राष्ट्रीय

पेपर लीक से संसद तक: सड़क का आक्रोश अब सदन में फूटा, नया कानून ‘महाप्रहार’ या सिर्फ दिखावा?

पेपर लीक से संसद तक: सड़क का आक्रोश अब सदन में फूटा, नया कानून ‘महाप्रहार’ या सिर्फ दिखावा?

नई दिल्ली। देश के लाखों युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले पेपर लीक का मुद्दा अब सिर्फ सड़क का नहीं, संसद का सबसे बड़ा मामला बन चुका है। मंगलवार, 28 जुलाई 2026 को लोकसभा में एक हफ्ते के गतिरोध के बाद जब सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा शुरू हुई, तो सदन में सियासी घमासान छिड़ गया। सरकार इसे छात्रों के सपनों की रक्षा का ‘मील का पत्थर’ बता रही है, तो विपक्ष इसे “नाकामी का इकबालनामा” और “दिखावा” करार दे रहा है।

NEET-UG 2026 के कथित पेपर लीक के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में देशभर में छात्रों ने आंदोलन छेड़ दिया। प्रदर्शनों में पुलिस कार्रवाई, पैलेट गन और लाठीचार्ज के आरोप लगे। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा। पीएम नरेंद्र मोदी के आधी रात के इंस्टाग्राम संदेश के बाद कैबिनेट ने मंजूरी दी और सोमवार को विधेयक पेश हुआ। आज चर्चा के लिए स्पीकर ओम बिरला ने 6 घंटे तय किए, जो बाद में 8-10 घंटे तक बढ़ गए।

सरकार का पक्ष: जितेंद्र सिंह, बांसुरी स्वराज और किरेन रिजिजू

चर्चा की शुरुआत करते हुए केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने विधेयक को “संसद के इतिहास का मील का पत्थर” बताया। उन्होंने कहा, “यह संशोधन प्रधानमंत्री मोदी के उस संकल्प की पुनरावृत्ति है कि बच्चों के भविष्य से कोई समझौता नहीं होगा। यह छात्रों और युवाओं के कल्याण के प्रति सरकार की गहरी प्रतिबद्धता का प्रमाण है।”

उन्होंने 2009 से 2013 तक यूपीए शासन में हुई पेपर लीक घटनाओं की लंबी लिस्ट पढ़ी। सिंह ने जोर दिया कि जांच दो महीने में पूरी होगी, चार्जशीट के तीन महीने के अंदर ट्रायल पूरा होगा और हर राज्य में स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट बनेंगे।

संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने चर्चा का समय बढ़ाने की घोषणा की। उन्होंने कहा, “मैंने कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, डीएमके और एनसीपी के चीफ व्हिप से बात की। सभी 6 घंटे को 8 घंटे करने पर सहमत हैं। अगर और समय चाहिए तो हम 10 घंटे की चर्चा के लिए भी तैयार हैं।” रिजिजू ने विपक्ष से अपील की कि छात्रों के भविष्य से जुड़े इस महत्वपूर्ण बिल पर चर्चा में शामिल हों, न कि हंगामा करें। अखिलेश यादव से तीखी नोकझोंक में उन्होंने पूछा, “कौन बेहतर है—छात्रों की बात सुनकर बिल लाना या इमरजेंसी लगाकर आंदोलन कुचलना?”

बीजेपी सांसद बांसुरी स्वराज ने विपक्ष पर “सेलेक्टिव आउटरेज” का आरोप लगाया और कहा, “यह ट्रांसफॉर्मेटिव अमेंडमेंट है। मोदी जी ने पेपर लीक को गंभीर अपराध बताया है।” अनुराग ठाकुर ने राहुल गांधी पर तंज कसा कि छात्र उन्हें आंदोलन का नेतृत्व करने नहीं कह रहे थे।

विपक्ष का हमला: प्रियंका गांधी, गौरव गोगोई, अभिषेक बनर्जी और अखिलेश यादव

कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा का भाषण सबसे तीखा और भावनात्मक रहा। उन्होंने राम मनोहर लोहिया अस्पताल में घायल छात्रा के परिवार से मुलाकात का जिक्र किया। मां की पीड़ा बताते हुए कहा, “उस मां का शरीर दर्द से कांप रहा था। उसने कहा—मैं अपनी बेटी के लिए खुद लड़ूंगी। मुझे किसी की मदद नहीं चाहिए।”

प्रियंका ने सीधे प्रधानमंत्री और गृह मंत्री से पूछा, “मासूम लड़की पर इतना दमन क्यों? आंसू गैस, लाठी, पानी की बौछार क्यों? युवतियों का अपमान, कपड़े फाड़ना, क्रूरता क्यों? पैलेट गन और एके-47 क्यों चलाई? क्या ये आतंकवादी हैं? आदेश किसने दिया? प्रधानमंत्री ने या गृह मंत्री ने? जवाब दो!”

उन्होंने कहा, “पिछले एक दशक में 152 पेपर लीक हुए, 7.5 करोड़ छात्र प्रभावित हुए, लेकिन एक भी दोषी को सजा नहीं मिली। शिक्षा बजट 1.4 लाख करोड़ है, जबकि 22 लाख NEET अभ्यर्थियों के परिवार सालाना 1.32 लाख करोड़ खर्च करते हैं। उद्योगपतियों के 16 लाख करोड़ के कर्ज माफ कर दिए जाते हैं। युवा न्याय मांग रहे हैं, दान नहीं। सबसे बड़ी चोरी युवाओं के भविष्य और सपनों की हुई है। अगर युवा निराश हो गए तो भारत की सबसे बड़ी हार होगी। हम जान दे देंगे, लेकिन भारत हारने नहीं देंगे। प्रधानमंत्री जी को कैमरे का एंगल नहीं, दिल का एंगल बदलना पड़ेगा।”

प्रियंका के भाषण के बाद किरेन रिजिजू ने तंज कसा, “लगता है प्रियंका जी ने राहुल गांधी जी की स्पीच चोरी कर ली है।” इससे सदन में हंगामा हो गया।

कांग्रेस के डिप्टी लीडर गौरव गोगोई ने कहा, “सरकार गंभीर नहीं है, यह बिल सिर्फ दिखावा है। 2024 का कानून दो साल में क्यों फेल हो गया? पैलेट गन का आदेश किसने दिया?” उन्होंने NTA पर सवाल उठाए और बताया कि 2024 के मामले में 45 में से 44 आरोपी जमानत पर हैं।

तृणमूल कांग्रेस के अभिषेक बनर्जी ने इसे “एनडीए की नाकामी का इकबाल” बताया। अखिलेश यादव ने कहा, “जो राम मंदिर की चढ़ावा चोरी रोक नहीं सके, वे पेपर लीक कैसे रोकेंगे? इरादे ईमानदार नहीं हैं।”

राहुल गांधी चर्चा में शामिल होने वाले प्रमुख वक्ताओं में थे। विपक्ष की रणनीति में वे अगुवाई कर रहे थे और छात्रों पर पुलिस कार्रवाई पर जवाबदेही की मांग कर रहे थे। सदन में उन्होंने और कांग्रेस नेताओं ने मिलकर सरकार को घेरा।

नया कानून क्या लाता है?

व्यक्तिगत अपराध: न्यूनतम 5 से अधिकतम 10 साल जेल + 50 लाख रुपये तक जुर्माना।

संगठित गिरोह: न्यूनतम 7 साल जेल + 10 करोड़ तक जुर्माना।

सर्विस प्रोवाइडर्स पर 5 करोड़ तक जुर्माना और 8 साल का बैन।

जांच 2 महीने, ट्रायल 3 महीने में पूरा करने का लक्ष्य।

फास्ट ट्रैक कोर्ट और जरूरत पड़ने पर स्पेशल टास्क फोर्स।

चर्चा के दौरान 91 संशोधन पेश हुए। सदन में तीखी नारेबाजी भी हुई, लेकिन चर्चा जारी रही।

सड़क पर छात्रों का आक्रोश, संसद में नेताओं की जुबानी जंग—दोनों जगह एक ही सवाल गूंज रहा है। क्या यह कानून वाकई पेपर माफिया की कमर तोड़ेगा, या सिर्फ एक और राजनीतिक अध्याय साबित होगा? युवा इंतजार कर रहे हैं जवाब का। फिलहाल, महाघमासान जारी है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *