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नासिक TCS यौन उत्पीड़न और जबरन धर्मांतरण मामला: आरोपी निदा खान को मिली जमानत, दानिश शेख की याचिका खारिज

नासिक TCS यौन उत्पीड़न और जबरन धर्मांतरण मामला: आरोपी निदा खान को मिली जमानत, दानिश शेख की याचिका खारिज

​नासिक: महाराष्ट्र के नासिक में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) की शाखा में हुए कथित यौन उत्पीड़न और जबरन धर्मांतरण के हाई-प्रोफाइल मामले में सोमवार (6 जुलाई 2026) को अदालत ने एक बड़ा फैसला सुनाया है। नासिक रोड कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश के. जी. जोशी ने मामले की मुख्य आरोपियों में से एक और टीसीएस की कर्मचारी निदा खान को जमानत दे दी है। निदा खान को उनकी गिरफ्तारी के करीब दो महीने बाद यह राहत मिली है, जबकि उनके सह-आरोपी दानिश शेख की जमानत याचिका को अदालत ने सिरे से खारिज कर दिया।

​गर्भावस्था के आधार पर मिली जमानत, दानिश की याचिका खारिज

​अदालत में सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस देखने को मिली:

​बचाव पक्ष की दलील: निदा खान की ओर से पेश हुए अधिवक्ता राहुल कासलीवाल ने अदालत से मानवीय और चिकित्सा आधार पर जमानत की गुहार लगाई। उन्होंने मुख्य रूप से दलील दी कि निदा खान वर्तमान में गर्भवती हैं, इसलिए उन्हें हिरासत में रखना उचित नहीं होगा। कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार करते हुए उनकी जमानत मंजूर कर ली।

​दानिश शेख को राहत नहीं: इसी मामले के दूसरे सह-आरोपी दानिश शेख को अदालत से कोई राहत नहीं मिली। मामले में उनकी सीधी संलिप्तता को देखते हुए कोर्ट ने उनकी अर्जी को नामंजूर कर दिया।

​अभियोजन पक्ष का दावा: “पीड़ित का धर्म बदलवाने के लिए दिया गया था बुर्का और किताब”

​सरकारी वकील (लोक अभियोजक) विजय गायकवाड़ के साथ पीड़िता के वकील मिलिंद कुरकुटे और नितिन पंडित ने दोनों आरोपियों की जमानत का पुरजोर विरोध किया। अभियोजन पक्ष ने अदालत के सामने जांच से जुड़े कई चौंकाने वाले तथ्य रखे:

​जबरन धर्मांतरण के सबूत: अभियोजन पक्ष का कहना था कि अब तक की पुलिस जांच में महिला कर्मचारी के यौन शोषण और उसे इस्लाम कबूल करने के लिए मजबूर किए जाने के पुख्ता साक्ष्य सामने आए हैं।

​जानबूझकर किया गया उत्पीड़न: सरकारी वकील ने दावा किया कि आरोपी दानिश शेख ने अपनी सहकर्मी (पीड़िता) को धर्मांतरण के उद्देश्य से एक इस्लामी पुस्तक और बुर्का दिया था। इससे यह पूरी तरह स्पष्ट होता है कि पीड़िता का जानबूझकर मानसिक व यौन उत्पीड़न किया गया और उस पर धर्म बदलने का दबाव बनाया गया।

​जातिसूचक प्रताड़ना का भी आरोप: अभियोजन ने यह भी गंभीर दावा किया कि आरोपी यह अच्छी तरह जानते थे कि पीड़िता अनुसूचित जाति (SC) से ताल्लुक रखती है, इसके बावजूद उसे निशाना बनाया गया और उसका धर्मांतरण करने का प्रयास किया गया।

​इन गंभीर धाराओं और एट्रोसिटी एक्ट के तहत दर्ज है केस

​यह पूरा मामला नासिक के देवलाली कैंप पुलिस थाने में दर्ज प्राथमिकी (FIR) से संबंधित है। आरोपियों के खिलाफ नए और कड़े कानूनों के तहत मामला दर्ज है:

​भारतीय न्याय संहिता (BNS): आरोपियों पर बीएनएस की धारा 69 (छलपूर्वक या झूठे वादे कर यौन संबंध बनाना), धारा 65 (यौन उत्पीड़न) और धारा 299 (किसी वर्ग की धार्मिक भावनाओं को आहत करना) लगाई गई है।

​एट्रोसिटी एक्ट: चूंकि पीड़िता अनुसूचित जाति से है, इसलिए दोनों आरोपियों के खिलाफ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम (SC/ST Act) की प्रासंगिक और गैर-जमानती धाराएं भी लगाई गई हैं।

​SIT कर रही है कुल 9 मामलों की जांच, TCS ने किया था निलंबित

​नासिक पुलिस की एक विशेष जांच दल (SIT) वर्तमान में टीसीएस की नासिक इकाई में महिला कर्मचारियों के साथ हुए कथित शोषण, जबरन धर्मांतरण के प्रयासों, धार्मिक भावनाएं भड़काने और मानसिक प्रताड़ना से जुड़े कुल 9 अलग-अलग मामलों की गहराई से जांच कर रही है।

​यह संवेदनशील मामला जब पहली बार सामने आया था, तब आईटी क्षेत्र की दिग्गज कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) ने इस पर सख्त रुख अपनाया था। कंपनी ने आधिकारिक बयान जारी कर कहा था कि वह कार्यस्थल पर किसी भी प्रकार के उत्पीड़न और दबाव को कतई बर्दाश्त न करने (Zero Tolerance) की नीति पर चलती है। घटना के तुरंत बाद टीसीएस ने नासिक कार्यालय में कथित यौन उत्पीड़न और इस कृत्य में शामिल पाए गए संबंधित कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से नौकरी से निलंबित कर दिया था।

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