लद्दाख में अवैध ऑफ-रोडिंग पर बड़ी कार्रवाई: 12 बाइकर्स और SUV चालक पर लगा भारी जुर्माना, 100 पूर्व सैनिक तैनात
लद्दाख में अवैध ऑफ-रोडिंग पर बड़ी कार्रवाई: 12 बाइकर्स और SUV चालक पर लगा भारी जुर्माना, 100 पूर्व सैनिक तैनात
लेह: लद्दाख के खूबसूरत और पर्यावरण की दृष्टि से बेहद संवेदनशील इलाकों में तय रास्तों को छोड़कर हुड़दंग मचाना पर्यटकों को भारी पड़ गया है। लद्दाख प्रशासन ने संरक्षित वन्यजीव क्षेत्रों में अवैध ऑफ-रोडिंग (Off-Roading) के खिलाफ अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। इसके तहत नियमों का उल्लंघन करने वाले 12 बाइकर्स पर कुल 1.2 लाख रुपये और उत्तर प्रदेश के एक एसयूवी चालक पर 50 हजार रुपये का भारी जुर्माना लगाया गया है।
त्सो मोरीरी झील के पास पकड़े गए बाइकर्स
वन्यजीव विभाग के अधिकारियों के अनुसार, 4 जुलाई को चांगथांग वन्यजीव अभयारण्य के अंतर्गत आने वाली त्सो मोरीरी झील के पास 12 बाइकर्स का एक समूह तय मार्ग से हटकर संवेदनशील जमीन पर बाइक दौड़ाता पाया गया।
टूर कंपनी पर गाज: जांच में सामने आया कि यह समूह गुरुग्राम की एक टूर कंपनी के माध्यम से लद्दाख आया था।
कानूनी कार्रवाई: वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की धारा 29 के उल्लंघन के तहत प्रत्येक बाइक पर 10-10 हजार रुपये (कुल 1.2 लाख रुपये) का जुर्माना लगाया गया, जिसे वसूलने के बाद मामले का निपटारा किया गया।
पैंगोंग झील के पास SUV जब्त
इससे पहले 30 जून को नियमित गश्त के दौरान वन्यजीव विभाग की टीम ने पैंगोंग झील के नजदीक मान गांव क्षेत्र में एक महिंद्रा एक्सयूवी 3एक्सओ (XUV 3XO) को मुख्य सड़क छोड़कर अभयारण्य के भीतर अवैध रूप से चलते हुए पकड़ा। मेरठ (उत्तर प्रदेश) के रहने वाले इस वाहन चालक की गाड़ी को तुरंत जब्त कर लिया गया और 50 हजार रुपये का जुर्माना भरने के बाद ही वाहन को छोड़ा गया।
क्यों खतरनाक है लद्दाख में ऑफ-रोडिंग?
विशेषज्ञों के अनुसार, लद्दाख के वेटलैंड्स (आर्द्रभूमि) और झीलों के किनारे की मिट्टी बेहद नाजुक होती है। भारी वाहनों के टायरों से संवेदनशील वनस्पतियां नष्ट हो जाती हैं। चांगथांग अभयारण्य दुर्लभ जंगली गधों (कियांग), काली गर्दन वाले सारस, तिब्बती हिरण और हिम तेंदुओं का प्राकृतिक आवास है। वाहनों के शोर और दखल से इन जीवों के भोजन खोजने और प्रजनन जैसी प्राकृतिक गतिविधियों पर बुरा असर पड़ता है।
निगरानी के लिए ‘लद्दाख पर्यावरण संरक्षण बल’ का गठन
नियमों का सख्ती से पालन कराने के लिए प्रशासन ने एक विशेष बल का गठन किया है, जिसमें 100 पूर्व सैनिकों को तैनात किया गया है। इस बल को संवेदनशील क्षेत्रों में चौबीसों घंटे गश्त करने और नियम तोड़ने वालों का मौके पर ही चालान काटने का अधिकार दिया गया है। यह बल अवैध ऑफ-रोडिंग के साथ-साथ अनधिकृत कैंपिंग, प्लास्टिक कचरा फैलाने और वन्यजीवों को परेशान करने वाली गतिविधियों पर पैनी नजर रख रहा है।
लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने पर्यटकों से जिम्मेदार व्यवहार की अपील करते हुए कहा:
”लद्दाख की बेमिसाल खूबसूरती का अनुभव करने आने वाले हर पर्यटक का हम स्वागत करते हैं, लेकिन सभी को हमारे अनोखे वन्यजीवों और नाजुक पर्यावरण का जिम्मेदारी से सम्मान करना होगा। प्राकृतिक विरासत को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ कानून सख्ती से काम करेगा।”
