अयातुल्ला अली खामेनेई का अंतिम संस्कार: सुरक्षा चिंताओं के कारण बेटे मोजतबा के शामिल होने पर गहरा संशय
तेहरान/नई दिल्ली: ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता (सुप्रीम लीडर) अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन के बाद देश में गहरा शोक है और उनके अंतिम संस्कार की तैयारियां युद्ध स्तर पर चल रही हैं। इस बीच, सुरक्षा चिंताओं के कारण उनके बेटे मोजतबा खामेनेई के अंतिम संस्कार में सार्वजनिक रूप से शामिल होने को लेकर गहरा संशय बना हुआ है।
भारत में ईरान के सुप्रीम लीडर के प्रतिनिधि, अयातुल्ला हकीम इलाही के अनुसार, मोजतबा खामेनेई खुद जनता के बीच आना चाहते हैं, लेकिन मौजूदा संवेदनशील हालात में उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना अधिकारियों के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। सुरक्षा जोखिमों को देखते हुए उच्चाधिकारियों ने उन्हें सार्वजनिक कार्यक्रमों से दूर रहने की सख्त सलाह दी है।
भारत से कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल को निमंत्रण; सलमान खुर्शीद जाएंगे ईरान
अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार को ईरान के हालिया इतिहास की सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक माना जा रहा है। इस ऐतिहासिक शोक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए ईरान सरकार ने भारत के प्रमुख नेताओं को भी आमंत्रित किया है:
मल्लिकार्जुन खड़गे और सलमान खुर्शीद को न्योता: ईरान ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद को अंतिम संस्कार में शामिल होने का विशेष निमंत्रण भेजा है।
तेहरान जाएंगे खुर्शीद: पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद कांग्रेस पार्टी की ओर से ईरान की राजधानी तेहरान जाएंगे। वे वहां पहुंचकर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे का आधिकारिक शोक संदेश ईरानी प्रशासन को सौंपेंगे।
ईरान रवानगी से पहले पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने भारत-ईरान संबंधों पर जोर देते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच लंबे समय से बेहद मजबूत और मित्रतापूर्ण संबंध रहे हैं। दुख की इस घड़ी में भारत का ईरान के साथ खड़ा होना बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि अतीत में कई अंतरराष्ट्रीय मंचों और मुद्दों पर ईरान ने भारत का खुलकर समर्थन किया था।
देश-विदेश के दिग्गजों के जुटने की उम्मीद
ईरान में दिवंगत नेता को अंतिम श्रद्धांजलि देने के लिए देश भर में कई दिनों तक चलने वाले विशेष शोक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें देश-विदेश से भारी संख्या में वीआईपी और आम लोगों के जुटने की उम्मीद है। ऐसे में पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या मोजतबा खामेनेई कड़े सुरक्षा घेरे के बीच अपने पिता को अंतिम विदाई देने सार्वजनिक रूप से सामने आते हैं या फिर सुरक्षा कारणों से इस महा-आयोजन से दूरी बनाए रखते हैं।
