उत्तराखंड में मतदाता सूची का शुद्धीकरण: चुनाव से पहले कटेंगे 13.36 लाख से अधिक नाम, मैदानी जिलों में सबसे ज्यादा शिफ्टिंग
उत्तराखंड में मतदाता सूची का शुद्धीकरण: चुनाव से पहले कटेंगे 13.36 लाख से अधिक नाम, मैदानी जिलों में सबसे ज्यादा शिफ्टिंग
देहरादून: उत्तराखंड में आगामी 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची के शुद्धीकरण के लिए चल रही ‘एसआईआर’ (विशेष मतदाता सूची पुनरीक्षण) प्रक्रिया का पहला चरण 7 जुलाई 2026 को संपन्न होने जा रहा है। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान राज्य के मतदाताओं की संख्या में एक बहुत बड़ा और चौंकाने वाला अंतर देखने को मिला है। इसी साल जनवरी 2026 में प्रदेश के भीतर कुल 84.55 लाख मतदाता थे, जो अब घटकर 71.16 लाख के करीब रहने की संभावना है। प्री-एसआईआर और वर्तमान एसआईआर प्रक्रिया के विभिन्न चरणों को मिलाकर राज्य में कुल 13,36,252 मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से बाहर किए जा रहे हैं।
क्यों घट गए एकाएक इतने मतदाता?
मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय से प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक, इस भारी गिरावट के पीछे मुख्य रूप से दो बड़ी वजहें सामने आई हैं:
प्री-एसआईआर मैपिंग में सुधार: एसआईआर प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही डेटा मैपिंग और तकनीकी त्रुटियों को दूर करते हुए आयोग ने 4,95,232 मतदाताओं के नाम पहले ही सूची से हटा दिए थे।
8.41 लाख से अधिक मतदाता ‘एएसडी’ श्रेणी में: वर्तमान में चल रहे हाउसहोल्ड सर्वे के बाद करीब 8,41,020 मतदाताओं को एएसडी (एब्सेंट, शिफ्टेड, डेड) यानी ‘अन-कलेक्टेबल’ श्रेणी में रखा गया है।
एएसडी (ASD) श्रेणी के वोटरों का पूरा गणित
निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि जिन 8.41 लाख मतदाताओं के नाम कटने की कगार पर हैं, उनकी असल स्थिति इस प्रकार है:
स्थायी रूप से पलायन (Permanent Shift): 4,79,762 मतदाता ऐसे हैं जो राज्य से पूरी तरह शिफ्ट हो चुके हैं।
अनुपस्थित (Absent): 1,66,741 मतदाता सर्वे के दौरान अपने पते पर अनुपस्थित पाए गए।
मृतक मतदाता (Death): 1,24,278 मतदाताओं की मृत्यु हो चुकी है, जिनके नाम सूची से हटाए जा रहे हैं।
दोबारा दर्ज नाम (Already Enrolled): 61,888 मतदाताओं के नाम पहले से ही अन्य जगह पंजीकृत थे।
अन्य कारण: 8,351 वोटर्स अन्य तकनीकी वजहों से बाहर किए गए हैं।
जिलेवार आंकड़े: किस जिले में कटेंगे कितने नाम?
एसआईआर के तहत राज्य के सभी 13 जिलों में मतदाताओं के नाम हटाए जाने की सूची तैयार हो चुकी है। मैदानी जिलों में परमानेंट शिफ्टिंग की वजह से सबसे ज्यादा नाम काटे जाएंगे:
देहरादून: 1,90,815 नाम कटेंगे
उधमसिंह नगर: 1,82,162 नाम कटेंगे
हरिद्वार: 1,31,047 नाम कटेंगे
नैनीताल: 72,053 नाम कटेंगे
अल्मोड़ा: 55,930 नाम कटेंगे
पौड़ी गढ़वाल: 53,386 नाम कटेंगे
टिहरी गढ़वाल: 44,062 नाम कटेंगे
पिथौरागढ़: 27,615 नाम कटेंगे
चमोली: 23,631 नाम कटेंगे
उत्तरकाशी: 18,470 नाम कटेंगे
चंपावत: 17,827 नाम कटेंगे
बागेश्वर: 13,090 नाम कटेंगे
रुद्रप्रयाग: 10,902 नाम कटेंगे
मैदानी जनपदों में वोटर्स शिफ्टिंग का मुख्य कारण
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में हाल ही में हुए पुनरीक्षण के बाद, उत्तराखंड के मैदानी जिलों (देहरादून, उधमसिंह नगर और हरिद्वार) में रह रहे इन मूल राज्यों के निवासियों ने अपने नाम वापस अपने गृह राज्यों में दर्ज करवा लिए हैं। यही कारण है कि पर्वतीय क्षेत्रों की तुलना में मैदानी इलाकों में मतदाताओं की परमानेंट शिफ्टिंग के बड़े आंकड़े सामने आए हैं।
अब तक कितना काम हुआ डिजिटलाइज्ड?
राज्य के 79.60 लाख मतदाताओं में से अब तक 71.16 लाख से अधिक मतदाताओं का गणना फॉर्म प्राप्त कर उसे पूरी तरह डिजिटलाइज्ड किया जा चुका है। प्रमुख जिलों में काम का प्रतिशत इस प्रकार है:
रुद्रप्रयाग: 94.27% (1,80,612 मतदाता)
बागेश्वर: 93.88% (2,00,839 मतदाता)
पिथौरागढ़: 92.51% (3,41,318 मतदाता)
हरिद्वार: 90.33% (12,43,372 मतदाता)
देहरादून: 86.08% (11,85,105 मतदाता)
निर्वाचन आयोग का अगला कदम: 14 जुलाई को आएगा ड्राफ्ट रोल
अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. विजय कुमार जोगदंडे के अनुसार, 8 जून से चल रहा बीएलओ का हाउसहोल्ड सर्वे लगभग पूरा हो चुका है। इन आंकड़ों को लेकर सभी राजनीतिक दलों के साथ बैठक की जा चुकी है, ताकि वे अपने स्तर पर भी मतदाताओं से संवाद कर सकें।
एसआईआर खत्म होने के बाद 14 जुलाई 2026 को मतदाता सूची का ‘ड्राफ्ट रोल’ प्रकाशित किया जाएगा, जिसमें मतदाताओं की संख्या 71,16,650 रहने की उम्मीद है। इसके बाद आम जनता को अपने दावे और आपत्तियां दर्ज कराने के लिए पूरे एक महीने का समय दिया जाएगा। इस अवधि में नए पात्र मतदाताओं के नाम जोड़े भी जाएंगे, जिसके बाद ही मतदाताओं की अंतिम संख्या तय होगी।
