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सुप्रीम कोर्ट में फिल्मी ड्रामा: वकील के वेष में आए लॉ स्टूडेंट ने जजों को कहा ‘ज्यूडिशियल सर्वेंट’, कागज़ हवा में उछाले, अब गिरफ्तार

सुप्रीम कोर्ट में फिल्मी ड्रामा: वकील के वेष में आए लॉ स्टूडेंट ने जजों को कहा ‘ज्यूडिशियल सर्वेंट’, कागज़ हवा में उछाले, अब गिरफ्तार

​नई दिल्ली: देश की सबसे बड़ी अदालत, सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के कोर्ट नंबर-13 में बीते शुक्रवार (10 जुलाई 2026) को एक ऐसा हाई-वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला, जो किसी फिल्मी कहानी जैसा प्रतीत होता है। वकील की पोशाक में आए एक युवक ने अदालत के भीतर न केवल जमकर हंगामा किया, बल्कि जजों को ‘ज्यूडिशियल सर्वेंट’ (Judिशियल सर्वेंट्स) कहते हुए अपशब्द कहे और हाथ में मौजूद दस्तावेज़ हवा में उछाल दिए। दिल्ली पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी प्रबल प्रताप सिंह और उसके साथी चंदर भान को गिरफ्तार कर लिया है।

​क्या थी हंगामे की पूरी टाइमलाइन?

​10 जुलाई 2026 को जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ के समक्ष कोर्ट नंबर-13 में एक विशेष अनुमति याचिका (SLP संख्या 31367/2026 – प्रबल प्रताप एवं अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य) पर सुनवाई चल रही थी। इस मामले में याचिकाकर्ता प्रबल प्रताप सिंह खुद (इन-पर्सन) पैरवी कर रहा था।

​अदालत कक्ष में क्या हुआ?

​जजों को दिया ‘आदेश’: बहस के दौरान प्रबल प्रताप अचानक भड़क गया और अभद्र भाषा का इस्तेमाल करते हुए बोला— “मिस्टर ज्यूडिशियल सर्वेंट, मैं आपको लखनऊ के एएसपी (ASP) के खिलाफ साइबर क्राइम में गिरोह चलाने के आरोप में FIR दर्ज करने का आदेश देता हूँ।”

​जस्टिस विश्वनाथन की प्रतिक्रिया: इस पर पीठ के सदस्य जस्टिस केवी विश्वनाथन ने हैरानी जताते हुए पूछा— “क्या आप हमें आदेश दे रहे हैं?”

​अपशब्द और कागज़ उछालना: इतना सुनते ही आरोपी पूरी तरह आपा खो बैठा और जजों (जस्टिस सूर्यकांत व अन्य) के प्रति अमर्यादित और अपशब्दों का प्रयोग करने लगा। उसने अपने हाथ के कानूनी दस्तावेज़ों को हवा में बिखेर दिया ताकि अदालत की कार्यवाही बाधित हो सके।

​इसके बाद जब सुप्रीम कोर्ट के सुरक्षाकर्मियों ने उसे काबू करने और बाहर ले जाने का प्रयास किया, तो आरोपी ने सुरक्षा अधिकारियों के साथ धक्का-मुक्की की और सरकारी काम में बाधा पहुंचाई।

​कोर्ट की सहानुभूति और मेडिकल जांच

​इस बेहद गंभीर अवमानना और हंगामे के बावजूद, जजों ने संयम और सहानुभूति का परिचय दिया। आरोपी के आचरण को देखते हुए अदालत ने उसकी मानसिक स्थिति को भांपने के लिए कोई तत्काल दंडात्मक कार्रवाई नहीं की। बाद में दिल्ली पुलिस ने दोनों आरोपियों को हिरासत में लेकर इस्टीट्यूट ऑफ ह्यूमन बिहेवियर एंड एलाइड साइंसेज (IHBAS) में मेडिकल और मानसिक परीक्षण के लिए भेजा। हालांकि, मेडिकल रिपोर्ट में सामने आया कि दोनों पूरी तरह स्वस्थ हैं और उन्हें किसी तत्काल मनोचिकित्सकीय इलाज की आवश्यकता नहीं है।

​आखिर कौन हैं ये आरोपी?

​दिल्ली पुलिस ने 15 जुलाई 2026 को आधिकारिक तौर पर बताया कि इस मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जो कानून (Law) के छात्र हैं:

​प्रबल प्रताप सिंह (उम्र 24 वर्ष): मुख्य आरोपी, जो उत्तर प्रदेश के इटावा का रहने वाला है और लखनऊ यूनिवर्सिटी से एलएलबी (LLB) थर्ड ईयर का छात्र है।

​चंदर भान (उम्र 23 वर्ष): सह-आरोपी, जो यूपी के रायबरेली जिले का निवासी है और लॉ सेकंड ईयर का छात्र है।

​पुलिस की कार्रवाई:

जांच के दौरान पुलिस ने आरोपियों के पास से न्यायपालिका के खिलाफ लिखे गए आपत्तिजनक शब्दों वाले पर्चे और पम्फलेट भी बरामद किए हैं। सुप्रीम कोर्ट के सुरक्षा स्टाफ की लिखित शिकायत के आधार पर दिल्ली के तिलक मार्ग थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की सुसंगत धाराओं के तहत सरकारी काम में बाधा डालने और सुरक्षाकर्मियों से अभद्रता करने का मुकदमा दर्ज कर दोनों को जेल भेज दिया गया है।

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