उत्तराखंड में मानसून का तांडव: कुमाऊं में चीन सीमा मार्ग समेत 13 सड़कें बंद; रुद्रप्रयाग में उफनती मंदाकिनी नदी से 2 लोग रेस्क्यू
उत्तराखंड में मानसून का तांडव: कुमाऊं में चीन सीमा मार्ग समेत 13 सड़कें बंद; रुद्रप्रयाग में उफनती मंदाकिनी नदी से 2 लोग रेस्क्यू
देहरादून/पिथौरागढ़: उत्तराखंड में मानसून की भारी बारिश ने एक बार फिर विकराल रूप धारण कर लिया है. कुमाऊं मंडल के सीमांत जिले पिथौरागढ़ और गढ़वाल मंडल के रुद्रप्रयाग जिले में मूसलाधार बारिश के चलते जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है. पिथौरागढ़ में जहां चीन सीमा को जोड़ने वाले मुख्य हाईवे समेत 13 मार्ग बंद होने से करीब 50 गांवों का संपर्क टूट गया है, वहीं रुद्रप्रयाग में उफनती मंदाकिनी नदी के बीच फंसी एक जेसीबी के चालक और उसके सहयोगी को बेहद मुश्किल रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद सुरक्षित बाहर निकाला गया.
पिथौरागढ़: 82 मिमी बारिश से सीमांत क्षेत्रों में हाहाकार, 13 सड़कें बंद
सीमांत जनपद पिथौरागढ़ के धारचूला और उससे लगे सीमावर्ती इलाकों में बीती रात 82 मिलीमीटर मूसलाधार बारिश दर्ज की गई है. इस भारी बारिश के कारण पहाड़ियों से मलबा आने से चीन सीमा मार्ग पूरी तरह बदहाल हो गया है.
हाईवे और मुख्य मार्ग प्रभावित: टनकपुर-तवाघाट राष्ट्रीय राजमार्ग पर तवाघाट के पास पहाड़ी से भारी मात्रा में बोल्डर और मलबा गिरने से यातायात ठप हो गया. इसके अलावा तवाघाट-लिपुलेख (कैलास मानसरोवर मार्ग) और तवाघाट-सोबला-तिदांग सीमा मार्ग पर चार से पांच स्थानों पर लैंडस्लाइड होने से चीन सीमा का सड़क संपर्क पूरी तरह टूट गया है.
यात्री और ग्रामीण परेशान: धारचूला तहसील के घटखोला से सीनियाखोला को जोड़ने वाला पैदल पुल तेज बहाव में बह गया है. थल-मुनस्यारी मोटर मार्ग समेत लोनिवि और पीएमजीएसवाई की कुल 13 सड़कें (12 ग्रामीण मार्ग और 1 नेशनल हाईवे) बंद हैं. हालांकि प्रशासन की टीमें लगातार मार्ग खोलने में जुटी हैं, लेकिन बार-बार मलबा गिरने से स्थिति संवेदनशील बनी हुई है.
आदि कैलाश यात्रा पर असर: आदि कैलाश यात्रा मार्ग के मलघाट क्षेत्र में लगातार पत्थर गिर रहे हैं. तवाघाट क्षेत्र में दारमा और व्यास घाटी जाने वाले वाहनों को सुरक्षा के मद्देनजर रोक दिया गया है, जिससे आदि कैलाश यात्रा पर निकले श्रद्धालु बीच रास्ते में फंसे हुए हैं. प्रशासन ने यात्रियों और स्थानीय लोगों से केवल मौसम देखकर ही यात्रा करने की अपील की है.
रुद्रप्रयाग: कुंड बैराज से पानी छोड़ते ही बढ़ी मंदाकिनी; उफान के बीच फंसा जीवन
गढ़वाल के रुद्रप्रयाग जिले में शनिवार को एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया. ऊपरी हिमालयी क्षेत्रों में हो रही भारी बारिश के बीच सिंगोली-भटवाड़ी जल विद्युत परियोजना के कुंड बैराज से अचानक पानी छोड़ दिया गया, जिससे मंदाकिनी नदी का जलस्तर अप्रत्याशित रूप से बढ़ गया.
इसी दौरान गंगानगर क्षेत्र में नदी के बीचों-बीच निर्माण कार्य में लगी एक जेसीबी मशीन तेज जलधारा के बीच फंस गई. देखते ही देखते जेसीबी चालक और उसका सहयोगी चारों तरफ से उफनती नदी से घिर गए.
SDRF और जल पुलिस का त्वरित रेस्क्यू ऑपरेशन
पुलिस नियंत्रण कक्ष को जैसे ही मामले की सूचना मिली, जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र रुद्रप्रयाग ने तत्काल रेस्क्यू टीमों को सक्रिय किया. एसडीआरएफ (SDRF), जल पुलिस और नगर पंचायत अगस्त्यमुनि की टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं. बचाव दल ने तेज बहाव और विषम परिस्थितियों के बीच साहस का परिचय देते हुए एक चुनौतीपूर्ण अभियान चलाया और नदी के बीच फंसे दोनों व्यक्तियों को सकुशल बाहर निकाल लिया.
प्रशासन की अपील: नदी-नालों के पास जाने से बचें
”मानसून के दौरान जिले की सभी आपदा प्रबंधन एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रखा गया है. लगातार हो रही वर्षा के कारण जनपद की अधिकांश नदियों, गाड़-गदेरों और बरसाती नालों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है. ऐसे में नदी तटों और जलधाराओं के आसपास किसी भी प्रकार की लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है.”
— नंदन सिंह रजवार, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी, रुद्रप्रयाग
जिला प्रशासन ने आम जनता, स्थानीय ग्रामीणों, श्रमिकों और तीर्थयात्रियों से अपील की है कि वे मानसून के दौरान बिना प्रशासनिक अनुमति के नदी क्षेत्रों में न जाएं. किसी भी आपात स्थिति की सूचना तुरंत पुलिस नियंत्रण कक्ष या जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र को दें. मौसम विभाग ने अगले कुछ घंटों में और भारी बारिश की संभावना जताई है, जिससे राहत कार्यों में समय लग सकता है.
