Friday, July 3, 2026
उत्तराखंडराष्ट्रीय

अयोध्या विवाद के बाद बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति सतर्क; चढ़ावे की निगरानी और पारदर्शिता बढ़ाने के कड़े निर्देश

अयोध्या विवाद के बाद बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति सतर्क; चढ़ावे की निगरानी और पारदर्शिता बढ़ाने के कड़े निर्देश

​देहरादून: अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का मामला सामने आने के बाद उत्तराखंड की प्रसिद्ध बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) पूरी तरह अलर्ट हो गई है. बीकेटीसी के मुख्य कार्याधिकारी (CEO) सोहन सिंह रांगड़ ने केदारनाथ, बदरीनाथ और उनके अधीनस्थ सभी मंदिरों में चढ़ावे, दान सामग्री और राजस्व के रख-रखाव में विशेष सतर्कता बरतने के कड़े निर्देश जारी किए हैं.

​अयोध्या मामले का हवाला देकर जारी किया आधिकारिक पत्र

​सीईओ सोहन सिंह रांगड़ द्वारा मंदिर समिति के अधिकारियों और कर्मचारियों को एक आधिकारिक पत्र जारी किया गया है. इस पत्र में स्पष्ट तौर पर कहा गया है:

​”वर्तमान में श्री राम मंदिर अयोध्या में दान और चढ़ावे आदि के संबंध में मीडिया के माध्यम से मिल रही गबन की खबरों के क्रम में श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के अधीनस्थ मंदिरों के दान, चढ़ावे और किराये आदि की पारदर्शिता हेतु विशेष सतर्कता की आवश्यकता है, ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की अनियमितता की शिकायत प्राप्त न हो.”

​इस आदेश के तहत दान-भेंट गिनती स्थल, लेखा, खजाना, विश्रामगृह और पूजा काउंटरों पर तैनात सभी प्रभारियों को प्राप्त होने वाली धनराशि और सामग्री का नियमानुसार पारदर्शी लेखा-जोखा रखने को कहा गया है. लापरवाही पाए जाने पर सख्त कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है.

​बदरीनाथ धाम में वित्तीय अनियमितता के आरोपों पर बढ़ा विवाद

​यह पत्र ऐसे समय में आया है जब खुद श्री बदरीनाथ धाम में कथित वित्तीय अनियमितता के आरोपों को लेकर विवाद गरमाया हुआ है.

​भैरव सेना संगठन ने सौंपा ज्ञापन: शुक्रवार को भैरव सेना संगठन ने बीकेटीसी के सीईओ को एक ज्ञापन सौंपकर मंदिर समिति के अध्यक्ष के निजी सहायक (PA) से जुड़े कथित आर्थिक चोरी के मामले में तत्काल प्रशासनिक कार्रवाई, संबंधित कर्मचारी को सस्पेंड करने और एफआईआर (FIR) दर्ज कराने की मांग की.

​स्थानीय लोगों ने की हाई लेवल जांच की मांग: स्थानीय निवासियों और तीर्थ पुरोहितों ने भी पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग उठाई है. लोगों का कहना है कि यदि कोई दोषी है तो उस पर कड़ी कार्रवाई हो, और यदि आरोप गलत हैं तो भी तथ्यों को सार्वजनिक किया जाए ताकि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था को ठेस न पहुंचे और किसी प्रकार का भ्रम न रहे.

​फिलहाल इस मामले की जांच प्रक्रिया जारी है और प्रशासन व मंदिर समिति की आगामी कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *