सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक कंटेंट मामला: स्टैंड-अप कमीडियन प्रणित मोरे और अन्य के खिलाफ महाराष्ट्र साइबर ने दर्ज की FIR
सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक कंटेंट मामला: स्टैंड-अप कमीडियन प्रणित मोरे और अन्य के खिलाफ महाराष्ट्र साइबर ने दर्ज की FIR
मुंबई:
सोशल मीडिया पर कथित अश्लील और आपत्तिजनक कंटेंट प्रसारित करने के आरोप में स्टैंड-अप कमीडियन और यूट्यूबर प्रणित मोरे की मुश्किलें बढ़ गई हैं। महाराष्ट्र साइबर विभाग ने उनके और शो से जुड़े अन्य लोगों के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। इस कार्रवाई की जद में हिमांशु जांगड़ा और डॉक्टर सेजल पवार समेत कुछ अन्य व्यक्ति भी आए हैं।
महिलाओं, सहमति और मृत व्यक्तियों पर अभद्र टिप्पणी का आरोप
महाराष्ट्र साइबर विभाग के अनुसार, सोशल मीडिया पर प्रसारित कुछ वीडियो और क्लिप्स में महिलाओं की गरिमा, ‘सहमति’ (कंसेंट) और मृत व्यक्तियों को लेकर कथित तौर पर बेहद आपत्तिजनक टिप्पणियां की गईं। ये वीडियो एक स्टैंड-अप कॉमेडी शो से जुड़े हैं, जिसकी मेजबानी (होस्ट) प्रणित मोरे ने की थी। शो के कुछ विवादित अंश यूट्यूब, इंस्टाग्राम और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर साझा किए गए थे, जिसके वायरल होने के बाद विभाग ने स्वतः संज्ञान लेते हुए यह कार्रवाई की है।
क्या हैं मुख्य आरोप?
जांच एजेंसियों का आरोप है कि इन वीडियो में कही गई बातें सामाजिक मर्यादा और कानून के दायरे से बाहर हैं:
हिमांशु जांगड़ा पर आरोप: प्रारंभिक जांच के अनुसार, एक वीडियो क्लिप में हिमांशु जांगड़ा ने कथित तौर पर डेट पर खर्च किए गए पैसे के बदले शारीरिक संबंधों का अधिकार होने जैसी बात कही। इसके लिए उन्होंने ‘370 रुपये में बिरयानी और वसूली’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया, जिसे महिलाओं की गरिमा और सहमति के महत्व को ठेस पहुंचाने वाला माना गया है।
डॉ. सेजल पवार पर आरोप: एक अन्य वीडियो में डॉ. सेजल पवार पर आरोप है कि उन्होंने मृत व्यक्तियों और मेडिकल शिक्षा के लिए उपयोग किए जाने वाले शवों (कैडिवर) को लेकर अमर्यादित टिप्पणियां कीं, जो सामाजिक शिष्टाचार के खिलाफ हैं।
बीएनएस और आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज
महाराष्ट्र साइबर ने बताया कि यह मामला भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की विभिन्न धाराओं और सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम, 2000 के प्रावधानों के तहत दर्ज किया गया है। जांच एजेंसी ने मामले से जुड़े सभी संबंधित आरोपियों को पूछताछ के लिए समन जारी कर दिया है।
व्यूअरशिप और कमाई के एंगल से भी जांच शुरू
साइबर विभाग का आरोप है कि इस कार्यक्रम के वीडियो जानबूझकर रिकॉर्ड किए गए और व्यापक दर्शक संख्या (व्यूअरशिप) हासिल करने के उद्देश्य से सोशल मीडिया पर फैलाए गए। जांचकर्ता अब इस बिंदु पर भी गौर कर रहे हैं कि क्या इन आपत्तिजनक वीडियो के माध्यम से व्यूअरशिप बढ़ाकर पैसे कमाने का प्रयास किया गया था।
महाराष्ट्र साइबर विभाग ने कड़ा संदेश देते हुए स्पष्ट किया है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर प्रसारित होने वाले कंटेंट पर उनकी लगातार निगरानी रहती है। यदि कोई भी कंटेंट कानून, सामाजिक शिष्टाचार या सार्वजनिक हित के खिलाफ पाया जाता है, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल मामले की विस्तृत जांच जारी है।
