अफ्रीका में पैर पसार रहा इबोला: कांगो से युगांडा तक फैला संक्रमण, WHO ने जारी किया हाई अलर्ट
अफ्रीका में पैर पसार रहा इबोला: कांगो से युगांडा तक फैला संक्रमण, WHO ने जारी किया हाई अलर्ट
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने चेतावनी दी है कि डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) में इबोला का प्रकोप बेहद तेजी से बढ़ रहा है। कांगो में न केवल इबोला के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है, बल्कि यह अब एक बड़े भौगोलिक इलाके में फैलते हुए पड़ोसी देश युगांडा तक अपनी सीमाएं पार कर चुका है। डब्ल्यूएचओ द्वारा जारी ताजा अपडेट के अनुसार, इस महामारी का जोखिम कांगो (DRC) के लिए ‘बेहद गंभीर’ बना हुआ है।
क्षेत्रीय स्तर पर बढ़ा जोखिम, वैश्विक खतरा फिलहाल कम
डब्ल्यूएचओ के मुताबिक, युगांडा सहित कांगो के उन सभी पड़ोसी देशों के लिए क्षेत्रीय स्तर पर जोखिम काफी ‘अधिक’ है जो प्रभावित क्षेत्रों के साथ अपनी जमीनी सीमाएं साझा करते हैं। हालांकि, राहत की बात यह है कि शेष अफ्रीकी क्षेत्रों और वैश्विक स्तर पर इबोला संक्रमण का खतरा फिलहाल ‘कम’ आंका गया है।
बिक्री और संक्रमण के हालिया आंकड़ों पर नजर डालें तो स्थिति चिंताजनक है:
डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC): रविवार तक कांगो में इबोला के 515 पुष्ट (कन्फर्म) मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें से 91 लोगों की मौत हो चुकी है।
युगांडा: यहां अब तक 19 पुष्ट मामले दर्ज किए गए हैं, जिनमें दो मौतें और एक संभावित जानलेवा मामला शामिल है।
महामारी विज्ञानियों के अनुसार, युगांडा में सामने आए सभी मामले सीधे तौर पर कांगो (DRC) से जुड़े हैं। इनमें बाहर से आए संक्रमित लोग (इंपोर्टेड केसेस) और उनके संपर्क में आए स्थानीय लोगों व स्वास्थ्य कर्मियों के बीच हुआ सेकेंडरी ट्रांसमिशन (संक्रमण का प्रसार) दोनों शामिल हैं।
निपटने के लिए 51.8 करोड़ डॉलर की संयुक्त योजना शुरू
इस खतरनाक प्रकोप से निपटने के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण, डब्ल्यूएचओ और अन्य अंतरराष्ट्रीय साझेदार मिलकर युद्ध स्तर पर काम कर रहे हैं। इसी कड़ी में 5 जून को ‘अफ्रीका सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन’ (अफ्रीका सीडीसी) और डब्ल्यूएचओ ने संयुक्त रूप से महाद्वीपीय स्तर की इबोला तैयारी और प्रतिक्रिया योजना की शुरुआत की है। इस वैश्विक योजना के तहत 51.8 करोड़ अमेरिकी डॉलर का फंड जुटाने का लक्ष्य रखा गया है, ताकि प्रभावित और जोखिम वाले अफ्रीकी देशों को इस महामारी की समय रहते पहचान करने, बुनियादी तैयारी करने और प्रभावी चिकित्सा प्रतिक्रिया देने में वित्तीय सहायता मिल सके।
बुंडीबुग्यो वेरिएंट है जिम्मेदार, चमगादड़ों से फैलने की आशंका
समाचार एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, वर्तमान में फैले इस प्रकोप का मुख्य कारण बुंडीबुग्यो वायरस बीमारी (BVD) है, जो इबोला का एक बेहद गंभीर और अक्सर जानलेवा रूप माना जाता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह वायरस मूल रूप से ‘फ्रूट बैट’ (चमगादड़ की एक प्रजाति) से पैदा होता है। यह संक्रमित जानवरों के खून, स्राव या फिर संक्रमित इंसानों के बॉडी फ्लूइड (शारीरिक तरल पदार्थ) के सीधे संपर्क में आने से फैलता है।
इन्क्यूबेशन पीरियड: बुंडीबुग्यो वेरिएंट का इन्क्यूबेशन पीरियड (शरीर में वायरस प्रवेश करने से लेकर लक्षण दिखने का समय) 2 से 21 दिनों का होता है।
संक्रमण का प्रसार: इस बीमारी की एक खास बात यह है कि संक्रमित व्यक्ति तब तक दूसरों में यह बीमारी नहीं फैला सकता, जब तक कि उसमें इसके स्पष्ट लक्षण दिखने शुरू न हो जाएं।
क्या है इबोला का इतिहास?
इबोला मूल रूप से ‘ऑर्थोइबोलावायरस’ से होने वाली एक अत्यंत गंभीर बीमारी है, जो ‘फिलोविरिडे’ वायरस परिवार का हिस्सा है। यह इंसानों और प्राइमेट्स (जैसे बंदर, चिंपैंजी) को अपना शिकार बनाती है। इस बीमारी की पहचान पहली बार साल 1976 में जैरे (अब डीआरसी) और सूडान (अब दक्षिण सूडान) में लगभग एक साथ हुई थी।
कांगो में बुंडीबुग्यो वेरिएंट के कारण फैली इस मौजूदा महामारी की आधिकारिक घोषणा 15 मई को की गई थी। हालांकि, बुंडीबुग्यो वेरिएंट पूर्व के कई प्रकोपों के लिए जिम्मेदार रहे ‘जैरे स्ट्रेन’ की तुलना में कम सामान्य (दुर्लभ) है, लेकिन इसके बावजूद यह शरीर पर बेहद घातक हमला करता है और बड़े पैमाने पर मौत का कारण बन सकता है। यही वजह है कि स्वास्थ्य एजेंसियां इसे रोकने के लिए पूरी ताकत झोंक रही हैं।
