जब महंगे फ्लैट को छोड़ मंडावली की गलियों में रहे नितिन नवीन: सहपाठी ने शेयर की भाजपा अध्यक्ष के संघर्ष और सादगी की अनसुनी कहानी
जब महंगे फ्लैट को छोड़ मंडावली की गलियों में रहे नितिन नवीन: सहपाठी ने शेयर की भाजपा अध्यक्ष के संघर्ष और सादगी की अनसुनी कहानी
नई दिल्ली/लखनऊ: भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नवनियुक्त राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन इन दिनों अपनी नई जिम्मेदारी के साथ-साथ अपनी सादगी को लेकर जबरदस्त सुर्खियों में हैं। 45 वर्ष की उम्र में पार्टी के सबसे युवा अध्यक्ष बने नितिन नवीन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत वरिष्ठ नेताओं ने जो भरोसा जताया है, उसके पीछे उनकी वर्षों की तपस्या और जमीन से जुड़ाव है।
इस बीच, उनके कॉलेज के दिनों के सहपाठी और वरिष्ठ पत्रकार पीयूष पद्माकर ने सोशल मीडिया पर नितिन नवीन के संघर्ष के दिनों का एक बेहद भावुक संस्मरण साझा किया है। इस कहानी को खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अपने आधिकारिक एक्स (ट्विटर) हैंडल से रीट्वीट किया और लिखा कि नितिन नवीन की सादगी और सरलता हर भाजपा कार्यकर्ता के लिए गर्व की बात है।
विधायक के बेटे थे, पर 10 रुपये बचाने के लिए शेयर करते थे 20 रुपये की थाली
पीयूष पद्माकर ने अपनी पोस्ट में साल 1998 के उन दिनों को याद किया है, जब दोनों दिल्ली में कॉलेज में दाखिले के लिए संघर्ष कर रहे थे। उन्होंने लिखा:
घमंड नाम की चीज नहीं: साल 1998 में नितिन नवीन के पिता बिहार में एक कद्दावर विधायक (MLA) थे, लेकिन नितिन में इसका एक पैसे का भी घमंड नहीं था। मई और जून के तपते महीनों में दोनों दिल्ली के एक ही कमरे में रहते थे।
बचत के लिए डीटीसी बस का सफर: 12वीं पास करने के बाद जब दोनों कॉलेज में दाखिले की दौड़ में थे, तो ऑटो का किराया बचाने के लिए डीटीसी (DTC) बसों में धक्का खाते थे। दोपहर के लंच में 10 रुपये बचाने के लिए दोनों दोस्त 20 रुपये वाली खाने की थाली को आपस में शेयर करते थे। उस दौर में कभी नितिन के मुंह से टैक्सी करने की बात नहीं निकली क्योंकि टैक्सी का खर्च 50 रुपये से ऊपर आता था।
जब प्रॉपर्टी डीलर को ‘विधायक’ का पता चला, तो नितिन ने खुद ठुकरा दिया महंगा फ्लैट
पत्रकार पीयूष ने दिल्ली में किराए का मकान ढूंढने का एक दिलचस्प और आंखें खोलने वाला वाकया भी साझा किया। कॉलेज शुरू होने के बाद नितिन नवीन, पीयूष, विश्वजीत और सीताराम नाम के चार दोस्तों ने दिल्ली के पॉश इलाके आईपी एक्सटेंशन (पटपड़गंज) में रहने की सोची।
वे वाघवा नाम के एक प्रॉपर्टी डीलर के पास पहुंचे। जब डीलर ने पूछा कि पिताजी क्या करते हैं, तो पीयूष ने बताया कि नितिन के पिता बिहार की राजधानी पटना के विधायक हैं। यह सुनते ही डीलर ने उन्हें महंगे और आलीशान फ्लैट्स दिखाना शुरू कर दिया।
लेकिन नितिन नवीन ने तुरंत डीलर को रोकते हुए कहा, “हमारा बजट महीने का सिर्फ दो हजार रुपये है। पापा इससे ज्यादा पैसे नहीं देंगे। रहना, खाना और कॉलेज जाना… सब इसी दो हजार में मैनेज करना है।”
मंडावली की संकरी गली में रहे, खुद धोए बर्तन और लगाया पोछा
महंगे अपार्टमेंट का सपना छोड़कर आज के भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन अपने तीन दोस्तों के साथ पूर्वी दिल्ली के पश्चिम विनोद नगर (मंडावली) की एक तंग और अंदरूनी गली के मकान में रहने चले गए।
खुद करते थे घर का काम: उस समय उनके पास मेड या नौकर रखने के पैसे नहीं थे। नियम बना था कि अगर दो दोस्त सुबह का नाश्ता बनाएंगे, तो बाकी दो दोस्त झाड़ू-पोछा करेंगे और बर्तन धोएंगे।
नितिन और पीयूष की जोड़ी: शुरुआत में नितिन नवीन और पीयूष की ड्यूटी साथ में लगी थी। दोनों मिलकर सुबह-सुबह झूठे बर्तन धोते थे, कमरे में झाड़ू-पोछा करते थे और फिर फटाफट तैयार होकर दो-दो बसें बदलकर अपने कॉलेज पहुंचते थे।
विवादों को सुलझाने में माहिर: पीयूष बताते हैं कि उस दौर में भी चारों दोस्तों में नितिन सबसे ज्यादा अनुशासित और मिलनसार थे। जब भी दोस्तों के बीच कोई मनमुटाव या झगड़ा होता, तो नितिन ही अपनी मीठी बातों से उसे सुलझाते थे।
करीबी लोगों का कहना है कि लोगों के बीच तुरंत भरोसा कायम कर लेने की यही कला, मिलनसार स्वभाव और पुरानी सादगी ही आज नितिन नवीन को राजनीति के इस सर्वोच्च शिखर पर लेकर आई है, जिसने पीएम मोदी का भी दिल जीत लिया।
