Saturday, September 12, 2026
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पंजाब कांग्रेस में कलह के बीच भूपेश बघेल ने सौंपी रिपोर्ट: राजा वडिंग को बनाए रखने की पैरवी, चन्नी गुट नाराज

पंजाब कांग्रेस में कलह के बीच भूपेश बघेल ने सौंपी रिपोर्ट: राजा वडिंग को बनाए रखने की पैरवी, चन्नी गुट नाराज

​नई दिल्ली/चंडीगढ़: पंजाब कांग्रेस (Punjab Congress) में आगामी विधानसभा चुनाव 2027 से पहले मचे घमासान के बीच एक बड़ी खबर सामने आ रही है। ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (AICC) के पंजाब प्रभारी और छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने नई दिल्ली में संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल से मुलाकात कर राज्य संगठन से जुड़ी अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंप दी है।

​सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, बघेल की इस रिपोर्ट में प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग को उनके पद पर बरकरार रखने की पुरजोर वकालत की गई है।

​”गुड्डे-गुड़ियों का खेल नहीं है नेतृत्व परिवर्तन”

​केसी वेणुगोपाल के साथ बैठक के बाद भूपेश बघेल ने मीडिया के सामने पंजाब में किसी भी तरह के नेतृत्व परिवर्तन की संभावनाओं को पूरी तरह खारिज कर दिया। उन्होंने कड़े शब्दों में दोहराया:

​”हाईकमान का फैसला अंतिम होता है और इसे बार-बार बदला नहीं जा सकता। यह कोई गुड्डे-गुड़ियों का खेल नहीं है जो जब चाहे तब बदल दिया जाए।”

 

​बघेल ने चंडीगढ़ में भी ऐसा ही रुख अपनाया था, जिससे साफ संकेत मिलते हैं कि कांग्रेस आलाकमान राजा वडिंग पर अपना भरोसा कायम रखने के मूड में है।

​रिपोर्ट में राजा वडिंग के पक्ष में भारी समर्थन का दावा

​भूपेश बघेल द्वारा सौंपी गई आंतरिक रिपोर्ट में संगठनात्मक आंकड़ों के जरिए राजा वडिंग की स्थिति को मजबूत बताया गया है। रिपोर्ट के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:

​जिला अध्यक्षों का साथ: पंजाब के कुल 29 जिला अध्यक्षों में से 25 अध्यक्ष वर्तमान प्रदेश प्रमुख राजा वडिंग के समर्थन में हैं।

​सांसदों का बहुमत: पंजाब से पार्टी के कुल 7 लोकसभा सांसदों में से 4 सांसद वडिंग के नेतृत्व के साथ खड़े नजर आ रहे हैं।

​राजा वडिंग और चरणजीत सिंह चन्नी के बीच तनातनी बरकरार

​गौरतलब है कि कांग्रेस आलाकमान ने 1 जुलाई को ही अमरिंदर सिंह राजा वडिंग को पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष पद पर बनाए रखने की आधिकारिक घोषणा की थी। इस घोषणा के बाद से ही राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान सांसद चरणजीत सिंह चन्नी इस फैसले का खुलकर विरोध कर रहे हैं। चन्नी गुट पंजाब में किसी भी हाल में नेतृत्व परिवर्तन की मांग पर अड़ा हुआ है और इस बगावती रुख में राज्य के कई अन्य पूर्व मंत्री और वरिष्ठ नेता भी चन्नी के साथ लामबंद हैं।

​क्या विकल्पों पर विचार कर रहा है आलाकमान?

​भूपेश बघेल ने अपनी रिपोर्ट सौंपने से पहले चंडीगढ़ में लगातार छह दिनों तक मैराथन बैठकें की थीं, जिसमें उन्होंने अंतिम दिन चन्नी की अगुवाई वाले नाराज धड़े से भी मुलाकात कर उनका पक्ष जाना था।

​भले ही प्रभारी बघेल ने बदलाव से इनकार किया हो, लेकिन पंजाब कांग्रेस के एक बड़े तबके की नाराजगी को देखते हुए केंद्रीय नेतृत्व सतर्क है। इसी सिलसिले में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और केसी वेणुगोपाल के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक की। इसके तुरंत बाद, बुधवार सुबह वेणुगोपाल ने पंजाब विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष (विधायक दल के नेता) प्रताप सिंह बाजवा से भी अलग से मुलाकात की। इन मुलाकातों से कयास लगाए जा रहे हैं कि आलाकमान डैमेज कंट्रोल और असंतुष्ट नेताओं को शांत करने के लिए संगठन में कुछ अन्य महत्वपूर्ण बदलावों के विकल्पों पर विचार कर सकता है।

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