टेक-ऑटो

ट्राई का कड़ा रुख: Truecaller समेत 3 ऐप्स के खिलाफ एक्शन की तैयारी, कमर्शियल कॉल्स को ‘स्पैम’ बताने का आरोप

ट्राई का कड़ा रुख: Truecaller समेत 3 ऐप्स के खिलाफ एक्शन की तैयारी, कमर्शियल कॉल्स को ‘स्पैम’ बताने का आरोप

​नई दिल्ली: भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) ने Truecaller (ट्रूकॉलर), Hiya और Whoscall जैसे लोकप्रिय कॉल मैनेजमेंट ऐप्स के खिलाफ आईटी एक्ट (IT Act) के तहत सख्त कार्रवाई की मांग की है। ट्राई की रडार पर आए इन ऐप्स पर आरोप है कि ये दूरसंचार विभाग द्वारा विशेष रूप से कमर्शियल कम्युनिकेशन (व्यावसायिक संदेशों और कॉल्स) के लिए जारी की गई ‘1400’ और ‘1600’ सीरीज वाले नंबरों को ‘स्पैम’ के रूप में दिखा रहे हैं।

​सीधे एक्शन का अधिकार नहीं, मंत्रालयों से मांगी अनुमति

​चूंकि ये कॉल मैनेजमेंट ऐप्स दूरसंचार विभाग (DoT) के सीधे नियंत्रण में नहीं आते हैं, इसलिए ट्राई इन पर सीधे दंडात्मक कार्रवाई नहीं कर सकता। इस कानूनी पेंच के कारण नियामक ने इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) और DoT से कार्रवाई के लिए हरी झंडी मांगी है।

​ट्राई के अधिकारियों का कहना है कि वे इन ऐप्स को रेगुलेट (नियंत्रित) नहीं करना चाहते, बल्कि आईटी एक्ट के तहत नियमों के उल्लंघन को लेकर उन पर एक्शन लेना चाहते हैं। अधिकारियों के मुताबिक, हालांकि इन ऐप्स को ‘सेफ हार्बर’ (Safe Harbor) का कानूनी संरक्षण प्राप्त है, लेकिन इसके बावजूद इन्हें देश के कानूनों का पालन करना ही होगा।

​क्या होता है ‘सेफ हार्बर’ नियम?

‘सेफ हार्बर’ उन कानूनी प्रावधानों को कहा जाता है जो किसी प्लेटफॉर्म या संगठन को थर्ड-पार्टी डेटा या यूजर जनरेटेड कंटेंट के लिए रेगुलेटरी जवाबदेही से बचाते हैं, बशर्ते वे सरकार द्वारा तय की गई गाइडलाइंस का पूरी तरह पालन करें।

​आईटी एक्ट के तहत ऑथोराइज्ड एजेंसी बनने की मांग

​नियामक (TRAI) चाहता है कि सरकार उसे आईटी एक्ट के तहत एक ‘अधिकृत एजेंसी’ (Authorized Agency) घोषित करे, ताकि वह नियमों का उल्लंघन करने वाले इन ऐप्स पर सीधे नकेल कस सके। सूत्रों के मुताबिक, आईटी मंत्रालय (MeitY) ने ट्राई की इस मांग पर अपनी सहमति दे दी है, और अब गेंद दूरसंचार विभाग (DoT) के पाले में है, जो इस पर अंतिम फैसला लेगा।

​Truecaller ने दी सफाई: ‘हम खुद से नहीं करते स्पैम टैगिंग’

​इस पूरे विवाद पर Truecaller ने अपना पक्ष रखते हुए सफाई दी है। कंपनी का कहना है कि वह ट्राई के आदेशों और दिशा-निर्देशों का पूरा सम्मान करती है। वे किसी भी सरकारी डेजिगनेटेड सीरीज (जैसे 1400 या 1600) के नंबरों को अपने प्लेटफॉर्म पर खुद से स्पैम टैग नहीं करते हैं और न ही उन्हें ऑटोमैटिक ब्लॉक करते हैं। कंपनी के मुताबिक, अगर उनके सिस्टम को पता चलता है कि कोई नंबर आधिकारिक सीरीज का है, तो उसे स्पैम कैटेगरी से बाहर रखा जाता है।

​क्या भारत में बैन हो जाएंगे ये ऐप्स?

​यदि दूरसंचार विभाग (DoT) की तरफ से ट्राई को इस मामले में अधिकृत एजेंसी के रूप में मंजूरी मिल जाती है, तो Truecaller समेत तीनों कंपनियों की मुश्किलें काफी बढ़ सकती हैं। नियामक शुरुआत में इन ऐप्स को आधिकारिक नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जांच में नियमों का उल्लंघन गंभीर पाया गया और कंपनियों की तरफ से संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो आईटी एक्ट के तहत इन ऐप्स पर प्रतिबंध (बैन) लगाने जैसा बड़ा कदम भी उठाया जा सकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *