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राम भक्तों को सौगात: नेपाल के जनकपुर से सीधे अयोध्या के लिए चलेगी विशेष ट्रेन, काठमांडू बैठक में बनी सहमति

राम भक्तों को सौगात: नेपाल के जनकपुर से सीधे अयोध्या के लिए चलेगी विशेष ट्रेन, काठमांडू बैठक में बनी सहमति

​काठमांडू/अयोध्या। राम भक्तों और माता सीता के दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं के लिए एक बेहद सुखद और बड़ी खबर है। नेपाल के जनकपुर से प्रभु श्रीराम की नगरी अयोध्या के लिए सीधे विशेष पैसेंजर ट्रेन चलाने की तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं। नेपाल की राजधानी काठमांडू में हुई द्विपक्षीय उच्च स्तरीय बैठक के बाद इस रूट को जल्द ही हरी झंडी मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। इस रेल सेवा के शुरू होने से सदियों पुराने सांस्कृतिक संबंधों को एक नया आयाम मिलेगा और श्रद्धालु महज कुछ घंटों में यह सफर आसानी से पूरा कर सकेंगे।

​’रामायण और जानकी सर्किट’ को जोड़ेगा यह रूट, ये होंगे मुख्य स्टेशन

​विशेषज्ञों के मुताबिक, इस ट्रेन के परिचालन से उत्तर प्रदेश, बिहार और नेपाल के बीच एक बहुत बड़ा धार्मिक और सांस्कृतिक सर्किट तैयार होने जा रहा है। यह रेल सेवा असल में ‘रामायण सर्किट’ और ‘जानकी सर्किट’ को आपस में जोड़ने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम साबित होगी।

​प्रस्तावित रूट और स्टेशन:

यह विशेष ट्रेन नेपाल के जनकपुर से प्रस्थान करेगी और भारत की सीमा में प्रवेश कर जयनगर, दरभंगा और सीतामढ़ी होते हुए अयोध्या पहुंचेगी। इस रूट के जरिए श्रद्धालु बिना किसी परेशानी के जनकपुर से करीब 500 किलोमीटर दूर स्थित अयोध्या तक की सुगम यात्रा कर सकेंगे।

​सोशल मीडिया पर टाइमटेबल वायरल, 16 घंटे में पूरा होगा सफर

​हालांकि, रेलवे की ओर से अभी इस ट्रेन के परिचालन की कोई आधिकारिक तारीख घोषित नहीं की गई है, लेकिन सोशल मीडिया पर इसका एक अनौपचारिक टाइमटेबल (Time Table) तेजी से वायरल हो रहा है। वायरल शेड्यूल के अनुसार:

​जनकपुर से रवानगी: शनिवार दोपहर 12:40 बजे

​अयोध्या आगमन: रविवार सुबह 05:00 बजे

​कुल समय: केवल 16 घंटे 20 मिनट

​काठमांडू की बैठक में एसओपी (SOP) पर चर्चा

​हाल ही में 11 और 12 जून को काठमांडू में भारत-नेपाल संयुक्त आयोग (10वीं प्रोजेक्ट स्टीयरिंग कमेटी और 8वीं जॉइंट वर्किंग ग्रुप) की एक अत्यंत महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में जनकपुर-अयोध्या पैसेंजर ट्रेन सेवा को शुरू करने के लिए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOPs) पर विस्तार से मंथन किया गया।

​नेपाल रेलवे के महाप्रबंधक परिवेश प्राजुली ने संकेत दिए हैं कि इस रेल सेवा को जल्द ही अंतिम मंजूरी मिल सकती है। इसके साथ ही बैठक में भारत के सहयोग से बन रही जयनगर-बिजलपुरा-बर्दीबास और जोगबनी-विराटनगर ब्रॉड-गेज रेल लाइनों के कार्यों की भी समीक्षा की गई।

​भारत-नेपाल के ‘बेटी-रोटी’ के रिश्तों को मिलेगी और मजबूती

​भारत और नेपाल, विशेषकर भारत के मिथिला क्षेत्र और नेपाल के तराई इलाकों के बीच सदियों से ‘बेटी-रोटी’ का अटूट सामाजिक, धार्मिक और पारिवारिक रिश्ता रहा है। इस नई सीधी रेल सेवा के शुरू होने से न केवल दोनों देशों के सीमावर्ती क्षेत्रों में धार्मिक पर्यटन को अभूतपूर्व बढ़ावा मिलेगा, बल्कि जनकपुर, जयनगर और पूरे मिथिला क्षेत्र के व्यापार को भी नई ताकत मिलेगी। स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे, जो भारत-नेपाल रेल संपर्क के इतिहास में एक नया और सुनहरा अध्याय लिखेगा।

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