राजनीति

​टीएमसी का बड़ा कदम: लोकसभा स्पीकर को लिखा पत्र, पार्टी के किसी भी अलग गुट को मान्यता न देने की मांग

​टीएमसी का बड़ा कदम: लोकसभा स्पीकर को लिखा पत्र, पार्टी के किसी भी अलग गुट को मान्यता न देने की मांग

तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने संसद के भीतर पार्टी में किसी भी संभावित टूट या अंतर्कलह को रोकने के लिए एक बड़ा और अग्रिम कदम उठाया है। टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने लोकसभा अध्यक्ष (स्पीकर) ओम बिरला को एक औपचारिक पत्र भेजकर अपील की है कि सदन में ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (AITC) के किसी भी कथित अलग गुट या धड़े को कोई मान्यता, दर्जा या विधायी सुविधा न दी जाए।

​अभिषेक बनर्जी ने पत्र में क्या कहा?

​लोकसभा अध्यक्ष को लिखे पत्र में अभिषेक बनर्जी ने स्पष्ट मांग की है कि सदन में ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (AITC) को केवल एक ही राजनीतिक दल माना जाए, जिसका प्रतिनिधित्व केवल पार्टी के अधिकृत नेता और व्हिप (सचेतक) के माध्यम से ही तय हो।

​उन्होंने यह भी आग्रह किया कि यदि भविष्य में ऐसी कोई स्थिति बनती है, तो लोकसभा अध्यक्ष कोई भी अंतिम फैसला लेने से पहले तृणमूल कांग्रेस के आधिकारिक नेतृत्व को अपनी बात रखने का पूरा मौका दें।

​कीर्ति आजाद और सागरिका घोष ने सौंपी चिट्ठी

​टीएमसी के वरिष्ठ सांसद कीर्ति आजाद और राज्यसभा सांसद सागरिका घोष खुद यह पत्र लेकर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के आवास पर पहुंचे और उन्हें यह आवेदन सौंपा।

​स्पीकर से मुलाकात के बाद सांसद कीर्ति आजाद ने बागी तेवर दिखाने वालों पर तीखा हमला बोलते हुए कहा:

​”यह बिल्कुल साफ है कि जिस थाली में खाते हैं, उसी में छेद कर रहे हैं। पार्टी में कोई ‘स्प्लिट’ (विभाजन) नहीं हो सकता। सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक बेंच के फैसले और संविधान की 10वीं अनुसूची के आर्टिकल 4 में भी इसका स्पष्ट जिक्र है। महाराष्ट्र में जो हुआ, वह गलत था। हमें पूरा भरोसा है कि स्पीकर महोदय नियमों और संविधान के मुताबिक ही काम करेंगे।”

— कीर्ति आज़ाद, लोकसभा सांसद, TMC

​’हार के बाद पार्टी छोड़ना नैतिक कमजोरी’: सागरिका घोष

​वहीं, पार्टी की सांसद सागरिका घोष ने इस कदम को पूरी तरह असंवैधानिक और कानून के विपरीत बताया। उन्होंने दलबदल की कोशिशों की निंदा करते हुए कहा:

​”हमने स्पीकर को पत्र देकर साफ किया है कि जो लोग लोकसभा के अंदर टीएमसी को तोड़कर अलग गुट बनाना चाहते हैं, हमारा संविधान और कानून इसकी कतई अनुमति नहीं देता। ये लोग केवल अपनी नैतिक कमजोरी दिखा रहे हैं। जब पार्टी चुनाव हार जाती है, तब ये साथ छोड़ रहे हैं।”

— सागरिका घोष, सांसद, TMC

​क्या हैं इस कदम के सियासी मायने?

​राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, लोकसभा चुनाव के बाद पार्टी के भीतर किसी भी तरह की गुटबाजी या दलबदल की संभावनाओं को भांपते हुए टीएमसी नेतृत्व ने यह ‘प्री-एम्प्टिव स्ट्राइक’ (अग्रिम कदम) की है। महाराष्ट्र में शिवसेना और एनसीपी जैसी पार्टियों में हुए हालिया घटनाक्रमों से सबक लेते हुए, टीएमसी ने एंटी-डिफेक्शन लॉ (दलबदल विरोधी कानून) के तहत अपनी स्थिति पहले ही मजबूत कर ली है।

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