भौमवती अमावस्या कल: पितृदोष और ग्रहों के कष्टों से मुक्ति के लिए राशि अनुसार करें इन चीजों का दान
भौमवती अमावस्या कल: पितृदोष और ग्रहों के कष्टों से मुक्ति के लिए राशि अनुसार करें इन चीजों का दान
नई दिल्ली:
इस साल आषाढ़ माह की अमावस्या 14 जुलाई 2026, दिन मंगलवार को मनाई जाएगी। मंगलवार के दिन पड़ने के कारण इसे ‘भौमवती अमावस्या’ कहा जाता है, जिसका सनातन धर्म में अत्यंत विशेष धार्मिक महत्व है। शास्त्रों के अनुसार, यह तिथि पितरों की आत्मा की शांति, तर्पण और दान-पुण्य के कार्यों के लिए सर्वोत्तम मानी गई है। ज्योतिषविदों का मानना है कि इस दिन निस्वार्थ भाव से किया गया दान न सिर्फ पितृ दोष से राहत दिलाता है, बल्कि राहु-केतु और शनि जनित कष्टों से भी मुक्ति प्रदान करता है।
आषाढ़ अमावस्या पर इन चीजों का दान है बेहद शुभ
काले तिल का दान: अमावस्या पर काले तिल का दान सबसे उत्तम माना गया है। इससे पितर प्रसन्न होते हैं और कुंडली में राहु-केतु व शनि के अशुभ प्रभावों में कमी आती है।
अन्नदान (गेहूं, चावल और सत्तू): इस दिन जरूरतमंदों को अनाज दान करने से घर में सुख-समृद्धि का वास होता है। विशेषकर सत्तू और गुड़ का दान पितृ दोष को दूर करने में सहायक माना जाता है।
जल से भरा घड़ा (कुंभ दान): भीषण गर्मी के इस मौसम में राहगीरों के लिए पीने के पानी की व्यवस्था करना या पानी से भरे मिट्टी के घड़े का दान करना महापुण्यदायी माना गया है। यह जीवन की बाधाओं को दूर करता है।
वस्त्र, छाता और चप्पल: अमावस्या के दिन जरूरतमंदों को सूती वस्त्र, छाता और चप्पल दान करने से पूर्वजों का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है।
भोजन कराना: इस पावन तिथि पर कम से कम 5 भूखे या जरूरतमंद लोगों को आदरपूर्वक भोजन कराएं और मन ही मन अपने पितरों का स्मरण करें।
दान करते समय रखें इन बातों का ख्याल
शास्त्रों के अनुसार, दान का फल तभी मिलता है जब वह निस्वार्थ भावना और सच्चे मन से किया जाए। दान देते समय मन में किसी भी प्रकार का अहंकार या द्वेष नहीं होना चाहिए। आप अपनी श्रद्धानुसार ऊपर बताई गई सभी वस्तुओं या उनमें से किसी एक का चुनाव कर दान कर सकते हैं।
