Tuesday, June 9, 2026
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एच-1बी वीजा पर 1 लाख डॉलर का शुल्क रद्द होने के बाद व्हाइट हाउस ने किया डोनाल्ड ट्रंप का बचाव

एच-1बी वीजा पर 1 लाख डॉलर का शुल्क रद्द होने के बाद व्हाइट हाउस ने किया डोनाल्ड ट्रंप का बचाव

​वाशिंगटन: अमेरिकी फेडरल कोर्ट द्वारा एच-1बी वीजा (H-1B Visa) पर लगाया गया 1 लाख डॉलर का भारी-भरकम शुल्क रद्द किए जाने के बाद अब व्हाइट हाउस खुलकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बचाव में उतर आया है। अमेरिकी संघीय अदालत ने इस वीजा शुल्क को यह कहते हुए अमान्य और रद्द कर दिया था कि ट्रंप प्रशासन ने अपनी अधिकार सीमा से बाहर जाकर काम किया और यह एक तरह का ‘गैर-कानूनी टैक्स’ है।

​व्हाइट हाउस की दलील: “वीजा प्रोग्राम का दशकों से हो रहा था दुरुपयोग”

​अदालत के इस बड़े झटके के बाद व्हाइट हाउस की प्रवक्ता टेलर रोजर्स ने समाचार एजेंसी आईएएनएस (IANS) से बातचीत में राष्ट्रपति के फैसले को सही ठहराया। उन्होंने कहा:

​”राष्ट्रपति ट्रंप के पास किसी भी श्रेणी के विदेशियों के प्रवेश को रोकने का स्पष्ट कानूनी अधिकार है, जिन्हें वे अमेरिका के सर्वोत्तम हित में नहीं मानते हैं और उन्होंने इस मामले में ठीक यही किया।”

​एक सवाल के जवाब में प्रवक्ता ने आगे कहा कि एच-1बी प्रोग्राम का दशकों से दुरुपयोग हो रहा था और राष्ट्रपति ट्रंप ने आखिरकार इसे ठीक करने के लिए कड़ा कदम उठाया। उन्होंने उम्मीद जताई कि वाशिंगटन में एक फेडरल जज पहले ही लगभग ऐसे ही एक अन्य आदेश को सही ठहरा चुके हैं, इसलिए प्रशासन को पूरा भरोसा है कि जब इस फैसले के खिलाफ ऊपरी अदालत में अपील की जाएगी, तो यह आदेश पलट दिया जाएगा। हालांकि, व्हाइट हाउस ने अभी यह साफ नहीं किया है कि वह इस फैसले के खिलाफ कब अपील दायर करेगा।

​जिला न्यायाधीश का कड़ा फैसला: “बिना संसद की अनुमति के लगाया टैक्स”

​व्हाइट हाउस की यह तीखी प्रतिक्रिया मैसाचुसेट्स के अमेरिकी जिला न्यायाधीश (डिस्ट्रिक्ट जज) लियो टी. सोरोकिन के उस फैसले के कुछ घंटों बाद आई है, जिसमें उन्होंने इस विवादित नीति को पूरे देश में तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया। जज सोरोकिन ने अपने कड़े शब्दों वाले फैसले में निष्कर्ष निकाला कि ट्रंप प्रशासन ने अमेरिकी कांग्रेस (संसद) की अनुमति के बिना यह टैक्स थोपा है।

​जज ने अपने फैसले में स्पष्ट लिखा:

​”अदालत का मानना ​​है कि यह पॉलिसी कांग्रेस की ओर से जरूरी अधिकार दिए बिना एच-1बी याचिकाओं पर टैक्स लगाती है। ऐसी कोई विधायी शक्तियां नहीं हैं जो प्रतिवादियों को एच-1बी याचिकाओं पर एक लाख डॉलर का शुल्क लागू करने का अधिकार देती हों।”

​सितंबर 2025 की राष्ट्रपति की उद्घोषणा को चुनौती

​अदालत ने ट्रंप प्रशासन की उस दलील को सिरे से खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि इमिग्रेशन कानून के तहत राष्ट्रपति को मिलने वाली व्यापक शक्तियां इस तरह की फीस लगाने की अनुमति देती हैं। जज ने साफ किया कि प्रशासन जिन इमिग्रेशन कानूनों का हवाला दे रहा है, वे राष्ट्रपति को ऐसा वित्तीय शुल्क लगाने का कोई कानूनी अधिकार नहीं देते हैं।

​इस न्यायिक फैसले ने सीधे तौर पर सितंबर 2025 में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा हस्ताक्षरित उस उद्घोषणा (Proclamation) के कानूनी आधार को ही ध्वस्त कर दिया है, जिसके तहत नए एच-1बी आवेदन दाखिल करने वाले नियोक्ताओं (कंपनियों) के लिए अतिरिक्त 1 लाख डॉलर का भुगतान करना अनिवार्य कर दिया गया था। इसके साथ ही अदालत ने इस नीति को जमीन पर लागू करने वाली प्रशासनिक एजेंसियों की कार्यप्रणाली की भी कड़ी आलोचना की है।

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