टीएमसी सिंबल और मालिकाना हक की जंग: ममता गुट ने चुनाव आयोग को सौंपा जवाब, कल्याण बनर्जी का बागियों पर तीखा हमला
टीएमसी सिंबल और मालिकाना हक की जंग: ममता गुट ने चुनाव आयोग को सौंपा जवाब, कल्याण बनर्जी का बागियों पर तीखा हमला
नई दिल्ली/कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (AITC) के भीतर छिड़ी वर्चस्व की जंग अब भारत के चुनाव आयोग (ECI) के दरवाजे तक पहुंच गई है। पार्टी के मालिकाना हक और सिंबल को लेकर ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले आधिकारिक गुट और ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट के बीच खींचतान जारी है। चुनाव आयोग द्वारा दोनों पक्षों को सोमवार शाम तक अपना पक्ष रखने के निर्देश दिए जाने के बाद, ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने आयोग के समक्ष अपना विस्तृत जवाब प्रस्तुत कर दिया है।
जवाब दाखिल करने के बाद टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी ने पार्टी सांसद महुआ मोइत्रा और सागरिका घोष के साथ मीडिया से बात की। उन्होंने बागी नेताओं पर जमकर निशाना साधा और उनके दावों को पूरी तरह गैर-कानूनी और धोखेबाजी करार दिया।
कार्यकाल खत्म होने के बागियों के तर्क को कल्याण बनर्जी ने किया खारिज
ऋतब्रत बनर्जी के गुट ने दावा किया है कि 2022 में गठित हुई पार्टी की कार्य समिति का 3 साल का कार्यकाल अब समाप्त हो चुका है, इसलिए वे नई तृणमूल पार्टी का गठन कर रहे हैं। इस तर्क का खंडन करते हुए कल्याण बनर्जी ने पार्टी के इतिहास और संविधान का हवाला दिया:
संविधान में संशोधन: कल्याण बनर्जी ने बताया कि 1997 में पार्टी की स्थापना के बाद, साल 2006 में पार्टी अध्यक्ष के रूप में ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग को सूचित किया था कि टीएमसी के संविधान में संशोधन कर समिति का कार्यकाल 4 साल से बढ़ाकर 5 साल कर दिया गया है।
2022 में हुए थे चुनाव: इस नियमानुसार, चुनाव आयोग के निर्देशों पर हर 5 साल में संगठनात्मक चुनाव होते आए हैं। आखिरी बार 2022 में ब्लॉक, जिला और राज्य स्तर पर वैध चुनाव हुए थे, जिसमें ममता बनर्जी को सर्वसम्मति से पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया था। ऐसे में 3 साल में कार्यकाल खत्म होने का दावा पूरी तरह गलत है।
”तर्क सही तो बागियों की विधायकी भी अमान्य”: कल्याण बनर्जी ने बागियों को घेरते हुए कहा कि अगर कार्य समिति का कार्यकाल खत्म हो गया था, तो इन नेताओं ने 2026 का विधानसभा चुनाव टीएमसी के सिंबल पर कैसे लड़ा? अगर उनका तर्क मान लिया जाए, तो उनका खुद का चुनाव भी अमान्य हो जाएगा और उन्हें तुरंत विधायक पद से इस्तीफा दे देना चाहिए।
”होटल में बैठक कर पार्टी नहीं बदलती”— प्रक्रिया पर उठाए सवाल
ममता गुट ने बागी गुट द्वारा की गई बैठकों और उनके दावों की वैधानिकता पर गंभीर कानूनी सवाल खड़े किए हैं:
नियमों का उल्लंघन: कल्याण बनर्जी ने कहा कि ब्लॉक, जिला या राज्य स्तर पर किसी भी तय प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया है। चुनाव सामान्य सत्र में होने चाहिए, न कि किसी विशेष सत्र में।
जनप्रतिनिधियों की अनदेखी: 2022 और 2024 में चुने गए टीएमसी के वैध सांसदों और विधायकों को किसी भी बैठक का कोई नोटिस नहीं दिया गया और न ही उन्हें आमंत्रित किया गया।
संविधान के खिलाफ: टीएमसी के संविधान के तहत किसी होटल में गोपनीय बैठक करके इस तरह के फैसले लेने की बिल्कुल इजाजत नहीं है। यह पूरी प्रक्रिया पूरी तरह अनियमित और धोखाधड़ी वाली है।
शुभेंदु अधिकारी और बीजेपी के ‘आशीर्वाद’ का आरोप
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी पर सीधा हमला बोलते हुए कल्याण बनर्जी ने आरोप लगाया कि बागी गुट को पूरी तरह से भाजपा का संरक्षण प्राप्त है। उन्होंने कहा, “शुभेंदु अधिकारी उनके साथ खड़े हैं। बागियों को पुलिस और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) का भी पूरा समर्थन मिल रहा है, इसीलिए वे आज इतने बड़े-बड़े और गैर-कानूनी दावे करने की हिम्मत जुटा पा रहे हैं। लेकिन हम इस लड़ाई को कोर्ट से लेकर जनता की अदालत तक लेकर जाएंगे।”
”जिन्हें दीदी से सबसे ज्यादा मिला, उन्होंने ही सबसे बड़ा धोखा दिया”
पार्टी छोड़ने वाले और बागी गुट का साथ देने वाले पुराने नेताओं पर दुख और गुस्सा जाहिर करते हुए कल्याण ने कहा:
”बॉबी हकीम, अरूप रॉय और ऋतब्रत बनर्जी जैसे नेताओं को ममता दीदी और पार्टी से सबसे ज्यादा मान-सम्मान और पद मिला, लेकिन आज उन्होंने ही सबसे बड़ा धोखा दिया है। ऋतब्रत बनर्जी एक बार भी अपने क्षेत्र उलुबेरिया नहीं गए हैं, अरूप रॉय अपने घर से बाहर नहीं निकल रहे हैं। जब ये लोग मलाई काट रहे थे तब वफादार कार्यकर्ताओं को किनारे किया जा रहा था, लेकिन आज जब संकट आया है तो चंद्रिमा भट्टाचार्य, इंद्रनील सेन और हम जैसे लोग ही दीदी के साथ मजबूती से खड़े हैं। हम बंगाल के अधिकारों के लिए यह लड़ाई जारी रखेंगे।”
