पीओके के रावलकोट में प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी: हिंसा में अब तक 53 नागरिकों की मौत, आक्रोश में लोग
पीओके के रावलकोट में प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी: हिंसा में अब तक 53 नागरिकों की मौत, आक्रोश में लोग
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) के रावलकोट से एक बेहद दर्दनाक और खूनी घटना सामने आई है। शहर के ईदगाह मैदान में सस्ता आटा, चावल, बिजली और बुनियादी अधिकारों की मांग को लेकर शांतिपूर्ण ढंग से जमा हुए हजारों निहत्थे प्रदर्शनकारियों पर पाकिस्तानी सेना के जवानों और रेंजर्स ने अंधाधुंध गोलियां चला दीं। इस अचानक हुई हिंसक कार्रवाई ने पूरे इलाके को एक खौफनाक मंजर में बदल दिया।
रावलकोट में करीब 60,000 से 70,000 लोग अपने अधिकारों के लिए जुटे थे, जिनमें भारी संख्या में महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे। सुरक्षा बलों ने बिना किसी चेतावनी के प्रदर्शनकारियों पर AK-47 राइफलों से गोलियां बरसाना शुरू कर दिया।
शुक्रवार से जारी हिंसा का क्रूर चेहरा
पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की इस बर्बर कार्रवाई के कारण रावलकोट की सड़कें और खेत खून से सने नजर आए। इस ताजा गोलीबारी और पिछले कुछ दिनों से जारी कार्रवाई के आंकड़े बेहद डराने वाले हैं:
ताजा गोलीबारी का असर: इस अचानक हुए हमले में कम से कम 16 नागरिकों की मौके पर ही मौत हो गई और 37 से ज्यादा लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।
अब तक कुल मौतें: कई निवासियों के लिए यह त्रासदी नई नहीं है। शुक्रवार से शुरू हुए इस विरोध प्रदर्शन के खिलाफ पाकिस्तान प्रशासन की दमनकारी कार्रवाई में अब तक कुल 53 नागरिकों की जान जा चुकी है।
हत्याओं के बाद और भड़का आक्रोश
इन हत्याओं ने शांत बैठने के बजाय पूरे PoK क्षेत्र में भारी जनाक्रोश पैदा कर दिया है।
बाजार बंद और मार्च: खाई गाला गांव सहित कई इलाकों में लोगों ने पूरी तरह से बाजार बंद कर दिए और इस हिंसा के खिलाफ बड़े पैमाने पर मार्च निकाला। इस न्याय की मांग में बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे भी बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं।
गूंजा मशहूर नारा: प्रदर्शनों के दौरान प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तानी सेना के खिलाफ एक सुर में नारा लगाया, जो पूरे क्षेत्र में एकजुटता का प्रतीक बन चुका है— ‘ये जो दहशतगर्दी है, इसके पीछे वर्दी है।’
”पीछे नहीं हटेंगे”: संघर्ष निर्णायक मोड़ पर
इतने बड़े पैमाने पर हुए खून-खराबे और अपनों को खोने के बाद भी प्रदर्शनकारियों ने अपना आंदोलन खत्म करने से साफ इनकार कर दिया है। हजारों की संख्या में लोग अब भी रावलकोट की सड़कों पर डटे हुए हैं और आर्थिक राहत व राजनीतिक अधिकारों के लिए उनका संघर्ष जारी है।
अस्पतालों में घायलों की भीड़ और घरों में हो रहे अंतिम संस्कार के बीच आंदोलन के प्रमुख नेता सरदार अमान खान ने भीड़ को संबोधित करते हुए एक बड़ा एलान किया। उन्होंने घोषणा की कि उनका यह संघर्ष अब एक निर्णायक चरण में प्रवेश कर चुका है। उन्होंने संकल्प लिया कि चाहे जान-माल का कितना भी नुकसान क्यों न उठाना पड़े, बुनियादी सम्मान और हक की यह लड़ाई थमने वाली नहीं है।
