धार्मिक समाचार: वर्ष 2026 में कब है निर्जला एकादशी? जानें सही तिथि, शुभ योग और व्रत पारण का समय
धार्मिक समाचार: वर्ष 2026 में कब है निर्जला एकादशी? जानें सही तिथि, शुभ योग और व्रत पारण का समय
नई दिल्ली। हिंदू धर्म में ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी यानी ‘निर्जला एकादशी’ का विशेष महत्व है। इसे वर्ष भर की सभी 24 एकादशियों में सबसे कठिन और पुण्यदायी माना जाता है। इस वर्ष एकादशी तिथि दो दिनों तक प्रभावी रहने के कारण व्रत की तारीख को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई थी, जिसे पंचांग की गणना और उदया तिथि के आधार पर स्पष्ट कर दिया गया है। वर्ष 2026 में निर्जला एकादशी का व्रत 25 जून, गुरुवार को रखा जाएगा।
एकादशी तिथि की शुरुआत और उदया तिथि का महत्व
वैदिक पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी तिथि की शुरुआत 24 जून 2026 को दोपहर 2 बजकर 42 मिनट पर होगी और इसका समापन अगले दिन 25 जून 2026 को शाम 4 बजकर 39 मिनट पर होगा। सनातन परंपरा में व्रत और पर्वों के निर्धारण के लिए ‘उदया तिथि’ (सूर्योदय के समय विद्यमान तिथि) को सर्वोपरि माना जाता है। चूंकि 25 जून को सूर्योदय के समय एकादशी तिथि मौजूद रहेगी, इसलिए धर्मशास्त्रीय दृष्टि से इसी दिन व्रत रखना पूर्णतः मान्य और श्रेष्ठ होगा।
इस बार बन रहे हैं कई दुर्लभ शुभ योग
धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से इस वर्ष की निर्जला एकादशी अत्यंत अनूठी मानी जा रही है। 25 जून को व्रत के दिन एक साथ तीन अत्यंत शुभ योगों का संयोग बन रहा है:
रवि योग
शिव योग
सिद्ध योग
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इन शुभ योगों के दौरान की गई पूजा, मंत्र-जप, ध्यान और दान-पुण्य का फल कई गुना अधिक प्राप्त होता है। यह समय भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आराधना के लिए विशेष रूप से अनुकूल है।
पूजा विधि और जलदान का अक्षय पुण्य
निर्जला एकादशी के दिन श्रद्धालु पूरे दिन अन्न और जल का पूरी तरह त्याग कर साधना करते हैं। इस दिन प्रातःकाल स्नान के बाद भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा की जाती है और उन्हें तुलसी पत्र अर्पित किया जाता है। मानसिक शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा के लिए इस दिन विष्णु सहस्रनाम का पाठ और “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जप करना अत्यंत फलदायी माना गया है।
चूंकि इस व्रत में स्वयं जल का त्याग किया जाता है, इसलिए इस दिन ‘जलदान’ का महत्व सबसे अधिक है। गर्मी के इस मौसम में प्यासे लोगों, यात्रियों और जरूरतमंदों को स्वच्छ जल पिलाना तथा पात्र में जल भरकर दान करना अक्षय पुण्य प्रदान करने वाला माना गया है।
व्रत पारण का शुभ समय
निर्जला एकादशी व्रत का विधिपूर्वक पारण अगले दिन 26 जून 2026, शुक्रवार को किया जाएगा। पंचांग के अनुसार, व्रत खोलने (पारण) का शुभ समय प्रातः 5 बजकर 49 मिनट से लेकर प्रातः 9 बजकर 03 मिनट तक रहेगा। द्वादशी तिथि का समापन 26 जून को सायं 6 बजकर 52 मिनट पर होगा, इसलिए श्रद्धालुओं को निर्धारित सुबह के समय में ही पारण संपन्न करना होगा।
नोट (डिस्क्लेमर): यह समाचार धार्मिक मान्यताओं, पंचांग गणनाओं और पारंपरिक विश्वासों पर आधारित है। स्थानीय परंपराओं या क्षेत्रीय पंचांग के अनुसार तिथियों में आंशिक अंतर संभव है।
