राजनीति

बांकीपुर उपचुनाव से पहले जन सुराज को बड़ा झटका: कई दिग्गज भाजपा में शामिल

बांकीपुर उपचुनाव से पहले जन सुराज को बड़ा झटका: कई दिग्गज भाजपा में शामिल

​पटना: बिहार के बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव से ठीक पहले प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी (JSP) को राजधानी पटना में एक बड़ा राजनीतिक झटका लगा है. बुधवार को पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं और दर्जनों कार्यकर्ताओं ने औपचारिक रूप से भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम लिया.

​पटना स्थित भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित एक मिलन समारोह के दौरान बिहार भाजपा के नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने पार्टी का अंगवस्त्र पहनाकर सभी नए सदस्यों का स्वागत किया.

​जन सुराज से भाजपा में शामिल होने वाले प्रमुख चेहरे:

​भाजपा की सदस्यता ग्रहण करने वाले नेताओं में मुख्य रूप से जन सुराज के वे चेहरे शामिल हैं जिन्होंने पिछले विधानसभा चुनाव में पटना और आसपास की सीटों पर मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई थी:

​प्रो. के.सी. सिन्हा (K.C. Sinha): देश के सुप्रसिद्ध गणितज्ञ और लेखक, जिन्होंने कुम्हरार विधानसभा सीट से जन सुराज के टिकट पर चुनाव लड़ा था.

​रितेश रंजन उर्फ बिट्टू सिंह (Bittu Singh): दीघा विधानसभा सीट से जन सुराज के पूर्व प्रत्याशी.

​विनीता बिट्टू: पटना से मेयर पद की पूर्व उम्मीदवार.

​गोपाल सिंह: मनेर विधानसभा सीट से जन सुराज के पूर्व प्रत्याशी.

​ब्रज किशोर सिंह: जन सुराज किसान मोर्चा के तत्कालीन जिला अध्यक्ष.

​”वहां कोई विजन नहीं, केवल अहंकार है” — बागियों का प्रशांत किशोर पर तीखा हमला

​पार्टी छोड़ने के बाद इन नेताओं ने जन सुराज के रणनीतिकार और संस्थापक प्रशांत किशोर पर तीखे शब्दबाण छोड़े:

​के.सी. सिन्हा ने भाजपा की सदस्यता ग्रहण करते हुए कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में राष्ट्रीय हित सर्वोपरि है और शिक्षा के क्षेत्र में भारत को विश्वगुरु बनाने के लिए वे नरेंद्र मोदी के नेतृत्व को मजबूत करना चाहते हैं.

​गोपाल सिंह ने अपनी घर-वापसी (वे 1990 के दशक में भाजपा में थे) पर कहा, “जब मैंने मनेर से चुनाव लड़ा तो मुझे अहसास हुआ कि जन सुराज में कोई धरातलीय विजन नहीं है, सिर्फ खोखली बातें हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि एक अहंकारी व्यक्ति कभी संगठन नहीं चला सकता।”

​बिट्टू सिंह ने भावुक होते हुए कहा कि उन्होंने ‘क्षणिक आवेग’ (heat of the moment) में आकर जन सुराज का दामन थामा था जिसके लिए वे माफी मांगते हैं। उन्होंने प्रसिद्ध फिल्मी गाने की लाइन दोहराते हुए कहा— “जीना यहाँ मरना यहाँ, इसके सिवा जाना कहाँ।” उन्होंने संकल्प लिया कि वे अब आजीवन भाजपा में ही रहेंगे।

​बांकीपुर उपचुनाव: क्यों अहम है यह घटनाक्रम?

​बिहार की राजनीति में इसे एक बेहद संवेदनशील और रणनीतिक मोड़ माना जा रहा है क्योंकि यह दलबदल 30 जुलाई को होने वाले बांकीपुर उपचुनाव से ठीक पहले हुआ है:

​सीट खाली होने का कारण: भाजपा के कद्दावर नेता और लगातार पांच बार विधायक रहे नितिन नवीन के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष (और बाद में राष्ट्रीय अध्यक्ष व राज्यसभा सांसद) चुने जाने के बाद यह विधानसभा सीट रिक्त हुई थी।

​हाई-प्रोफाइल मुकाबला: इस उपचुनाव में स्वयं जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर चुनावी मैदान में उतरे हैं, जहां उनका सीधा मुकाबला भाजपा उम्मीदवार नीरज कुमार सिन्हा और राजद (RJD) की रेखा गुप्ता से है।

​प्रशांत किशोर ने इस उपचुनाव को नीतीश-भाजपा सरकार पर एक ‘जनमत संग्रह’ (Referendum) करार दिया है। ऐसे में उनके अपने ही पूर्व सिपहसालारों का चुनाव से ऐन पहले भाजपा में जाना जन सुराज के लिए एक बड़ा मनोवैज्ञानिक और संगठनात्मक झटका है.

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