उत्तर कोरिया और चीन के रिश्तों में नया अध्याय: किम जोंग उन और शी जिनपिंग ने सहयोग बढ़ाने का लिया संकल्प
उत्तर कोरिया और चीन के रिश्तों में नया अध्याय: किम जोंग उन और शी जिनपिंग ने सहयोग बढ़ाने का लिया संकल्प
प्योंगयांग: उत्तर कोरिया और चीन ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने और राजनीतिक, आर्थिक तथा सांस्कृतिक क्षेत्रों में आपसी सहयोग को और मजबूत करने का एक बड़ा संकल्प लिया है। यह ऐतिहासिक सहमति उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच प्योंगयांग में आयोजित एक उच्चस्तरीय शिखर वार्ता के दौरान बनी है। दोनों नेताओं ने इस मुलाकात को रणनीतिक संबंधों के लिए एक नया अध्याय करार दिया है।
सात वर्षों बाद चीन के राष्ट्रपति की पहली राजकीय यात्रा
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग 8-9 जून (2026) को सात वर्षों के लंबे अंतराल के बाद उत्तर कोरिया की अपनी पहली राजकीय यात्रा पर प्योंगयांग पहुंचे, जहां उनका बेहद भव्य और राजकीय स्वागत किया गया। किम जोंग उन ने राष्ट्रपति शी के इस फैसले की विशेष रूप से सराहना की कि उन्होंने वर्ष 2026 की अपनी पहली विदेश यात्रा के लिए प्योंगयांग को चुना। किम के अनुसार, यह कदम दोनों देशों की गहरी मित्रता के प्रति चीन की प्राथमिकता और उत्तर कोरियाई जनता के प्रति उसके मजबूत समर्थन को दर्शाता है।
परमाणु कार्यक्रम पर साधी चुप्पी, संप्रभुता के सम्मान पर जोर
उत्तर कोरिया की सरकारी समाचार एजेंसी केसीएनए (KCNA) और योनहाप न्यूज एजेंसी के अनुसार, इस पूरी वार्ता के दौरान उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम या कोरियाई प्रायद्वीप की सुरक्षा स्थिति जैसे संवेदनशील मुद्दों पर कोई चर्चा नहीं हुई। हालांकि, शी जिनपिंग की यात्रा शुरू होने से ठीक पहले किम जोंग उन की बहन किम जो योंग ने स्पष्ट कर दिया था कि उनका देश किसी भी कीमत पर अपने परमाणु संपन्न दर्जे को नहीं छोड़ेगा और न ही किसी की धमकी बर्दाश्त करेगा।
इस रुख के बीच, शिखर वार्ता में दोनों देशों ने एक-दूसरे की संप्रभुता, सुरक्षा और विकास संबंधी हितों का पुरजोर समर्थन जारी रखने का वादा किया। किम जोंग उन ने चीन के साथ संबंधों को अपने देश की सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक प्राथमिकता बताते हुए कहा कि प्योंगयांग और बीजिंग के रिश्तों को समाजवादी देशों के बीच सहयोग का एक आदर्श मॉडल बनाया जाएगा।
रूस के साथ बढ़ती नजदीकियों के बीच चीन का बड़ा कदम
यह यात्रा एक ऐसे महत्वपूर्ण समय पर हुई है जब उत्तर कोरिया और चीन अपने रिश्तों को फिर से पुरानी मजबूती देने की कोशिश कर रहे हैं। हाल के वर्षों में रूस के साथ उत्तर कोरिया की बढ़ती सैन्य और रणनीतिक नजदीकियों के कारण बीजिंग और प्योंगयांग के संबंधों में कुछ ठंडापन देखा गया था। कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि शी जिनपिंग की यह यात्रा उत्तर कोरिया पर चीन के पुराने भू-राजनीतिक प्रभाव को फिर से स्थापित करने की दिशा में एक बेहद सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है।
इस पर जिनपिंग ने भी प्योंगयांग को भरोसा दिलाते हुए कहा:
”अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां चाहे जैसी भी हों, बीजिंग दोनों देशों के साझा हितों की रक्षा करने और क्षेत्र में अनुकूल रणनीतिक माहौल बनाए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध रहेगा।”
फ्रेंडशिप टॉवर पर दी श्रद्धांजलि, लगाया मित्रता का पौधा
अपनी यात्रा के दूसरे दिन मंगलवार को दोनों शीर्ष नेताओं ने अपनी पत्नियों री सोल-जू और पेंग लियुआन के साथ प्योंगयांग स्थित ‘फ्रेंडशिप टॉवर’ का दौरा किया और वहां शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की। यह स्मारक कोरियाई युद्ध में उत्तर कोरिया की ओर से लड़ने वाले चीनी सैनिकों की याद में बनाया गया है।
इसके बाद, दोनों नेताओं ने वर्कर्स पार्टी ऑफ कोरिया की सेंट्रल लीडरशिप अकादमी का दौरा किया और इस ऐतिहासिक मित्रता के प्रतीक के रूप में परिसर में एक पौधा भी लगाया। शी जिनपिंग ने जोर देकर कहा कि दोनों देशों को अपनी इस साझी विरासत और मित्रता को पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ाना चाहिए। इस दो दिवसीय सफल दौरे को पूरा करने के बाद चीनी राष्ट्रपति मंगलवार शाम को बीजिंग के लिए रवाना हो गए।
