इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) में फिर हुआ रिसाव, सुरक्षित स्थान पर भेजे गए नासा के अंतरिक्ष यात्री
इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) में फिर हुआ रिसाव, सुरक्षित स्थान पर भेजे गए नासा के अंतरिक्ष यात्री
वाशिंगटन: इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) के रूसी हिस्से में एक बार फिर हवा के रिसाव (लीक) का मामला सामने आया है। शुक्रवार को हुई इस घटना के बाद नासा (NASA) ने अत्यधिक सावधानी बरतते हुए अपने पांच चालक दल के सदस्यों (अंतरिक्ष यात्रियों) को तुरंत सुरक्षित स्थान पर जाने का आदेश दिया। आदेश के बाद ये अंतरिक्ष यात्री कुछ समय के लिए स्टेशन पर ही डॉक किए गए स्पेसएक्स (SpaceX) ड्रैगन कैप्सूल के अंदर चले गए, जो आपातकालीन स्थिति में जीवनरक्षक नाव (लाइफबोट) का काम करता है।
नासा की प्रवक्ता बेथानी स्टीवंस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बताया कि यह फैसला पूरी तरह से एहतियात के तौर पर लिया गया था। अब स्थिति सामान्य होने के बाद अंतरिक्ष यात्री अपने स्टेशनों पर लौट आए हैं।
रूसी हिस्से में मिलीं दो दरारें, मरम्मत का काम जारी
रूसी अंतरिक्ष एजेंसी ‘रोस्कोस्मोस’ के अनुसार, यह रिसाव आईएसएस के ट्रांसफर चेंबर (PRK) को प्रेशराइज करते समय देखा गया था। निरीक्षण के दौरान कॉस्मोनॉट्स (रूसी अंतरिक्ष यात्रियों) को हवा के रिसाव के दो संभावित स्थानों का पता चला:
पहला स्थान: इसे ‘जर्मेटल-1’ नाम के टू-कॉम्पोनेंट सीलेंट की पहली परत लगाकर तुरंत बंद कर दिया गया।
दूसरा स्थान: यह पीआरके के कोनिकल (शंक्वाकार) हिस्से पर है, जिसे सील करने की तैयारी की जा रही है।
अंतरिक्ष स्टेशन के इस हिस्से में सालों से दरारें और रिसाव की समस्याएं आती रही हैं, जिस पर दोनों एजेंसियां लगातार काम कर रही हैं।
2030 में रिटायर हो जाएगा इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन
नासा और रूस की रोस्कोस्मोस इस अंतरराष्ट्रीय स्टेशन के दो मुख्य संचालक हैं। पिछले 25 सालों से लगातार इंसानों का घर रहे इस स्पेस स्टेशन को साल 2030 में सेवामुक्त (रिटायर) करने की योजना है। योजना के मुताबिक, 2030 में इसे पृथ्वी की कक्षा से बाहर लाकर प्रशांत महासागर के एक सुनसान इलाके में सुरक्षित रूप से गिरा दिया जाएगा।
शीत युद्ध के बाद वैश्विक संबंधों में सुधार के प्रतीक के रूप में स्थापित हुआ आईएसएस, साल 2022 में यूक्रेन पर रूस के आक्रमण के बाद भी पश्चिमी देशों और रूस के बीच आपसी सहयोग का एक दुर्लभ और मजबूत जरिया बना हुआ है।
