राजनीति

कैलाश विजयवर्गीय के संघ पर दिए बयान से गरमाई सियासत, कहा- “संगठन में भीड़ बढ़ी, पर अच्छे लोगों की कमी”

भोपाल: कैलाश विजयवर्गीय के संघ पर दिए बयान से गरमाई सियासत, कहा- “संगठन में भीड़ बढ़ी, पर अच्छे लोगों की कमी”

​भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार में नगरीय विकास मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता कैलाश विजयवर्गीय अपने एक नए बयान को लेकर सियासी गलियारों में सुर्खियों में आ गए हैं। शनिवार को भोपाल में आयोजित एक स्मृति कार्यक्रम में उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) को लेकर बड़ा बयान दिया है। विजयवर्गीय ने कहा कि भाजपा की सरकार आने के बाद संघ में भीड़ तो बढ़ गई है, लेकिन अब वहां ‘अच्छे लोगों’ की कमी होने लगी है। सोशल मीडिया पर उनका यह बयान तेजी से वायरल हो रहा है।

​अधिकारियों के ‘संघ प्रेम’ पर कसा तीखा तंज

​कैलाश विजयवर्गीय ने सत्ता आने के बाद सरकारी अधिकारियों में अचानक जगे ‘संघ प्रेम’ पर खुलकर तंज कसा। उन्होंने कहा कि जब से भाजपा की सरकार आई है, हर कोई खुद को संघ का करीबी दिखाना चाहता है। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा:

​”अब जो भी अधिकारी सरकार में आता है, वह कहता है कि मैंने भी संघ की पट्टी बांधी है और आरएसएस की चड्डी पहनी है। एक अधिकारी ने मुझसे कहा कि मेरे पिता संघ की बैठकों में जाते थे, तो दूसरे ने कहा कि मेरे पिता संघ के अध्यक्ष थे। आज हर कोई खुद को संघ से जुड़ा बताना चाहता है।”

​”भीड़ बढ़ी पर गुणवत्ता पर आत्म-मंथन की जरूरत”

​मंत्री विजयवर्गीय ने संगठन के विस्तार के साथ-साथ उसके भीतर आ रहे बदलावों पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि RSS आज एक बहुत बड़ा संगठन बन चुका है और इसकी विचारधारा भी फैल रही है, लेकिन इसके विस्तार के कारण ऐसे लोग भी इससे जुड़ गए हैं जो सिर्फ मौके का फायदा उठाना चाहते हैं।

​उन्होंने गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए कहा कि आज संघ लोगों से तो भरा हुआ है, लेकिन अच्छे इंसान कम होते जा रहे हैं। पहले सच में अच्छे लोग हुआ करते थे। अगर संगठन में अच्छे लोग ही नहीं होंगे, तो फिर विचारधारा का क्या मूल्य रह जाएगा? इस विषय पर हम सभी को गंभीरता से आत्म-मंथन करने की जरूरत है।

​बयान के निकाले जा रहे राजनीतिक मायने

​यह पूरा घटनाक्रम शालिगराम तोमर की स्मृति में आयोजित एक कार्यक्रम का है, जहां सरकार और संगठन से जुड़े कई बड़े नेता मंच पर मौजूद थे। चूंकि आरएसएस का सीधा संबंध भाजपा से है, इसलिए विजयवर्गीय के इस आत्म-मंथन वाले बयान के राजनीतिक जानकार अलग-अलग मायने निकाल रहे हैं। गलियारों में चर्चा इस बात की है कि विजयवर्गीय के निशाने पर आखिर कौन था।

​यह पहला मौका नहीं है जब कैलाश विजयवर्गीय अपने बेबाक या विवादित बयानों को लेकर चर्चा में आए हों, लेकिन इस बार सीधे संघ और प्रशासनिक अधिकारियों को आड़े हाथों लेने के कारण मध्य प्रदेश की राजनीति का पारा चढ़ गया है।

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