’कम्युनिस्टों को झप्पियां नहीं चाहिए…’ – पिनाराई विजयन पर राहुल गांधी के बयान से ‘INDIA’ गठबंधन में भारी दरार, वामदलों का तीखा पलटवार
’कम्युनिस्टों को झप्पियां नहीं चाहिए…’ – पिनाराई विजयन पर राहुल गांधी के बयान से ‘INDIA’ गठबंधन में भारी दरार, वामदलों का तीखा पलटवार
राजनीतिक डेस्क, नई दिल्ली:
लोकसभा चुनाव के बाद विपक्षी गठबंधन ‘INDIA’ के भीतर की अंदरूनी कलह एक बार फिर खुलकर सामने आ गई है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष (LoP) राहुल गांधी द्वारा केरल के पूर्व मुख्यमंत्री और माकपा (CPM) के दिग्गज नेता पिनाराई विजयन को लेकर दिए गए एक बयान ने गठबंधन की दो प्रमुख सहयोगी पार्टियों— कांग्रेस और वामदलों के बीच कड़वाहट को चरम पर पहुंचा दिया है।
इस बयान से आहत और नाराज वामपंथी नेताओं ने कांग्रेस नेतृत्व के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है, जिससे राष्ट्रीय स्तर पर इस गठबंधन के भविष्य और एकजुटता पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं।
लीक ऑडियो से शुरू हुआ पूरा विवाद
यह पूरा सियासी बवाल 8 जून 2026 को हुई विपक्षी गठबंधन ‘INDIA’ की उच्च स्तरीय बैठक के एक लीक ऑडियो क्लिप के सामने आने के बाद शुरू हुआ। इस बैठक में राहुल गांधी ने दो टूक शब्दों में वामपंथी नेताओं के साथ अपने राजनीतिक मतभेदों को सार्वजनिक किया था।
लीक ऑडियो में राहुल गांधी को यह कहते सुना जा रहा है:
”हमारी अपनी लड़ाइयां हैं। लेकिन अगर आप मुझसे केरल के पूर्व मुख्यमंत्री को जाकर गले लगाने के लिए कह रहे हैं, तो मैं ऐसा नहीं कर सकता और न ही करूँगा, क्योंकि उनके साथ मेरी राजनीतिक लड़ाई चल रही है।”
केरल की सियासी दुश्मनी: उल्लेखनीय है कि केरल की राजनीति में कांग्रेस के नेतृत्व वाला यूडीएफ (UDF) और माकपा के नेतृत्व वाला एलडीएफ (LDF) पारंपरिक रूप से धुर विरोधी रहे हैं। हालिया विधानसभा चुनावों में कांग्रेस ने विजयन के लगातार दो बार के शासन को खत्म कर उन्हें सत्ता से बेदखल किया है। लेकिन राज्य की यह दुश्मनी राष्ट्रीय मंच पर इस तरह दरार पैदा करेगी, इसकी उम्मीद सहयोगियों को नहीं थी।
पिनाराई विजयन का कड़ा रुख: “पीएम मोदी से गले मिलने की तस्वीरें इंटरनेट पर हैं”
राहुल गांधी के इस बयान पर पलटवार करते हुए केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने बेहद कड़ा और सधा हुआ रुख अपनाया। उन्होंने मीडिया से कहा कि उनके और राहुल गांधी के बीच बातचीत हमेशा औपचारिक अभिवादन या केवल हाथ मिलाने तक ही सीमित रही है।
विजयन ने कटाक्ष करते हुए कहा:
”मुझे गले मिलने या न मिलने की इस बात से कोई व्यक्तिगत आपत्ति नहीं है। साल 2018 का वक्त याद करिए, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मेरे गले मिलने की तस्वीरें आज भी इंटरनेट पर हर जगह मौजूद हैं। मेरी असली चिंता इस बयान के पीछे छिपे राजनीतिक संदेश को लेकर है। यह राहुल गांधी के संकीर्ण नजरिए को दिखाता है और यह भी साफ करता है कि वह ‘INDIA’ गठबंधन की एकता को किस तरह देखते हैं।”
भड़के वामपंथी नेता: “राहुल गांधी अपनी झप्पियां अपने पास रखें”
राहुल गांधी के इस रवैये के बाद पूरी कम्युनिस्ट पार्टी अपने शीर्ष नेता के समर्थन में लामबंद हो गई है और कांग्रेस पर तीखे हमले कर रही है:
वृंदा करात (कद्दावर नेता, CPM): उन्होंने राहुल गांधी पर सीधा हमला बोलते हुए कहा, “हमें किसी से गले मिलने की कोई जरूरत नहीं है। कम्युनिस्टों को झप्पियां नहीं चाहिए, हमें साफ-सुथरी राजनीति चाहिए। राहुल गांधी, आप अपनी झप्पियां अपने पास ही रखिए। लेकिन देश के नेता प्रतिपक्ष होने के नाते, आपको पिनाराई विजयन जैसे विपक्ष के कद्दावर और वरिष्ठ नेताओं का सम्मान करना सीखना चाहिए।”
एम.ए. बेबी (वरिष्ठ नेता, CPM): उन्होंने कहा कि किसी ने भी राहुल गांधी से विजयन को गले लगाने की मिन्नत नहीं की थी, लेकिन राहुल गांधी को कम से कम केंद्रीय एजेंसियों के जरिए विजयन की गिरफ्तारी की मांग करना तो बंद कर देना चाहिए।
जॉन ब्रिटास (सांसद, CPM): उन्होंने जोर देकर कहा कि यह मुद्दा सिर्फ शारीरिक रूप से गले मिलने का नहीं है, बल्कि यह ‘INDIA’ गठबंधन की वैचारिक और राजनीतिक ईमानदारी (Political Integrity) का है।
गठबंधन के भविष्य पर संकट के बादल
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संसद के आगामी सत्र से ठीक पहले कांग्रेस और वामदलों के बीच की यह आपसी जंग विपक्षी खेमे को कमजोर कर सकती है। केरल में भले ही दोनों दल एक-दूसरे के खिलाफ लड़ते आए हों, लेकिन केंद्र के स्तर पर इस तरह की बयानबाजी से भारतीय जनता पार्टी (BJP) को विपक्ष के विरोधाभास पर घेरने का एक बड़ा मौका मिल गया है। अब देखना यह होगा कि कांग्रेस आलाकमान इस डैमेज कंट्रोल के लिए क्या कदम उठाता है।
