उत्तराखंड में निहंग सिखों पर विवाद: कर्णप्रयाग से नगरासू गुरुद्वारे तक क्या-क्या हुआ?
उत्तराखंड में निहंग सिखों पर विवाद: कर्णप्रयाग से नगरासू गुरुद्वारे तक क्या-क्या हुआ?
देहरादून/रुद्रप्रयाग, 25 जून 2026: उत्तराखंड के चमोली और रुद्रप्रयाग जिलों में निहंग सिख श्रद्धालुओं से जुड़े विवाद ने तनाव की स्थिति पैदा कर दी थी। एक पार्किंग विवाद से शुरू हुई घटना मारपीट, गिरफ्तारी और फिर गुरुद्वारे पर कब्जे तक पहुंच गई। चार दिन तक चले स्टैंडऑफ के बाद मामला शांतिपूर्ण तरीके से सुलझ गया।
घटनाक्रम: कर्णप्रयाग में शुरूआत
16 जून 2026: चमोली जिले के कर्णप्रयाग बाजार में श्री हेमकुंड साहिब से दर्शन कर लौट रहे निहंग सिख श्रद्धालुओं (मोटरसाइकिल पर) और स्थानीय दुकानदारों/लोगों के बीच विवाद हो गया। शुरुआत गाड़ी पार्किंग को लेकर हुई, जो मारपीट में बदल गई।
आरोप है कि एक निहंग सिख ने तलवार चला दी, जिससे कई लोग घायल हुए। पुलिस ने चार निहंग सिखों (पंजाब के मोहाली से) को गिरफ्तार कर लिया। सिख संगठनों का आरोप है कि पुलिस ने एकतरफा कार्रवाई की और केवल उनके पक्ष की शिकायत दर्ज की।
नगरासू गुरुद्वारे पर कब्जा
20 जून 2026: रुद्रप्रयाग जिले के नगरासू (बद्रीनाथ हाईवे पर) स्थित गुरुद्वारे (दमदमा साहिब गुरुद्वारा) में 7-8 निहंग सिख पहुंचे। उन्होंने गुरुद्वारा प्रबंधन से 50-60 कमरों की मांग की, ताकि कर्णप्रयाग मामले में विरोध प्रदर्शन के लिए लोग ठहर सकें।
जब प्रबंधन ने मना कर दिया, तो विवाद बढ़ गया। निहंगों पर गुरुद्वारे के सेवादारों से मारपीट, तोड़-फोड़ और एक बुजुर्ग सेवादार को बंधक बनाने का आरोप लगा। वे गुरुद्वारे की छत और ऊपरी मंजिल पर चढ़ गए, पारंपरिक शस्त्र (तलवार, भाले) लेकर प्रदर्शन किया और गिरफ्तार साथियों की रिहाई की मांग की।
प्रशासन ने भारी पुलिस, पीएसी और आईटीबीपी तैनात की। इलाके में इंटरनेट बंद किया गया। डीएम विशाल मिश्रा और एसपी निहारिका तोमर ने वार्ता की, लेकिन शुरू में कोई समाधान नहीं निकला।
विवाद का समाधान
23 जून 2026: पंजाब से आए सिख नेताओं, दिल्ली सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी (DSGMC) और स्थानीय प्रशासन की वार्ता के बाद निहंग सिख छत से नीचे उतरे। वे पंजाब लौट गए। चार दिन का स्टैंडऑफ शांतिपूर्ण तरीके से खत्म हुआ।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और पंजाब सीएम भगवंत मान के बीच भी बातचीत हुई। पुलिस ने दोनों पक्षों की शिकायतों की निष्पक्ष जांच के आदेश दिए। कर्णप्रयाग मामले की जांच हरिद्वार ट्रांसफर कर दी गई।
मुख्य मुद्दे और प्रतिक्रियाएं
निहंग सिखों का पक्ष: वे कर्णप्रयाग में एकतरफा कार्रवाई और गुरुद्वारा प्रबंधन द्वारा उनके समर्थन न करने से नाराज थे।
स्थानीय और गुरुद्वारा प्रबंधन का पक्ष: निहंगों पर आक्रामक व्यवहार, शस्त्र प्रदर्शन और गुरुद्वारे पर कब्जे का आरोप।
सिख संगठनों ने निष्पक्ष जांच की मांग की। प्रशासन ने अफवाहों से बचने और शांति बनाए रखने की अपील की। तीर्थयात्रा (हेमकुंड साहिब-केदारनाथ) पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ा।
यह पूरा विवाद मुख्य रूप से पार्किंग विवाद से उपजा स्थानीय तनाव था, जिसने सांप्रदायिक रंग लेने की कोशिश की, लेकिन प्रशासनिक हस्तक्षेप से शांत हुआ। पुलिस जांच जारी है।
