Monday, June 8, 2026
उत्तराखंड

न्याय व्यवस्था को समावेशी और सुलभ बनाने में “जूडिशियम 2.0” महत्वपूर्ण पहल: मुख्यमंत्री धामी

न्याय व्यवस्था को समावेशी और सुलभ बनाने में “जूडिशियम 2.0” महत्वपूर्ण पहल: मुख्यमंत्री धामी

​मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने यूपीईएस (UPES) बिधौली में आयोजित उत्तराखंड न्यायाधीश संघ के वार्षिक सम्मेलन “जूडिशियम 2.0 : इंक्लूज़न, एक्सेस एंड स्ट्रेंथनिंग” (Judicium 2.0: Inclusion, Access and Strengthening) में मुख्य अतिथि के रूप में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने न्याय व्यवस्था को अधिक समावेशी, सुलभ, पारदर्शी और प्रभावी बनाने पर जोर देते हुए इसे सुशासन की मूल भावना बताया।

​मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम के दौरान उत्तराखंड जज एसोसिएशन की कल्याण निधि के लिए 05 करोड़ रुपये की धनराशि दिए जाने की बड़ी घोषणा की और एसोसिएशन की स्मारिका का विमोचन भी किया।

​भौगोलिक और आर्थिक परिस्थितियां न्याय में बाधक न बनें

​सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज के प्रत्येक वर्ग तक त्वरित एवं निष्पक्ष न्याय की पहुंच सुनिश्चित करना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने विशेष रूप से उत्तराखंड की विषम परिस्थितियों का जिक्र करते हुए कहा:

​दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंच: उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों को सरल एवं सुलभ न्याय उपलब्ध कराना आवश्यक है। न्याय तक पहुंच में भौगोलिक अथवा आर्थिक परिस्थितियां बाधक नहीं बननी चाहिए।

​समयबद्ध न्याय: न्याय की सार्थकता उसकी निष्पक्षता और समयबद्धता में निहित है। न्याय में अनावश्यक देरी होने से आम जनता का विश्वास प्रभावित होता है, इसलिए न्यायिक प्रक्रियाओं को समयबद्ध बनाने के सतत प्रयास होने चाहिए।

​तकनीक और आधुनिकता से मजबूत हो रही न्यायपालिका

​मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश की न्यायिक व्यवस्था में हुए ऐतिहासिक सुधारों को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि देश में लागू हुए नए कानूनों—भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम—ने व्यवस्था को आधुनिक बनाया है।

​डिजिटल न्यायिक तंत्र: ई-कोर्ट्स, नेशनल ज्यूडिशियल डेटा ग्रिड, डिजिटल केस मैनेजमेंट और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग जैसी व्यवस्थाओं ने न्यायिक प्रक्रियाओं को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाया है। इसी क्रम में राज्य सरकार भी न्यायालयों के आधारभूत ढांचे (Infrastructure) को मजबूत करने और राजस्व लोक अदालतों के माध्यम से लंबित मामलों का त्वरित निस्तारण करने के लिए लगातार काम कर रही है।

​कड़े कानूनों से मजबूत हुआ कानून का राज

​मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार की ‘अपराध के प्रति जीरो टॉलरेंस’ की नीति का उल्लेख करते हुए उत्तराखंड में लिए गए बड़े नीतिगत निर्णयों को साझा किया:

​समान नागरिक संहिता (UCC): महिला सशक्तिकरण और सभी नागरिकों को समान न्याय उपलब्ध कराने के उद्देश्य से राज्य में लागू यूसीसी एक ऐतिहासिक कदम है।

​सख्त कानून: राज्य में लागू नकल विरोधी कानून, अवैध धर्मांतरण निरोधक कानून, दंगा रोधी कानून और भ्रष्टाचार व अवैध अतिक्रमण के खिलाफ की जा रही कार्रवाइयों से उत्तराखंड में कानून के राज को मजबूती मिली है।

​मुख्य न्यायाधीश सहित कई दिग्गज रहे मौजूद

​इस गरिमामयी कार्यक्रम में उत्तराखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री मनोज कुमार गुप्ता सहित न्यायपालिका के कई वरिष्ठ जज शामिल हुए, जिनमें शामिल हैं:

​न्यायमूर्ति रविन्द्र मैठाणी

​न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल

​न्यायमूर्ति आलोक मेहरा

​न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय

​न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह

​उत्तराखंड उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल श्री योगेश कुमार गुप्ता

​कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि “जूडिशियम 2.0” सम्मेलन से निकले निष्कर्ष विकसित एवं श्रेष्ठ उत्तराखंड के निर्माण के संकल्प को साकार करने में सहायक सिद्ध होंगे।

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