेस” — भाजपा
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट ने कांग्रेस के आरोपों पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रशासन किसी का कार्यक्रम नहीं रोक रहा था, बल्कि व्यावहारिक दिक्कतों के कारण वैकल्पिक व्यवस्था दी जा रही थी।
महेंद्र भट्ट के प्रमुख तर्क:
आवेदन में नाम का उल्लेख नहीं: भट्ट ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने परेड ग्राउंड के लिए जो प्रारंभिक आवेदन दिया था, उसमें कहीं भी राहुल गांधी के नाम या उनके इतने बड़े राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रम का जिक्र नहीं था। सुरक्षा और लॉजिस्टिक्स के लिए ऐसी महत्वपूर्ण जानकारियां पहले साझा की जानी चाहिए थीं।
परेड ग्राउंड में पहले से ‘लोक संवर्धन पर्व’: मैदान में पहले से ही केंद्र सरकार का ‘लोक संवर्धन पर्व’ चल रहा है। राष्ट्रीय शोक के कारण इसके कुछ सांस्कृतिक कार्यक्रम समय पर नहीं हो पाए थे, जिस वजह से भारत सरकार ने इस आयोजन की अवधि दो दिन के लिए बढ़ा दी है। ऐसे में वहां एक और बड़ी राजनीतिक रैली संभव नहीं थी।
लोकतांत्रिक अधिकारों का सम्मान: उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में सभी दलों को समान अवसर प्राप्त हैं। प्रशासन ने कांग्रेस को कार्यक्रम रद्द करने के लिए नहीं कहा, बल्कि ‘बन्नू स्कूल मैदान’ जैसे अन्य सुरक्षित और उपयुक्त वैकल्पिक स्थलों का प्रस्ताव दिया था।
देर रात सड़कों पर उतरी कांग्रेस, फिर बनी सहमति
प्रशासन द्वारा अनुमति निरस्त किए जाने के बाद मंगलवार देर रात देहरादून की सड़कों पर भारी हंगामा देखने को मिला। उत्तराखंड कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल और नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य के नेतृत्व में सैकड़ों कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता परेड ग्राउंड की ओर कूच कर गए और वहीं सड़क पर धरने पर बैठ गए। इस दौरान पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई।
कांग्रेस नेताओं का आरोप था कि भाजपा सरकार राहुल गांधी की बढ़ती लोकप्रियता और पेपर लीक व बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर छात्रों की मुखर होती आवाज से घबराकर सरकारी तंत्र का दुरुपयोग कर रही है।
अंतिम निर्णय: प्रशासनिक तनातनी और देर रात तक चले हंगामे के बाद, आखिरकार कांग्रेस नेतृत्व ने छात्रों और अभिभावकों की सुरक्षा व सुविधा को प्राथमिकता देते हुए लचीला रुख अपनाया। कांग्रेस अब प्रशासन द्वारा सुझाए गए बन्नू स्कूल मैदान में ही 17 जुलाई को राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम को आयोजित करने के लिए सहमत हो गई है।
